बैन नहीं चलेगा... कनाडा में मोहन भागवत के समर्थन में यह समुदाय, NDP को खूब सुनाया

Published on 9 अग॰ 2026

Aug 09, 2026 08:26 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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कनाडा में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के दौरे को लेकर विवाद तेज हो गया है। एनडीपी के दो सांसदों ने उन्हें देश में आने से रोकने और संगठन पर बैन लगाने की मांग की है, तो इंडो-कैनेडियन समुदाय ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह मांग विभाजन फैलाती है और लाखों हिंदू कनाडाई नागरिकों पर शक पैदा करती है।

Mohan Bhagwat

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत

कनाडा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत के प्रस्तावित दौरे को लेकर विवाद गहरा गया है। न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) के दो सांसदों ने उन्हें देश में प्रवेश देने से रोकने और आरएसएस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की है, जबकि इंडो-कैनेडियन समुदाय ने इस मांग का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि यह भाषा विभाजन फैलाती है और लगभग 8.28 लाख हिंदू कनाडाई नागरिकों पर शक का खतरा पैदा करती है।

दरअसल, शुक्रवार को एनडीपी सांसद हीथर मैकफर्सन और जेनी क्वान ने प्रधानमंत्री मार्क कार्नी तथा सार्वजनिक सुरक्षा, विदेश मामले और आप्रवासन मंत्रियों को पत्र लिखकर मांग की कि 'फासीवादी अर्धसैनिक संगठन के प्रमुख' को कनाडा में प्रवेश न दिया जाए। उन्होंने आरएसएस को 'उग्रवादी संगठन' बताते हुए इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात दोहराई, जो पहले जगमीत सिंह के नेतृत्व काल में भी उठाई गई थी। मैकफर्सन ने कहा कि कई अल्पसंख्यक समुदायों को डर है कि उनकी उपस्थिति से नफरत और हिंसा बढ़ सकती है। क्वान ने कहा कि कनाडा के आप्रवासन और शरणार्थी संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरएसएस और उसके सदस्यों को अवांछित घोषित किया जाना चाहिए।

इसके जवाब में शुरू हुए काउंटर-लेटर अभियान में इंडो-कैनेडियन समुदाय ने कहा कि पूरे समुदाय के प्रमुख सांस्कृतिक आंदोलन को 'फासीवादी' कहना वास्तव में भेदभाव है। याचिका में सांसदों के आरोपों पर सवाल उठाते हुए कनाडाई कानून के अनुसार ठोस और जांचे-परखे सबूतों की मांग की गई है। इसमें कहा गया कि सांसदों के पत्र में दुनिया के सबसे बड़े हिंदू स्वयंसेवी संगठन को 'फासीवादी' करार दिया गया है और इसके सदस्यों को पूरी तरह बाहर रखने की मांग की गई है। इससे सांख्यिकी कनाडा की 2021 की जनगणना में हिंदू के रूप में पहचाने गए लगभग 8.28 लाख कनाडाई नागरिकों पर शक का खतरा पैदा होता है।

भागवत का यह कनाडा का पहला दौरा होगा। 2005 में केएस सुदर्शन के दौरे के बाद 20 से अधिक वर्षों में किसी आरएसएस प्रमुख का यह पहला कनाडा दौरा है। दौरे की योजना अंतिम चरण में है और वे केवल टोरंटो जाने वाले हैं। कनाडा के बाद वे अमेरिका का पांच दिवसीय दौरा करेंगे, जो न्यूयॉर्क में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के साथ समाप्त होगा। 31 अगस्त को टोरंटो में प्रवासी समुदाय के साथ सार्वजनिक कार्यक्रम और अगले दिन बैठकें होने की उम्मीद है।