CM मोहन यादव ने जन्माष्टमी पर पात्र बंदियों की सजा में एक महीने की छूट का ऐलान किया। महिला बंदियों के लिए Open Jail और भोपाल जेल में Mental Health Centre भी बनेगा।
भोपाल। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जन्माष्टमी के मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल केंद्रीय जेल के बंदियों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पात्र बंदियों को उनकी पात्रता के अनुसार सजा में एक महीने की छूट दी जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश में खुली जेलों की संख्या बढ़ाने और महिला बंदियों के लिए भी खुली जेल की व्यवस्था करने की दिशा में जरूरी प्रावधान किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को केंद्रीय जेल भोपाल में आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव में बंदियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जेल व्यवस्था का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि बंदियों में सुधार और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना भी होना चाहिए।
MP Jail News: बंदियों की सजा में एक महीने की छूट
जन्माष्टमी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बंदियों के लिए सजा में छूट की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पात्रतानुसार बंदियों की सजा में एक माह की कमी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जेलों में बंदियों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जेलों में व्यवस्था को लगातार बेहतर बनाया जा रहा है, ताकि बंदियों को जरूरी सुविधाओं के साथ सुधार और पुनर्वास का अवसर भी मिल सके। इस दौरान जेल विभाग में विभिन्न पदों पर हुई पदोन्नतियों और नए पदों के निर्माण की जानकारी भी दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि नए पदों और पदोन्नतियों से जेल विभाग का कामकाज और सुचारू होगा।
Women Prisoners: महिला बंदियों के लिए भी खुलेगी Open Jail
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महिला बंदियों के लिए भी खुली जेल की व्यवस्था करने का बड़ा फैसला बताया। उन्होंने कहा कि फिलहाल पुरुष बंदियों के लिए खुली जेल का प्रावधान है, लेकिन अब भविष्य की जरूरतों को देखते हुए महिला बंदियों के लिए भी Open Jail विकसित करने की दिशा में काम किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में खुली जेलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। महिला बंदियों के लिए खुली जेल की व्यवस्था जल्द से जल्द शुरू करने के लिए आवश्यक प्रावधान किए जाएंगे। खुली जेल की अवधारणा में पात्र बंदियों को अपेक्षाकृत बेहतर और नियंत्रित वातावरण में रहने तथा जिम्मेदारियों के साथ समाज के करीब आने का अवसर मिलता है। सरकार अब इस व्यवस्था का दायरा बढ़ाने पर जोर दे रही है।
Bhopal Central Jail: जल्द शुरू होगा Mental Health Centre
भोपाल केंद्रीय जेल में बंदियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य केंद्र भी जल्द शुरू किया जाएगा। जेल महानिदेशक वरुण कपूर ने कार्यक्रम में बताया कि इसके लिए तैयारियां की जा रही हैं। जेल में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधा की जरूरत इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि लंबे समय तक जेल में रहने वाले बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है। नया केंद्र बंदियों को इस क्षेत्र में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में कदम होगा। मुख्यमंत्री ने भी जेल व्यवस्था में सुधार के साथ बंदियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत बताई।
MP Jail Reform: नए बैरक, नए कानून और बेहतर सुविधाओं पर जोर
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जेल विभाग की ओर से बंदियों के लिए किए जा रहे विभिन्न प्रबंधों की जानकारी भी दी। इनमें प्रदेश की जेलों में नए बैरकों का निर्माण, आवश्यक सुविधाओं का विस्तार और नए जेल कानून को लागू करना शामिल है। इसके अलावा बंदियों को अलग-अलग शिल्प और हुनर का प्रशिक्षण देने पर भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बंदियों को ऐसी व्यावहारिक क्षमता देना है, जिसका इस्तेमाल वे जेल से बाहर निकलने के बाद रोजगार या स्वरोजगार के लिए कर सकें। बंदियों को आयुष्मान कार्ड उपलब्ध कराने और जेलों में ध्यान एवं योग जैसी गतिविधियां संचालित करने की व्यवस्था भी की गई है।
