
मध्य प्रदेश में दो से अधिक संतान होने पर सरकारी नौकरी नहीं मिलने और नौकरी जाने से जुड़े करीब 25 साल पुराने प्रावधान को खत्म करने की कवायद फिलहाल ब्यूरोक्रेसी के स्तर पर अटक गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश के बावजूद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) अब तक इस संबंध में प्रस्ताव कैबिनेट के सामने नहीं ला सका है।
यह प्रावधान राज्य में सरकारी सेवाओं से जुड़े नियमों में लंबे समय से लागू है। इसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक संतान होने की स्थिति में सरकारी नौकरी के लिए अपात्रता या नौकरी पर असर जैसी स्थिति बनती है। अब सरकार इस पुराने प्रावधान में बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी नहीं आया प्रस्ताव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से संबंधित प्रावधान को खत्म करने के निर्देश दिए जाने के बाद सामान्य प्रशासन विभाग को प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमंडल के समक्ष रखने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी थी। हालांकि, अभी तक प्रस्ताव कैबिनेट में पेश नहीं हो पाया है।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्ताव को लेकर विभागीय स्तर पर नियमों और कानूनी पहलुओं की समीक्षा की जा रही है। अलग-अलग विभागों से जुड़े प्रावधानों और सेवा नियमों में आवश्यक संशोधन को लेकर भी मंथन किया जा रहा है।
25 साल पुराने नियम में बदलाव की तैयारी
दो से अधिक संतान से जुड़ा यह प्रावधान करीब 25 साल पहले लागू किया गया था। उस समय जनसंख्या नियंत्रण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकारी सेवाओं में इस तरह की शर्तें लागू की गई थीं।
समय के साथ परिस्थितियों में बदलाव और सरकार की नई नीतियों के मद्देनजर अब इस प्रावधान को खत्म करने पर विचार किया जा रहा है। प्रस्ताव को अंतिम रूप देने के बाद इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए रखा जाना है।
कर्मचारियों और नौकरी के दावेदारों की नजर
इस प्रावधान में बदलाव का असर सरकारी नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों के साथ-साथ वर्तमान कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है। खासतौर पर वे लोग जो मौजूदा नियमों के कारण सरकारी सेवा में नियुक्ति या पदोन्नति से जुड़े मामलों में प्रभावित हो सकते हैं, उनकी नजर सरकार के अगले कदम पर है।
फिलहाल प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं आने के कारण नियम में बदलाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब देखना होगा कि सामान्य प्रशासन विभाग कब तक प्रस्ताव तैयार कर मंत्रिमंडल के समक्ष रखता है और सरकार इस पुराने प्रावधान को खत्म करने पर क्या अंतिम निर्णय लेती है।