MP के 45 साल पुराने 'डकैती अधिनियम' को चुनौती: डकैत नहीं फिर भी हो रहीं FIR, हाईकोर्ट ने गृह सचिव, डीजीपी और 6 जिलों के SP से मांगा जवाब - Gwalior News

Published on 8 सित॰ 2026

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर डिवीजन बेंच ने 'मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981' की संवैधानिकता को लेकर राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

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पूर्व नेता प्रतिपक्ष व पूर्व गृहमंत्री डॉ. गोविंद सिंह की जनहित याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इसके बाद कोर्ट ने गृह विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और अंचल के ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, भिंड, मुरैना और श्योपुर के पुलिस अधीक्षकों (SP) को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

सभी को चार सप्ताह में अपना जवाब देना है। उसके बाद अगली सुनवाई होगी। याचिका में इस कठोर कानून को असंवैधानिक (अल्ट्रा वायर्स) घोषित कर निरस्त करने की मांग की गई है।

ग्वालियर हाईकोर्ट खंडपीठ।

ग्वालियर हाईकोर्ट खंडपीठ।

कोई गिरोह सक्रिय नहीं, फिर भी 6 साल में 1000 FIR हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता पूर्व गृहमंत्री गोविंद सिंह के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव शर्मा ने दलील दी कि जब राज्य सरकार और गृह विभाग खुद विधानसभा के पटल पर स्वीकार कर चुके हैं कि प्रदेश में कोई भी 'सूचीबद्ध डकैत गिरोह' सक्रिय नहीं है, तब इस 45 साल पुराने कानून को लागू रखना पूरी तरह अप्रासंगिक है।

  • फर्जी मुकदमों का आरोप: वर्ष 2020 से अब तक ग्वालियर-चंबल अंचल के 6 जिलों शिवपुरी, दतिया, ग्वालियर, भिंड, मुरैना व श्योपुर में इस कानून के तहत 1,000 से अधिक एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं।
  • मामूली रंजिश में धारा 11/13 डकैती अधिनियम: आरोप लगाया गया है कि पुलिस आपसी रंजिश, जमीन-जायदाद के छोटे-मोटे विवाद या मामूली मारपीट की घटनाओं में भी इस दस्यु अधिनियम की धारा 11 और 13 जोड़कर निर्दोष ग्रामीणों, किसानों और युवाओं को फंसा रही है।
  • अग्रिम जमानत पर रोक: याचिका में इस अधिनियम की सबसे कठोर व्यवस्था धारा 5(1) को चुनौती दी गई है, जिसके तहत आरोपी को अग्रिम जमानत मिलने पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है।
  • बिना जांच सीधे जेल: पुलिसिया मनमर्जी से दस्यु धाराएं जुड़ते ही आरोपी को बिना किसी निष्पक्ष प्रारंभिक जांच के सीधे जेल जाना पड़ता है।
  • मौलिक अधिकारों का हनन: अधिवक्ता ने तर्क दिया कि यह व्यवस्था संविधान के अनुच्छेद-14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद-21 (जीवन व व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन करती है।

6 जिलों के एसपी और गृह विभाग को नोटिस जारी हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गृह विभाग के आला अफसरों सहित अंचल के प्रमुख जिलों के पुलिस कप्तानों को नोटिस जारी कर इस अधिनियम के इस्तेमाल और औचित्य पर विस्तृत जवाब मांगा है।

अधिनियम को निरस्त करने की गुहार लगाई याचिकाकर्ता का पक्ष ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता के वकील राजीव शर्मा ने बताया कि जब प्रदेश में डकैत गिरोह ही खत्म हो चुके हैं, तब इस काले कानून के जरिए निर्दोषों को जेल भेजना और उनकी अग्रिम जमानत रोकना मौलिक अधिकारों का हनन है। अदालत से इस अधिनियम को निरस्त करने की गुहार लगाई गई है।