
NDA के SSB इंटरव्यू को क्यों माना जाता है कठिन? Image Credit source: indian army instagram
सेना में अधिकारी बनने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए केवल लिखित परीक्षा पास करना ही काफी नहीं है. NDA, CDS जैसी परीक्षाओं के बाद उम्मीदवारों को SSB यानी सर्विस सिलेक्शन बोर्ड की कठिन चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. यह करीब पांच दिनों तक चलती है, जिसमें उम्मीदवार की इंटेलिजेंस, व्यक्तित्व, लीडरशिप एबिलिटी, टीमवर्क, निर्णय लेने की क्षमता और दबाव में काम करने के तरीके को परखा जाता है. SSB में केवल किताबी ज्ञान या रटे हुए जवाब काम नहीं आते. यहां उम्मीदवार की वास्तविक सोच और व्यवहार को अलग-अलग टेस्टिंग के जरिए समझने की कोशिश की जाती है.
SSB में सिर्फ किताबी ज्ञान क्यों नहीं है काफी?
SSB को सामान्य नौकरी के इंटरव्यू की तरह नहीं समझना चाहिए. इसका मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि उम्मीदवार में अधिकारी बनने के लिए जरूरी Officer Like Qualities कितनी हैं. इसके लिए मुख्य रूप से Interviewing Officer (IO), Group Testing Officer (GTO) और Psychologist कैंडिडेट का अलग-अलग तरीके से मूल्यांकन करते हैं. इसलिए केवल सही जवाब देना पर्याप्त नहीं होता बल्कि यह भी देखा जाता है कि कैंडिडेट किसी स्थिति में कैसे सोचता और निर्णय लेता है.
पहले दिन होती है सबसे बड़ी स्क्रीनिंग
SSB के पहले दिन स्क्रिन टेस्ट होता है. इसमें मुख्य रूप से Officer Intelligence Rating (OIR) और Picture Perception and Description Test (PP&DT) शामिल होते हैं. OIR में तर्क और इंटेलिजेंस से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं. वहीं PP&DT में एक तस्वीर देखकर कहानी तैयार करनी होती है और फिर ग्रुप में उस पर चर्चा करनी होती है. यहां बोलने के साथ दूसरों की बात सुनने और अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने की क्षमता भी देखी जाती है.
दूसरे दिन परखी जाती है सोच और मानसिक क्षमता
स्क्रीनिंग में सफल उम्मीदवार Stage-II में पहुंचते हैं. दूसरे दिन होने वाले Psychological Tests में यह समझने की कोशिश की जाती है कि कैंडिडेट अलग-अलग परिस्थितियों में किस तरह प्रतिक्रिया देता है. उसकी सोच, समस्या को समझने का तरीका और निर्णय लेने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है. इसलिए रटे हुए जवाब देने के बजाय स्वाभाविक और ईमानदार प्रतिक्रिया देना जरूरी माना जाता है.
GTO टेस्ट में टीमवर्क और नेतृत्व की परीक्षा
तीसरे दिन GTO के तहत ग्रुप गतिविधियां शुरू होती हैं. उम्मीदवारों को टीम में मिलकर अलग-अलग कार्य और समस्याएं हल करनी होती हैं. इस दौरान नेतृत्व क्षमता, सहयोग, दूसरों के विचारों का सम्मान और कठिन परिस्थिति में शांत रहने जैसे गुण देखे जाते हैं. यह केवल शारीरिक क्षमता की परीक्षा नहीं होती.
इंटरव्यू में पूछे जाते हैं व्यक्तिगत सवाल
चौथे दिन पर्सनल इंटरव्यू भी जरूरी चरण होता है. इसमें पढ़ाई, परिवार, दोस्तों, रुचियों, उपलब्धियों, कमजोरियों, सामान्य जानकारी और भविष्य की योजनाओं से जुड़े सवाल पूछे जा सकते हैं. सेना में शामिल होने की वजह और जीवन की चुनौतियों पर भी सवाल हो सकते हैं. आवेदन में दी गई जानकारी के बारे में कैंडिडेट को स्पष्ट और ईमानदार रहना चाहिए.
पांचवें दिन कॉन्फ्रेंस में होता है फैसला
अंतिम दिन कॉन्फ्रेंस में IO, GTO और Psychologist सहित सभी अधिकारी उम्मीदवार के पांच दिनों के प्रदर्शन पर चर्चा करते हैं. इसके बाद उम्मीदवार को रिकमेंडेड करने या नहीं करने का निर्णय लिया जाता है. हालांकि SSB रिकमेंडेशन अंतिम नियुक्ति की गारंटी नहीं होती.
रिकमेंडेशन के बाद मेडिकल और मेरिट
SSB में रिकमेंडेड होने के बाद उम्मीदवार की मेडिकल एग्जामिनेशन होती है. मेडिकल में फिट पाए जाने के बाद उपलब्ध सीटों और उम्मीदवार के अंकों के आधार पर ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट तैयार की जाती है. मेरिट में स्थान मिलने के बाद ही कैंडिडेट को संबंधित सैन्य अकादमी में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है.
SSB को कठिन चयन प्रक्रिया इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें लगातार कई दिनों तक उम्मीदवार के व्यक्तित्व के अलग-अलग पहलुओं की जांच होती है. यहां किसी एक टेस्ट में अच्छा प्रदर्शन पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में संतुलित प्रदर्शन जरूरी होता है.

सपना यादव
दिल्ली में जन्मीं सपना यादव TV9 भारतवर्ष डिजिटल में बतौर असिस्टेंट प्रड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता जगत में 4 वर्षों से ज्यादा के अनुभव के साथ काम जारी है. ह्यूमन इंटरेस्ट, राजनीति, वर्ल्ड, एजुकेशन, नॉलेज, करंट अफेयर्स से जुड़ी खबरों में खास दिलचस्पी रखती हैं. दिल्ली यूनिवर्सिटी से BA Hons. हिस्ट्री की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता को लक्ष्य बनाया, फिर जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से पीजी डिप्लोमा इन टीवी जर्नलिज्म किया, जामिया से ही हिस्ट्री में मास्टर्स भी किया और फिर इसके बाद गुरु जम्बेश्वर साइंस एंड टेक्नोलॉजी यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. मास कम्यूनिकेशन में पत्रकारिता की डिग्री लेने के बाद जमीनी स्तर पर खबरों के महत्व को समझा. इसके बाद उन्होंने बतौर ट्रेनी TV9 भारतवर्ष डिजिटल में एक साल तक काम किया. ट्रेनी के दौरान अलग-अलग तरह की खबरों का अनुभव लेने के बाद TV9 भारतवर्ष डिजिटल में असिस्टेंट प्रड्यूसर के पद पर काम शुरू किया. यहां पर एंकरिंग, वॉइस ओवर, वीडियो प्रोडक्शन, न्यूज राइटिंग जैसे काम किए. इस समय वह एजुकेशन डेस्क पर कार्यरत हैं और स्टूडेंट्स के लिए करियर से जुड़े विकल्पों, बोर्ड परीक्षाओं, नौकरियों और प्रतियोगी परीक्षाओं और यूनिवर्सिटीज की महत्वपूर्ण जानकारियों को कवर कर रही हैं. सपना यादव को ट्रेवल करना, लिखना- पढ़ना पसंद है और वो प्रकृति को करीब से महसूस करना ज्यादा पसंद करती हैं. पत्रकारिता में सफर अभी जारी है.
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