NEET Protest पर योगेंद्र उपाध्याय का हमला, बोले- यह अब छात्रों का नहीं, राष्ट्रविरोधी ताकतों का आंदोलन| Navbharat Live

Published on 25 जुल॰ 2026

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सार

NEET Paper Leak Case:NEET परीक्षा लीक को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन पर उप्र के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि विरोधी छात्रों के आंदोलन का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश कर रहे हैं।

UP Minister Yogendra Upadhyay Alleges ‘Anti-National Elements’ Behind NEET Protest, Targets Rahul Gandhi and Akhilesh Yadav

कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय (सोर्स- सोशल मीडिया)

विस्तार

Student Protest Against NEET Paper Leak Case: NEET परीक्षा लीक को लेकर जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने “नव भारत” से विशेष बातचीत में कई बड़े राजनीतिक बयान दिए हैं। उन्होंने दावा किया कि यह आंदोलन अब छात्रों का नहीं रह गया है, बल्कि “राष्ट्रविरोधी ताकतों के हाथों में चला गया है।”

साथ ही उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि दोनों नेता छात्रों के कंधे पर अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रहे हैं।

प्रदर्शन में राष्ट्रविरोधी और असामाजिक तत्वों की घुसपैठ

योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि आंदोलन की शुरुआत छात्रों की वास्तविक चिंताओं के साथ हुई थी, लेकिन अब इसकी दिशा पूरी तरह बदल चुकी है। उनके अनुसार, जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन में ऐसे लोग सक्रिय हैं जिनका छात्रों के हितों से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन के दौरान लगाए जा रहे कुछ नारे यह साबित करते हैं कि इसमें राष्ट्रविरोधी और असामाजिक तत्वों की घुसपैठ हो चुकी है।

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मंत्री ने कहा कि “अब यह छात्र आंदोलन नहीं रहा। इसे राष्ट्रविरोधी ताकतें संचालित कर रही हैं।” उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने का अधिकार सभी को है, लेकिन संसद और प्रधानमंत्री आवास की ओर कूच कर संवैधानिक संस्थाओं को घेरने की कोशिश स्वीकार्य नहीं हो सकती। उनके अनुसार, यदि कोई कानून-व्यवस्था को चुनौती देगा तो कानून भी अपना काम करेगा।

राहुल और अखिलेश छात्रों के सहारे राजनीति करना चाहते हैं

योगेंद्र उपाध्याय ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव अपनी राजनीतिक जमीन खो चुके हैं और अब छात्रों के आंदोलन के सहारे उसे वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के हित में सोचता है तो उन्हें आंदोलन को भड़काने के बजाय युवाओं को सही दिशा दिखानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास जनता के सामने रखने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वह हर आंदोलन को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहा है। मंत्री के अनुसार, संसद जनता की समस्याओं पर चर्चा का मंच है, लेकिन विपक्ष लगातार व्यवधान पैदा कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहता है।

किसान आंदोलन जैसा होगा NEET आंदोलन का भी अंजाम

योगेंद्र उपाध्याय ने दावा किया कि इस आंदोलन का आगामी विधानसभा चुनावों पर किसी प्रकार का प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले हुए किसान आंदोलन का उदाहरण सबके सामने है। उनके अनुसार, उस आंदोलन को भी राजनीतिक रूप देने की कोशिश हुई, लेकिन चुनाव परिणामों में उसका वैसा असर नहीं दिखा जैसा विपक्ष दावा कर रहा था। उन्होंने कहा कि NEET आंदोलन का भी अंत उसी तरह होगा और जनता ऐसे राजनीतिक प्रयासों को समझती है।

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पेपर लीक पर बोले- गलती हुई तो कार्रवाई भी हुई

NEET पेपर लीक पर मंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, लेकिन वर्तमान सरकार दोषियों को बचाने के बजाय उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करती है। उन्होंने दावा किया कि पहले की सरकारों में पेपर लीक के मामलों में अपराधियों को संरक्षण मिलता था, जबकि भाजपा सरकार जांच कर दोषियों तक पहुंचती है और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करती है।

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का किया बचाव

दिल्ली पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग के सवाल पर योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की। उनके अनुसार, हालात तब बिगड़े जब पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट हुई। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने मजबूरी में कार्रवाई की और यदि कोई व्यवस्था को चुनौती देगा तो कानून अपना दायित्व निभाएगा।

योगेंद्र उपाध्याय के इन बयानों के बाद NEET आंदोलन को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने के आसार हैं। एक ओर विपक्ष छात्रों के समर्थन में सरकार पर निशाना साध रहा है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष आंदोलन में राष्ट्रविरोधी तत्वों की मौजूदगी का आरोप लगाकर इसे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जोड़ रहा है। ऐसे में छात्र आंदोलन अब शिक्षा के मुद्दे से आगे बढ़कर एक बड़े राजनीतिक विमर्श का विषय बनता दिखाई दे रहा है।

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