Published: Saturday, August 1, 2026, 18:13 [IST]
Netanyahu Political Tension: गाजा को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 'ऐतिहासिक समझौते' के दावे ने इजराइल की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है। ट्रम्प का कहना है कि हमास हथियार छोड़ने को तैयार है और इसके बदले इजराइली सेना गाजा से पीछे हटेगी। लेकिन इजराइल के भीतर इस फॉर्मूले का जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है।
नेतन्याहू सरकार के सहयोगी मंत्री, विपक्ष और सुरक्षा विशेषज्ञ इसे देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बता रहे हैं। ऐसे में ट्रम्प की पहल ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ऐसी राजनीतिक दुविधा में डाल दिया है, जहां किसी भी फैसले की कीमत उन्हें चुनाव और अमेरिका दोनों मोर्चों पर चुकानी पड़ सकती है।
ट्रम्प के ऐलान ने नेतन्याहू की बढ़ाई मुश्किल
30 जुलाई को ट्रम्प ने दावा किया कि गाजा पर बड़ा समझौता हो गया है और हमास हथियार छोड़ने के लिए तैयार है। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि इजराइली सेना भी गाजा से हट जाएगी। हालांकि इजराइल सरकार ने अब तक इस पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। यही वजह है कि ट्रम्प के बयान और इजराइल की चुप्पी के बीच कई सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प के इस ऐलान ने नेतन्याहू पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह का दबाव बढ़ा दिया है।
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गाजा छोड़ने के खिलाफ क्यों खड़ा है इजराइल?
7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद से इजराइल ने गाजा में बड़ा सैन्य अभियान चलाया। इसके बावजूद देश के भीतर बड़ी आबादी अब भी सख्त सैन्य कार्रवाई के पक्ष में है। हालिया सर्वे में अधिकांश यहूदी इजराइलियों ने गाजा के फिलिस्तीनियों को हटाने का समर्थन किया। कई नेताओं का मानना है कि अगर सेना पीछे हटती है तो हमास फिर से मजबूत होकर 7 अक्टूबर जैसा हमला दोहरा सकता है। इसी वजह से गाजा से सेना हटाने के प्रस्ताव का देश के भीतर तीखा विरोध हो रहा है।
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नेतन्याहू के सहयोगी ही बने सबसे बड़ी चुनौती
नेतन्याहू सरकार के वित्त मंत्री बेजलेल स्मोट्रिच और राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्विर खुले तौर पर गाजा से सेना हटाने के खिलाफ हैं। उनका कहना है कि पहले हमास का पूरी तरह खात्मा और हथियारों का समर्पण होना चाहिए। दूसरी ओर पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट भी मानते हैं कि हमास की सैन्य और राजनीतिक ताकत खत्म किए बिना पीछे हटना इजराइल की रणनीतिक हार होगी। यानी सरकार और विपक्ष के अलग-अलग धड़े इस मुद्दे पर लगभग एक जैसी चिंता जता रहे हैं।
ट्रम्प को नाराज करें या सहयोगियों को, नेतन्याहू के सामने दुविधा
नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती संतुलन बनाने की है। अगर वे ट्रम्प के प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं तो उनके दक्षिणपंथी सहयोगी और समर्थक उनसे दूरी बना सकते हैं। वहीं अगर वे समझौते को ठुकराते हैं तो अमेरिका के साथ रिश्तों पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव से पहले नेतन्याहू ट्रम्प को नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहेंगे, क्योंकि अमेरिका का सैन्य और कूटनीतिक समर्थन इजराइल के लिए बेहद अहम माना जाता है।
क्या गाजा से पूरी तरह हटेगी इजराइली सेना?
मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि गाजा से इजराइली सेना की पूरी वापसी की संभावना बेहद कम है। माना जा रहा है कि नेतन्याहू ट्रम्प को संतुष्ट करने के लिए सीमित स्तर पर कुछ कदम उठा सकते हैं, लेकिन पूरी तरह पीछे हटना उनकी सुरक्षा नीति और चुनावी रणनीति दोनों के खिलाफ होगा। ऐसे में आने वाले महीनों में समझौते की बातें जरूर आगे बढ़ सकती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इजराइली सेना का गाजा से पूरी तरह निकलना फिलहाल मुश्किल नजर आ रहा है।