
पेपर लीक का हजारीबाग कनेक्शन
देशभर में पिछले कुछ सालों में लगातार हुए पेपर लीक के मामलों में जिन शहरों का नाम बार-बार सुर्खियों में रहा, उसमें झारखंड का हजारीबाग भी शामिल रहा है. पहले NEET-UG 2024, फिर BPSC TRE-3, उसके बाद JSSC CGL और अब JPSC 14वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा, इन सभी परीक्षाओं को लेकर हुए पेपर लीक और विवादों से हजारीबाग का कनेक्शन जरूर रहा है.
ऐसे एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि पिछले कुछ सालों में हुए पेपर लीक के मामले में हजारीबाग का लगातार जिक्र क्यों आ रहा है. क्या हजारीबाग पेपर लीक माफियाओं के लिए एक सेफ जोन बन चुका है? क्या बिहार की सीमा से सटे होने के चलते, झारखंड का यह जिला दोनों ही राज्यों के पेपर लीक माफियाओं के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बन गया है.
चार बड़े पेपर लीक, एक ही शहर
- NEET-UG 2024 पेपर लीक- इस मामले में जांच एजेंसियों ने हजारीबाग को सबसे अहम कड़ी माना. जांच के दौरान एहसानुल हक, इम्तियाज आलम, जमालुद्दीन और पंकज आदित्य समेत कई लोगों को यहां से गिरफ्तार किया गया था. इन पर परीक्षा केंद्र से प्रश्नपत्र समय से पहले बाहर निकालकर चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाने का आरोप था.
- BPSC TRE-3 पेपर लीक: इस शिक्षक भर्ती की परीक्षा के पेपर लीक की जांच की आंच भी हजारीबाग तक पहुंची थी. इस पेपर लीक के मुख्य आरोपी संजीव मुखियाया के गैंग द्वारा चुनिंदा अभ्यर्थियों को हजारीबाग बुलाने का ही आरोप था. हजारीबाग में ही उन्हें एक होटल में बैठाकर उत्तर याद कराया गया था.
- JSSC CGL परीक्षा विवाद: 2024 में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) CGL परीक्षा के दौरान भी पेपर लीक के आरोप लगे थे. हजारीबाग के सिंघानी स्थित जैक एंड जील (जैक एंजल) स्कूल परीक्षा केंद्र पर प्रश्न-पत्रों के सील खुले होने और धांधली के गंभीर आरोप सामने आए थे.
- 14वीं JPSC परीक्षा विवाद: अब जेपीएससी की संयुक्त परीक्षा में धांधली और पेपर लीक के आरोपों में सीआईडी ने हजारीबाग से लालू यादव और प्रदीप यादव को पूछताछ के लिए पकड़ा है. इसका साफ अर्थ यही है कि पिछले कई पेपर लीक में हजारीबाग कनेक्शन सामने आ ही रहा है.

क्यों पेपर लीक का हॉटस्पॉट बन गया हजारीबाग?
- पेपर लीक माफियाओं के लिए सुरक्षित जगह बनने के पीछे हजारीबाग की भगौलिक स्थिति भी एक बड़ी वजह हो सकती है. दरअसल, जांच एजेंसियों का कहना है कि हजारीबाग से बिहार के कई जिलों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है. जांच एजेंसियों का मानना है कि इससे गिरोहों के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य में आवाजाही और नेटवर्क चलाना आसान हो जाता है.
- ऐसे में सड़क मार्ग से पटना, नवादा, गया, कोडरमा जैसे इलाकों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है. अगर किसी पेपर लीक मापिया का नेटवर्क दोनों राज्यों में सक्रिय हो, तो उसके लिए हजारीबाग एक सुविधाजनक केंद्र बन सकता है. एक बार राज्य में पेपर लीक के अपराध को अंजाम देकर तुरंत दूसरे राज्य के नजदीकी क्षेत्र में एंट्री कर जाते हैं. ऐसे में कई बार इसी वजह से पुलिस की गिरफ्त से भी बचे जाते हैं.
- हजारीबाग में स्कूल-कॉलेजों का ठीक-ठाक नेटवर्क है. ऐसे में यहां परीक्षा केंद्र अधिक बनाए जाते हैं. ऐसे में यहां परीक्षा में खलल पड़ने का जोखिम भी ज्यादा होता है. इसके अलावा छोटे शहरों में कई बार परीक्षा प्रबंधन और निगरानी की व्यवस्था महानगरों जितनी मजबूत नहीं होती. ऐसे में प्रशासनिक स्तर पर हल्की सी भी लापरवाही, पेपर लीक माफियाओं को एक मौका जरूर दे देती है और उन्हें सिस्टम में सेंध लगाने का अवसर मिल जाता है.
हजारीबाग को पेपर लीक का एपिसेंटर कहना कितना सही है?
हालांकि, हजारीबाग को ही पेपर लीक का एक केंद्र बनाना भी सही नहीं है. दरअसल, पेपर लीक में सिर्फ एक व्यक्ति और एक शहर से जुड़े लोगों का हाथ नहीं रहता है. इसमें प्रश्नपत्र छापने वाली एजेंसियां, परिवहन व्यवस्था, परीक्षा केंद्र, स्थानीय सहयोगी, दलाल संगठित गिरोह सभी की भूमिका की जांच होती है. इनका ताल्लुक देश के अन्य शहरों से भी हो सकता है. हालांकि, यह जरूर हो सकता है कि कमजोर निगरानी व्यवस्था के चलते हजारीबाग में पेपर लीक माफियाओं द्वारा परीक्षा में धांधली पैदा करना आसान जरूर होता रहा होगा.
सरकार की व्यवस्था पर भी सवाल
फिलहाल, नीट, BPSC TRE-3, JSSC CGL और अब JPSC इन चार मामलों ने पेपर लीक मामले हजारीबाग को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है. बार-बार सामने आ रहे इस कनेक्शन ने जांच एजेंसियों का ध्यान जरूर खींचा है. ऐसे में सवाल यह भी उठता है, कि जब कई मामलों में हजारीबाग का नाम सामने आ चुका है, यहां से पेपर लीक माफियाओं का खात्मा किया जा सके, ऐसी व्यवस्था केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से क्यों नहीं बनाई गई.

सचिन धर दुबे
सचिन धर दुबे को डिजिटल पत्रकारिता में करीब 7 साल का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में न्यूज 18 से की. फिर गांव कनेक्शन, ANI, आजतक होते हुए अब TV9 Hindi तक पहुंचे. न्यूज 18 में असाइनमेंट पर कॉपी एडिटर, गांव कनेक्शन में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट, ANI में कंटेंट राइटर और आजतक में सीनियर सब एडिटर पद पर काम किया. सचिन ने कृषि पत्रकारिता में काफी समय बिताया. उनकी राजनीति, विश्व, स्पोर्ट्स, हिस्ट्री ओरिएंटेड विषयों पर लिखने में काफी इंटरेस्ट है. सचिन ने गांव कनेक्शन में रहते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से Msc इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के रहने वाले हैं.
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