98% मांगें मान लीं! फिर झारखंड सरकार के JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने में हाथ क्यों कांप रहे हैं?

Published on 13 अग॰ 2026

रांची की सड़कों पर लाठियां खा चुका और पिछले 20 दिनों से आंदोलन कर रहे युवाओं के बीच एक सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है. वो ये है कि जब सरकार 14वीं JPSC और बैकलाग परीक्षाएं रद्द कर सकती है, तो JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने में उनके हाथ क्यों कांप रहे हैं?

हाल ही में हेमंत सोरेन सरकार के प्रतिनिधि और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने छात्र प्रतिनिधिमंडलों से करीब 6 घंटे तक लंबी वार्ता की. सरकार का दावा है कि उन्होंने छात्रों की "98% मांगें" मान ली हैं, लेकिन जिस JSSC-CGL परीक्षा को लेकर सबसे ज्यादा बवाल है, उसे रद्द करने से सरकार ने साफ इनकार कर दिया है.  

आखिर सरकार का क्या स्टैंड है और वह CGL परीक्षा रद्द क्यों नहीं कर रही? आइए इसके पीछे के 3 बड़े पेंच समझते हैं. 

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हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का 'कवर'

सरकार का सबसे बड़ा तर्क कानूनी है. मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने साफ कहा कि JSSC-CGL परीक्षा का आयोजन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और उनकी निगरानी में किया गया है. सरकार का कहना है कि जब कोई मामला सीधे शीर्ष अदालतों की निगरानी में हो, तो राज्य सरकार के पास इसे 'एकतरफा' रद्द करने का अधिकार नहीं है. बिना किसी ठोस कानूनी आधार के इसे रद्द करने से मामला सीधे ज्यूडिशियल रिव्यू (न्यायिक समीक्षा) में फंस जाएगा.  

'रिजल्ट आ चुका है, नियुक्तियां हो चुकी हैं'

सरकार का दूसरा तर्क यह है कि CGL परीक्षा की प्रक्रिया अब काफी आगे बढ़ चुकी है. रिजल्ट प्रकाशित हो चुके हैं और कई सफल उम्मीदवार अपनी-अपनी पोस्टिंग पर जॉइन (Employ) भी कर चुके हैं. ऐसे में बीच में पूरी परीक्षा रद्द करने से जो उम्मीदवार सेलेक्ट हो चुके हैं, वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे और पूरी प्रक्रिया सालों-साल के लिए लटक जाएगी.  
 

CBI जांच से इनकार, 'रिटायर्ड जज' का ऑफर

छात्रों की स्पष्ट मांग है कि CGL की पूरी परीक्षा रद्द हो और मामले की CBI जांच हो. लेकिन सरकार का स्टैंड इसके उलट है. सरकार ने CBI जांच की मांग भी ठुकरा दी है. इसके बजाय, सरकार ने प्रस्ताव रखा है कि CID जांच करेगी और उसकी निगरानी के लिए एक 'रिटायर्ड जज' की अध्यक्षता में मॉनिटरिंग कमेटी बनाई जाएगी.  

सरकार का कहना है कि अगर CID जांच में बड़े वित्तीय लेन-देन के सबूत मिलते हैं, तो वह इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) से भी जांच का आग्रह करेगी, लेकिन परीक्षा किसी कीमत पर रद्द नहीं करेगी.  

छात्रों का पलटवार: 'सरकार 98% का झूठ बोल रही है'

आंदोलनकारी छात्र (JPSC-JSSC अभ्यर्थी न्याय मंच) सरकार के इस तर्क को सिरे से खारिज कर रहे हैं. छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार 98% मांगें मानने का झूठ फैला रही है. हकीकत यह है कि उन्होंने 13 विवादित परीक्षाओं में से सिर्फ 3 (14वीं JPSC प्रीलिम्स और JPSC बैकलाग 2023, 2025) को रद्द किया है. छात्रों का तर्क है कि जब पेपर लीक और TDPL एजेंसी के फर्जीवाड़े के पूरे सबूत हैं, तो कोर्ट के नाम पर सिर्फ सिंडिकेट को बचाया जा रहा है.  

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