शिक्षा अधिकारी के फर्जी दस्तखत कर 119 करोड़ का अवैध भुगतान करा डाला. पिछले 21 वर्षों से बिहार में एनडीए की सरकार रही है.
![]()
New Update
/newsnation/media/media_library/vi/9DsW9qhsRF0/hqdefault-292728.jpg)
शिक्षा अधिकारी के फर्जी दस्तखत कर 119 करोड़ का अवैध भुगतान करा डाला. पिछले 21 वर्षों से बिहार में एनडीए की सरकार रही है.
बिहार और भ्रष्टाचार का चोली दामन का साथ रहा है. शासन किसी का भी रहा हो लेकिन बिहार की जनता हमेशा छली गई है. कभी जानवरों का चारा खाया गया तो कभी नौकरी देने के नाम पर अपनी जेबें भरी गई. लेकिन बिहार में भ्रष्टाचार की चाशनी इस कदर गाढ़ी हो चुकी है कि जो कोई भी इसमें आता है वह बाहर नहीं निकल पाता. ताजा मामला मुजफ्फरपुर का है. जहां सरकारी विद्यालयों के डेस्क, बेंच, मरम्मत और निर्माण साथ ही रंग रोगन और दूसरे कामों को लेकर के 119 करोड़ का घोटाला सामने आया है. जाहिर है बात निकलेगी तो फिर दूर तक जाएगी. पेश है यह खास रिपोर्ट.
बिहार में पिछले 21 साल से ज्यादा समय तक एनडीए का शासन रहा है. तमाम घोटालों के पर्दाफाश के बाद जब एनडीए की सरकार आई तो लगा कि अब यहां सुशासन होगा लेकिन बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभान अल्लाह. यह सरकार तो और भी करतबी निकली.
ताजा मामला मुजफ्फरपुर के सरकारी विद्यालयों में हुई भारी धांधली का है.
119 करोड़ का अवैध भुगतान करा डाला
यहां जिला शिक्षा अधिकारी के फर्जी दस्तखत कर भाई लोगों ने 119 करोड़ का अवैध भुगतान करा डाला. पिछले 21 वर्षों से बिहार में एनडीए की सरकार रही है. पहले नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और अब भाजपा कोटे के सम्राट चौधरी बिहार के मुख्यमंत्री हैं. लेकिन बिहार की सुशासन की सरकार पर अब सवाल उठने लगे हैं. मामला मुजफ्फरपुर का है और मुजफ्फरपुर में शिक्षा विभाग में 119 करोड़ के अह ₹119 करोड़ के पैसे के बंदरबाट का मामला सामने आया है. बिहार विधान परिषद में बंसीधर बृजवासी ने मामला उठाया कि ₹119 करोड़ का हिसाब सरकार आखिर कब देगी?
बिना जमीन के चार दीवारी बनवा दी गई
धांधलेबाजों ने शिक्षा के मंदिर को भी नहीं बख्शा. मुजफ्फरपुर के स्कूलों में डेस्क और बेंच की खरीद के नाम पर अनियमितता हुई. कहीं हवा में सबमर्सिबल पंप लगवाया गया तो कहीं बिना जमीन के चार दीवारी बनवा दी गई. कहीं कागजों पर फर्जी रंग रोगन ही करा दिया गया. लेकिन इन स्कूलों की जमीनी हकीकत क्या है? आप भी देख लीजिए. कमी तो यहां पे बहुत है बट जो व्यवस्था है इसी में हम लोग को तो पढ़ाना है. अब बच्चे आ रहे हैं तो उन लोग को नहीं पढ़ाएंगे तो कैसे होगा? इस चीज को तो देखना होगा ना सरकार को कि इतना कम व्यवस्था में बच्चे यहां पर कैसे पढ़ेंगे?
सुविधा के नाम पर लुटेरे लूटते रहे
तबेले जैसे स्कूल में बच्चे पढ़ते रहे और स्कूल में सुविधा के नाम पर लुटेरे लूटते रहे. जमीन पर एक भी हैंडपंप नहीं और कागजों पर तीन-तीन हैंडपंप लगा दिए गए. अब मामला विधान परिषद में उठा तो विपक्ष कह रहा है कि इस लूट में मंत्री तक शामिल हैं. ऐसे लोगों को बीच चौराहे पर फांसी दे दी जानी चाहिए.
700 फाइलें संदिग्ध पाई गई
बिहार के तमाम जिलों में भ्रष्टाचार की गंगोत्री बह रही है. इनके शासनकाल में यानी भाजपा जदयू के शासनकाल में मुजफ्फरपुर में दो डीओ का अगर कार्यकाल को मिला दीजिएगा तो सैकड़ों करोड़ रुपया लूट लिए गए. वो लूट का पैसा सरकार तक गई. मंत्री तक खाया लोग मजाल किसी डीओ का है क्या कि के खा जाए पचा जाए. इन सबों को बीच चौराहे पे जांच कर करके बीच चौराहे पे इन लोग को फांसी पर चढ़ा. देना सूली पर चढ़ा देना चाहिए. जिला शिक्षा पदाधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर और बिना उनकी जानकारी के लगभग 119 करोड़ के अवैध भुगतान का मामला बिहार विधान परिषद में उठाया गया और पता चला कि सरकारी स्कूलों के निर्माण और मरम्मत कार्यों से जुड़ी एक दो नहीं बल्कि करीब 700 फाइलें संदिग्ध पाई गई. यानी दाल में काला नहीं है बल्कि दाल ही काली है. विपक्ष कह रहा है कि जिला पदाधिकारी करोड़ों रुपए अकेले नहीं खा सकते. अधिकारी से लेकर मंत्री तक सभी भ्रष्टाचार की चाशनी में डूबे हैं.
ये भी पढ़ें: माफी मांगें राहुल गांधी, आपने देश में भ्रम फैलाया: संबित पात्रा