MP: फर्जी जाति प्रमाण पत्र, 28 साल पुलिस की नौकरी... जांच हुई तो खुला बड़ा फर्जीवाड़ा

Published on 15 सित॰ 2026

Jabalpur News: मध्य प्रदेश पुलिस में फर्जी दस्तावेज के सहारे सरकारी नौकरी हासिल करने का हैरान करने वाला मामला सामने आया है. आरोप है कि एक व्यक्ति ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर पुलिस विभाग में करीब 28 साल तक नौकरी की और सब इंस्पेक्टर के पद तक पहुंच गया. मामला शिकायत के बाद जांच में आया, तो दो अलग-अलग विभागों की पड़ताल में जाति प्रमाण पत्र पर गंभीर सवाल खड़े हुए. जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने प्रमाण पत्र को अमान्य कर दिया है.

दरअसल, यह पूरा मामला सिविल लाइन जबलपुर में रहने वाले सब इंस्पेक्टर अमिताभ प्रताप सिंह उर्फ अमिताभ थियोफिलस से जुड़ा है. जानकारी के मुताबिक, अमिताभ ने वर्ष 1998 में जबलपुर कलेक्ट्रेट कार्यालय से गोंड अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र बनवाया था. इसी प्रमाण पत्र के आधार पर पुलिस विभाग में नौकरी हासिल करने का आरोप है. इस मामले में भोपाल कोलार रोड निवासी महिला प्रमिला तिवारी उपाध्याय ने अक्टूबर 2024 में शिकायत की थी. शिकायत में आरोप लगाया गया कि अमिताभ ने फर्जी तरीके से अनुसूचित जनजाति का प्रमाण पत्र बनवाया और इसी के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त की.

शिकायत के बाद हुई जांच

शिकायत के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए गए. कलेक्टर जबलपुर के स्तर पर जांच तत्कालीन एसडीएम रांझी आरएस मरावी को सौंपी गई. वहीं पुलिस विभाग की ओर से डीएसपी विजय सिंह गोठरिया ने भी मामले की जांच की. जांच के दौरान अमिताभ के जाति संबंधी दस्तावेजों और पुराने रिकॉर्ड को खंगाला गया. जांच अधिकारियों के मुताबिक, वर्ष 1980 से पहले अमिताभ या उनके पूर्वजों के पास गोंड जनजाति से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं मिला.

जांच में सामने आया कि अमिताभ थियोफिलस ने 1 जुलाई 1980 को स्मॉल चिल्ड्रन स्कूल एकेडमी में दाखिला लिया था. स्कूल रिकॉर्ड में उनके धर्म के साथ जाति एसटी गोंड दर्ज थी. लेकिन जांच अधिकारियों के मुताबिक, इस रिकॉर्ड के अलावा वर्ष 1980 से पहले गोंड जनजाति से संबंधित कोई वैध दस्तावेज सामने नहीं आया. जांच के दौरान एसआई अमिताभ से भी उनकी जाति से जुड़े दस्तावेज मांगे गए. अधिकारियों के अनुसार, वह भी इस संबंध में कोई ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके.

फर्जी निकला जाति प्रमाण पत्र

डिप्टी कलेक्टर आरएस मरावी के मुताबिक जांच रिपोर्ट कलेक्टर के माध्यम से गृह विभाग और राज्य उच्च स्तरीय छानबीन समिति के सामने भेजी गई. जांच रिपोर्ट और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर राज्य उच्च स्तरीय छानबीन समिति के आयुक्त तरुण राठी ने अमिताभ प्रताप सिंह उर्फ अमिताभ थियोफिलस का जाति प्रमाण पत्र अमान्य कर दिया. इतना ही नहीं, वर्ष 2024 में गोरखपुर अनुविभागीय क्षेत्र से जारी किया गया उनका एक अन्य जाति प्रमाण पत्र भी निरस्त कर दिया गया है.

28 साल बाद सामने आया सच

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर जाति प्रमाण पत्र फर्जी था, तो इसी दस्तावेज के आधार पर करीब 28 साल तक पुलिस विभाग में नौकरी कैसे चलती रही और व्यक्ति सब इंस्पेक्टर के पद तक कैसे पहुंच गया? जांच में प्रमाण पत्र अमान्य होने के बाद इस पूरे मामले में नौकरी, नियुक्ति और आगे की विभागीय कार्रवाई को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं. फिलहाल जांच रिपोर्ट के बाद मामला बेहद गंभीर हो गया है. एक फर्जी जाति प्रमाण पत्र ने 28 साल पुरानी सरकारी नौकरी पर ही सवालिया निशान लगा दिया है.

शिव चौबे

शिव चौबे

शिव चौबे को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में एक दशक का अनुभव है. शिव ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से संस्कृत विषय में शिक्षा प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने पत्रकारिता की पढ़ाई की. उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत दैनिक अखबार से की. इसके बाद वर्ष 2019 में वे ETV भारत से बतौर संवाददाता जुड़े, जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट और शिक्षा से जुड़ी उनकी कई महत्वपूर्ण रिपोर्टों ने राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा बटोरी. वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने जान जोखिम में डालकर जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की और व्यवस्थाओं की कमियों को उजागर किया. उनकी रिपोर्ट्स के बाद जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़े. वर्ष 2021 में शिव चौबे ने TV9 भारतवर्ष में जिला रिपोर्टर के रूप में नई भूमिका की शुरुआत की. इसके बाद वर्ष 2023 में वे PTI (Press Trust of India) से जुड़े. यहां उन्होंने कई महत्वपूर्ण खोजी रिपोर्टें कीं, जिनमें सिवनी जिले का चर्चित सर्पदंश घोटाला, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय से जुड़ा गोबर घोटाला तथा स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कई घोटाले शामिल है. इसके अलावा उन्होंने CAA के दौरान लगे कर्फ्यू, बरगी क्रूज हादसे और अन्य महत्वपूर्ण घटनाओं की जमीनी रिपोर्टिंग कर अपनी अलग पहचान बनाई. निष्पक्ष, जनसरोकारों से जुड़ी और खोजी पत्रकारिता के लिए शिव चौबे को विशेष रूप से जाना जाता है.

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