NCP के बाद अब इस विपक्षी पार्टी के भी बदले सुर, परिसीमन बिल के समर्थन में कही ये बात

Published on 18 जुल॰ 2026

DMK के एक सीनियर नेता ने कहा, सरकार को हर राज्य का पक्का हिस्सा बताना चाहिए. इससे दक्षिणी राज्यों को नुकसान होने की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी.

DMK के एक सीनियर नेता ने कहा, सरकार को हर राज्य का पक्का हिस्सा बताना चाहिए. इससे दक्षिणी राज्यों को नुकसान होने की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी.

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Tamil Nadu CM MK Stalin demands Delimitation based on 1971 Population

DMK Head MK Stalin

ससंद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू हो जाएगा. इस सत्र में सरकार लोकसभा की सीटें बढ़ाने और महिला आरक्षण कानून लागू करने के लिए संविधान संशोधन बिल पेश कर सकती है. इसके लिए सरकार संसद में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की पूरी कोशिश कर सकती है. इस बीच, विपक्षी दल और इंड़ी एलयांस की पूर्व सहयोगी डीएमके से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. सूत्रों के अनुसार, डीएमके इस बिल पर संसद में सरकार के पक्ष में वोट दे सकती है. 

संसद में डीएमके के 22 सदस्य है. बिल पर सरकार का समर्थन करने के लिए डीएमके ने एक शर्त लगाई है. डीएमके का कहना है कि अगर सरकार गारंटी दे कि परिसीमन से तमिलनाडु और दूसरे दक्षिणी राज्यों के हितों को नुकसान नहीं होगा और राज्यों को मिलने वाले हिस्से के बारे में पहले ही बता दिया जए तो वे बातचीत के लिए राजी हैं. 

डीएमके के इस रुख से एनडीए को राहत

डीएमके के सीनियर नेता ने बताया कि सरकार को हर राज्य का पक्का हिस्सा बताना चाहिए. दक्षिणी राज्यों को नुकसान होने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए. उन्होंने साफ कहा कि सरकार से अब तक इस बारे में कोई भी औपचारिक बातचीत नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि हम पहले भी साफ कर चुके हैं कि अगर भेदभाव न होने की पक्की गारंटी मिलती है तो हमारा रुख बदल सकता है. खास बात है कि डीएमके के इस नरम रुख ने एनडीए को राहत दी है. 

एनसीपी भी कर सकती है बिल का समर्थन

शरद पवार की NCP ने भी हाल में बिल के समर्थन की बात की थी. पार्टी की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले ने हाल में कहा था कि अगर हर राज्य की लोकसभा सीटों में 50 प्रतिशत की एक समान बढ़ोतरी होती है तो उनकी पार्टी बिल का विरोध नहीं करेगी. अप्रैल में इस बिल को लोकसभा में पेश किया गया था, जिसे महज 298 सासंदों का ही समर्थन मिल पाया था. 

#WATCH | Mumbai: NCP-SCP MP Supriya Sule says, "... We have neither held discussions with anyone regarding delimitation, nor has anyone approached us about it. We will formulate our stance once the bill is introduced. However, we will discuss any upcoming bill in detail within… pic.twitter.com/2fsSNfFKPX

— ANI (@ANI) July 15, 2026

सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया था कि वह संसद के मॉनसून सत्र में पेश होने वाले 131वें संविधान संशोधन विधेयक का समर्थन करेंगी. हालांकि, उन्होंने शर्त लगाते हुए था कि विधेयक के तहत होने वाले लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) में किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए. वहीं, पार्टी प्रमुख शरद पवार ने भी मामले में राज्यों के साथ समान व्यवहार की मांग की है.

Mumbai, Maharashtra: NCP (SP) MP Supriya Sule says, "... Let me reassure you that all eight MPs of NCP (SP) and all our MLAs will stick together. Whatever decision will be taken, please understand, NCP is a party where Sharad Pawar not only leads it, he invests in everybody, and… pic.twitter.com/tWJRmVMNQ5

— IANS (@ians_india) July 15, 2026

शरद पवार ने की थी ये मांग

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने केंद्र सरकार से मांग की थी कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है. खासतौर पर दक्षिण भारत के राज्यों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए. उनका कहना है कि परिवार नियोजन को प्रभावी ढंग से लागू करने वाले राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व कम करना सही नहीं होगा. पवार ने कहा था कि अगर अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अतिरिक्त सीटें दी जाती है तो जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के हितों की भी पूरी रक्षा होनी चाहिए. केंद्र सरकार को स्पष्ट नीति सामने लानी चाहिए.  

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