सनातन धर्म में नाग पंचमी एक प्रमुख पर्व है। जिसमें नाग देवताओं की पूजा की जाती है। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। भारतीय परंपरा में नागों को केवल सर्प नहीं, बल्कि दैवीय शक्ति, प्रकृति के संतुलन और भूमिगत ऊर्जा के प्रतीक के रूप में माना गया है। आध्यात्मिक दृष्टि से नाग पंचमी का पर्व केवल जीव-पूजा नहीं, बल्कि चेतना के विस्तार, कुंडलिनी शक्ति के जागरण और प्रकृति के साथ एकाकार होने का प्रतीक है।

Nag Panchami 2026 : सनातन धर्म में नाग पंचमी एक प्रमुख पर्व है। जिसमें नाग देवताओं की पूजा की जाती है। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। भारतीय परंपरा में नागों को केवल सर्प नहीं, बल्कि दैवीय शक्ति, प्रकृति के संतुलन और भूमिगत ऊर्जा के प्रतीक के रूप में माना गया है। आध्यात्मिक दृष्टि से नाग पंचमी का पर्व केवल जीव-पूजा नहीं, बल्कि चेतना के विस्तार, कुंडलिनी शक्ति के जागरण और प्रकृति के साथ एकाकार होने का प्रतीक है। भारतीय कृषि संस्कृति में नागों को भूमि और पर्यावरण का रक्षक माना गया है।
पढ़ें :- 13 अगस्त का राशिफल : मिथुन, सिंह और तुला, वृश्चिक और कुंभ राशि के जातक को भाग्य दिलाएगा अप्रत्याशित लाभ, पढ़ें अपना राशिफलवर्ष 2026 में नाग पंचमी का पवित्र पर्व17 अगस्त 2026 (सोमवार) को मनाया जाएगा। सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि 16 अगस्त को दोपहर 4:51 बजे शुरू होगी और 17 अगस्त को शाम 5:00 बजे समाप्त होगी, जिसके अनुसार उदयातिथि 17 अगस्त मान्य है।
1. भगवान शिव और नागों का संबंध
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव के गले में विराजमान नागराज वासुकि शिव शक्ति और निर्भयता के प्रतीक हैं। समुद्र मंथन के समय भी वासुकि नाग ने देवताओं और असुरों के लिए मंथन की रस्सी का कार्य किया था। इसलिए नागों को शिव भक्ति से विशेष रूप से जोड़ा जाता है।
2. भगवान कृष्ण और कालिया नाग की कथा
भागवत पुराण में वर्णित है कि वृंदावन में यमुना नदी में कालिया नाग का विष फैल गया था। भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग का दमन कर यमुना को विषमुक्त किया। इस कथा को धर्म की अधर्म पर विजय और प्रकृति संरक्षण का प्रतीक माना जाता है।
3. नाग देवताओं की पूजा
हिंदू ग्रंथों में अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म आदि प्रमुख नागों का वर्णन मिलता है। नाग पंचमी पर इन नाग देवताओं की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि और रक्षा की कामना की जाती है।
4. महाभारत से संबंध
महाभारत में नागवंश का विशेष उल्लेख मिलता है। राजा जनमेजय ने अपने पिता परीक्षित की मृत्यु का बदला लेने के लिए सर्प यज्ञ किया था, जिसे आस्तिक ऋषि ने रोक दिया। यह कथा क्षमा, संतुलन और सह-अस्तित्व का संदेश देती है।
5. कृषि और प्रकृति से जुड़ा महत्व
नाग पंचमी के अवसर पर किसान नागों के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं, क्योंकि सर्प खेतों में हानिकारक जीवों को नियंत्रित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं।
पूजा का आध्यात्मिक संदेश
नाग पंचमी केवल सर्प पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति, जीव-जंतुओं और समस्त सृष्टि के प्रति सम्मान का संदेश देता है। यह पर्व मनुष्य को अहंकार त्यागकर प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने की प्रेरणा देता है।
मंत्र (पूजन में प्रचलित):
“अनन्तं वासुकिं शेषं पद्मनाभं च कम्बलम्।
शंखपालं धृतराष्ट्रं तक्षकं कालियं तथा॥”
नाग पंचमी का संदेश है — सृष्टि के प्रत्येक जीव में ईश्वर का अंश देखकर उसका सम्मान करना।
नाग देवता की पूजा मनुष्य को प्रकृति की हर योनि के प्रति भय त्यागकर सम्मान और प्रेम का पाठ पढ़ाती है।
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