भारत-चीन सीमा विवाद के बीच डोभाल का बीजिंग दौरा, LAC पर क्या निकलेगा हल?

Published on 23 अग॰ 2026

भारत-चीन सीमा विवाद के बीच डोभाल का बीजिंग दौरा, LAC पर क्या निकलेगा हल?

अजीत डोभाल की चीन यात्रा.

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार (24 अगस्त) को बीजिंग पहुंचने वाले हैं, जहां वे अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ भारत-चीन सीमा मुद्दे पर स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स (SR) बातचीत में हिस्सा लेंगे. दोनों देशों के बीच मंगलवार को SR बातचीत का 25वां राउंड होने वाला है. यह बातचीत इसलिए अहम है, क्योंकि ये चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS समिट के लिए भारत आने से पहले हो रही है. हालांकि शी के दौरे पर अभी तक कोई ऑफिशियल कन्फर्मेशन नहीं है, लेकिन दोनों तरफ के अधिकारी उनके शामिल होने को लेकर उम्मीद लगाए हुए हैं.

पीटीआई न्यूज के अनुसारये बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब भारत और चीन लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर तनाव कम करने और सैन्य टकराव की स्थिति को कम करने की कोशिश कर रहे हैं. खास बात यह है कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्ते बहुत खराब हो गए थे, जिसके बाद भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में बड़ी संख्या में सैनिकों और मिलिट्री इक्विपमेंट की तैनाती की थी.

LAC पर तनाव कम करने पर फोकस

हाल के सालों में, दोनों देशों के बीच सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई राउंड की बातचीत हुई है. इन बातचीत का मकसद LAC से सैनिकों की वापसी, डिसइंगेजमेंट और बॉर्डर इलाकों में शांति और स्थिरता पक्का करना रहा है.

स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स मैकेनिज्म भारत और चीन के बीच बॉर्डर विवाद का राजनीतिक हल निकालने के लिए बनाया गया एक अहम फोरम है. भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहाकार और चीन के उनके समकक्ष इसी मैकेनिज्म के तहत बातचीत करते हैं. इसका मकसद न सिर्फ मौजूदा सैन्य तनाव को कम करना है, बल्कि सीमा विवाद के पूरे और लंबे समय के हल के लिए राजनीतिक रास्ता निकालना भी है.

अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास चीन की सैन्य गतिविधि बढ़ने की खबरों पर, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 12 अगस्त को कहा कि चीन-भारत सीमापर हालात “अभी आम तौर पर स्थिर हैं.” गुओ ने कहा कि चीन और भारत ने चीन-इंडिया बॉर्डर अफेयर्स पर कंसल्टेशन और कोऑर्डिनेशन के लिए वर्किंग मैकेनिज्म की 36वीं मीटिंग की.

अरुणाचल पर चीन का दावा खारिज

उन्होंने कहा, “दोनों पक्ष डिप्लोमैटिक और मिलिट्री चैनल्स के जरिए कम्युनिकेशन बनाए रखने और बॉर्डर एरिया में मिलकर शांति बनाए रखने पर सहमत हुए.” भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा कि इंडिया चीन के साथ बॉर्डर एरिया से जुड़े मामलों को “सबसे सीरियस” मानता है और जोर देकर कहा कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर शांति बनाए रखना “सबसे जरूरी” है, क्योंकि बॉर्डर की हालत ही दोनों देशों के रिश्तों के पूरे रास्ते को तय करेगी.

इससे पहले, नई दिल्ली ने अरुणाचल प्रदेश में 27 जगहों और ज्योग्राफिकल चीजों को उनके स्टैंडर्ड नामों से फॉर्मल तौर पर पहचानने के बीजिंग के फैसले की आलोचना को भी गलत बताया था. इस बात पर जोर देते हुए कि यह राज्य भारत का “अविभाज्य और अभिन्न” हिस्सा है और इस “पक्का सच” को कोई नहीं बदल सकता.

चीन, जो अरुणाचल प्रदेश को साउथ तिब्बत का हिस्सा बताता है, 2017 से इस इलाके के लिए अपने नाम जारी कर रहा है. भारत ने चीन के इस कदम को “बेकार और बेतुका” बताया और कहा कि ऐसे कामों से यह “पक्का” सच नहीं बदलेगा कि यह राज्य “हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा था, है और रहेगा.”

यह दौरा क्यों है जरूरी?

डोभाल और वांग के बीच बातचीत में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल, बॉर्डर पर शांति बनाए रखना, सैनिकों की तैनाती, बॉर्डर मैनेजमेंट और भारत-चीन के आपसी रिश्तों की पूरी स्थिति से जुड़े मुद्दे खास तौर पर सामने आने की उम्मीद है.

भारत ने हमेशा कहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए एक जरूरी शर्त है. चीन ने भी सीमा विवाद को बातचीत से सुलझाने पर जोर दिया है. इस मीटिंग का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक बातचीत और सैन्य लेवल की बातचीत, दोनों ही भारत और चीन के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए बहुत जरूरी हैं.

डोभाल का दौरा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि स्पेशल रिप्रेजेंटेटिव्स की बातचीत सिर्फ सीमा विवाद के तुरंत मिलिट्री मैनेजमेंट का एक प्लैटफॉर्म नहीं है, बल्कि यह भारत-चीन बॉर्डर मुद्दे का लंबे समय का पॉलिटिकल हल निकालने में भी अहम भूमिका निभा सकती है.

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अजय विद्यार्थी

अजय विद्यार्थी

कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रैजुएशन. प्रभात खबर में बतौर सीनियर न्यूज़ एडिटर काम किया. ग्राउंड रिपोर्टिंग और एडिटिंग में करीब 20 सालों से ज्यादा का अनुभव. राजस्थान पत्रिका में चीफ रिपोर्टर रहने के दौरान कई ऐसी स्टोरी की, जिन्हें सराहा गया.

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