Nestle इंडिया पर FSSAI का बड़ा शिकंजा, ‘बेबी फूड’ के खराब गुणवत्ता पर 3 केस दर्ज; कंपनी ने दी सफाई

Published on 19 सित॰ 2026

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज): बच्चों के पोषण और बेबी फूड्स को लेकर देश की शीर्ष खाद्य सुरक्षा नियामक संस्था FSSAI ने बहुराष्ट्रीय कंपनी नेस्ले इंडिया (Nestlé India) के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शिशुओं के लिए बनाए जाने वाले न्यूट्रिशन प्रोडक्ट्स पर भ्रामक प्रचार और तय गुणवत्ता मानकों पर खरा न उतरने के आरोप में नेस्ले इंडिया के खिलाफ तीन अलग-अलग न्यायनिर्णयन (Adjudication) मामले दर्ज किए हैं। इस कार्रवाई के बाद न केवल ई-कॉमर्स पर बच्चों के उत्पादों के प्रचार के तौर-तरीकों पर सवाल खड़े हो गए हैं, बल्कि बाजार में बिक रहे इन प्रोडक्ट्स के न्यूट्रिशनल दावों की भी पोल खुलती नजर आ रही है।

इन दो प्रमुख बेबी प्रोडक्ट्स के दावों पर आपत्ति
नियामक ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म्स पर नेस्ले के प्रोडक्ट्स और उनके प्रचार सामग्री की गहन जांच की। इस दौरान कंपनी के दो सबसे लोकप्रिय ब्रांड्स- NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1- के प्रचार पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की गईं। FSSAI के अनुसार, ‘नान एक्सेल प्रो स्टेज 1’ पर “5 HMOs” और “व्हे प्रोटीन” से जुड़े दावों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। वहीं, ‘लैक्टोजेन प्रो 1’ के प्रचार में व्हे प्रोटीन को “आसानी से पचने योग्य” (Easy to Digest) बताया गया था।

नियामक ने पाया कि ये दावे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (इन्फेंट न्यूट्रिशन) रेगुलेशंस, 2020 के नियम 4(2) का खुला उल्लंघन हैं, जो बच्चों के आहार की बिक्री बढ़ाने के लिए किसी भी तरह के भ्रामक या अवांछित दावों पर रोक लगाता है। इसके अलावा, 1992 के इन्फेंट मिल्क सब्स्टीट्यूट्स एक्ट की धारा 3 के तहत भी इसे नियम-विरुद्ध माना गया है, जिसका मूल उद्देश्य स्तनपान को बढ़ावा देना और शिशु आहार के मनमाने विज्ञापन को रोकना है।

लैब टेस्ट में घटिया मिला फॉर्मूला मिल्क, बायोटिन की भारी कमी
मामला सिर्फ भ्रामक विज्ञापनों तक सीमित नहीं है, बल्कि गुणवत्ता के मोर्चे पर भी कंपनी सवालों के घेरे में आ गई है। FSSAI के मुताबिक, लैब जांच के दौरान नेस्ले द्वारा निर्मित एक फॉलो-अप फॉर्मूला मिल्क का सैंपल मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि इसमें ‘बायोटिन’ की मात्रा 2020 के नियमों द्वारा तय अनिवार्य मानकों से काफी कम और सब-स्टैंडर्ड थी। पहले टेस्ट के बाद सैंपल को जब दोबारा रेफरल लैब भेजा गया, तो वहां भी यह प्रोडक्ट परीक्षण में पूरी तरह फेल साबित हुआ। इसके बाद ही नियामक ने तीनों मामलों में कानूनी कार्रवाई का रुख किया।

नेस्ले ने खारिज किए आरोप, दी वैज्ञानिक तर्कों की दलील
पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए नेस्ले इंडिया ने नियामक के सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि उसके सभी उत्पाद और लेबल पूरी तरह से लागू नियमों का पालन करते हैं। नेस्ले के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि NAN Excella Pro Stage 1 और Lactogen Pro 1 के लेबल FSSAI की विशेषज्ञ समिति द्वारा ही पहले मंजूर किए गए थे। नोटिस के जवाब में कंपनी ने विस्तृत वैज्ञानिक दस्तावेज सौंपे हैं जो साबित करते हैं कि लेबल पर लिखी बातें तथ्यात्मक हैं। हालांकि, फॉलो-अप फॉर्मूले में बायोटिन की कमी को लेकर शुरुआती जांच में कंपनी की ओर से कोई ठोस स्पष्टीकरण सामने नहीं आया था, जिसके बाद कंपनी ने सार्वजनिक बयान जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।

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