Jail Department Promotions: कर्मचारियों की पदोन्नति से मजबूत होगी व्यवस्था
मुख्यमंत्री ने जेल विभाग में विभिन्न पदों पर की गई पदोन्नतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नए पदों के निर्माण और कर्मचारियों की पदोन्नति से जेल विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और रोजमर्रा के कामकाज को बेहतर तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी। सरकार की ओर से जेल स्टाफ के लिए नए आवास यानी स्टाफ क्वार्टर्स का निर्माण भी कराया जा रहा है। इससे जेल कर्मचारियों की सुविधाओं में सुधार की उम्मीद है।
Prisoners Skill Training: बंदियों को हुनर और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की पहल
जेल विभाग की गतिविधियों में बंदियों को रचनात्मक और उपयोगी कार्यों से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। जेल महानिदेशक वरुण कपूर ने बताया कि प्रदेश की जेलों में योग, पार्थिव शिवलिंग निर्माण और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के जरिए कई उपलब्धियां हासिल की गई हैं।
सरकार का जोर इस बात पर है कि बंदी जेल की अवधि के दौरान केवल समय न बिताएं, बल्कि उन्हें सीखने, अपनी क्षमता विकसित करने और सकारात्मक गतिविधियों से जुड़ने का मौका मिले। शिल्प प्रशिक्षण भी इसी प्रयास का हिस्सा है। इससे बंदियों को भविष्य में अपने पैरों पर खड़े होने में मदद मिलने की उम्मीद है।
Janmashtami in Bhopal Jail: बंदियों ने कृष्ण लीला पर पेश की नाटिका
केंद्रीय जेल भोपाल में आयोजित जन्माष्टमी महोत्सव में बंदियों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर आधारित लघु नाटिका भी प्रस्तुत की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तुति की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने गौमाताओं को गुड़-रोटी खिलाई और भगवान श्रीकृष्ण का रूप धारण किए बच्चों से स्नेहपूर्वक मुलाकात की।
इस मौके पर जेल महानिदेशक वरुण कपूर ने जेल विभाग की विभिन्न गतिविधियों और बंदियों के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों की जानकारी दी। कार्यक्रम में खेल एवं युवक कल्याण तथा सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और जेल विभाग के प्रमुख सचिव मुकेश चंद्र गुप्ता भी मौजूद रहे।
MP Jail Officers: छह अधिकारियों-कर्मचारियों को मिला सम्मान
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जेल विभाग के छह अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके साहसिक कार्यों के लिए पुरस्कार और सम्मान प्रदान किया। मुख्यमंत्री ने जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को महत्वपूर्ण बताते हुए उनके काम की सराहना की। जेल व्यवस्था को सुचारू रखने में कर्मचारियों की भूमिका अहम होती है, खासकर तब जब सुधारात्मक गतिविधियों के साथ सुरक्षा और प्रशासन की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर रहती है।
Jail Reform in Madhya Pradesh: सजा के साथ सुधार पर भी फोकस
जन्माष्टमी के मौके पर की गई घोषणाओं से मध्य प्रदेश की जेल व्यवस्था में सुधार और पुनर्वास पर सरकार के जोर का संकेत मिलता है। एक तरफ पात्र बंदियों को सजा में एक महीने की छूट देने की घोषणा की गई है, तो दूसरी तरफ महिला बंदियों के लिए खुली जेल, मानसिक स्वास्थ्य केंद्र, कौशल प्रशिक्षण, योग और ध्यान जैसी सुविधाओं को बढ़ाने की बात कही गई है।
नए बैरकों, जेल स्टाफ के लिए आवास और नए जेल कानून के क्रियान्वयन जैसे कदम भी इसी व्यापक व्यवस्था का हिस्सा हैं। सरकार का फोकस जेलों में सुरक्षा के साथ-साथ बंदियों के स्वास्थ्य, कौशल और मानसिक स्थिति पर भी रखने की कोशिश है। भोपाल केंद्रीय जेल में जन्माष्टमी का यह कार्यक्रम इसी सोच के साथ आयोजित किया गया, जिसमें धार्मिक आयोजन के साथ जेल सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसलों और योजनाओं की जानकारी सामने आई।