New Censor Board Members List: सेंसर बोर्ड में फेरबदल, प्रीति जिंटा समेत 18 नए चेहरे, लिस्ट में कौन-कौन?

Published on 16 सित॰ 2026

Time Published: Thursday, September 17, 2026, 1:07 [IST]

New Censor Board Members List: फिल्म रिलीज से पहले पर्दे पर क्या दिखेगा और क्या नहीं, इसका फैसला जिस संस्था से जुड़ा है, उसमें बड़ा बदलाव हुआ है। केंद्र सरकार ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड यानी CBFC का पुनर्गठन कर दिया है। नई 18 सदस्यीय टीम में बॉलीवुड से लेकर क्षेत्रीय सिनेमा, संगीत, थिएटर, साहित्य और टीवी से जुड़े कई चर्चित नाम शामिल हैं। इनमें प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी, मनोज जोशी, पल्लवी जोशी, रूपाली गांगुली, प्रसेनजीत चटर्जी, निर्देशक प्रियदर्शन और ग्रैमी पुरस्कार विजेता संगीतकार रिकी केज जैसे नाम शामिल हैं।

सरकार ने यह बदलाव ऐसे समय किया है, जब फिल्मों के प्रमाणन को लेकर पिछले कुछ सालों में लगातार बहस होती रही है। किसी फिल्म को प्रमाणपत्र मिलने में देरी हो, कट लगाने को कहा जाए या उसकी रिलीज कानूनी विवाद में फंस जाए, इन सबके बीच CBFC की भूमिका लगातार चर्चा में रही है। लेकिन नई टीम के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या नए चेहरे फिल्म प्रमाणन की प्रक्रिया को लेकर दर्शकों और फिल्म निर्माताओं की चिंताओं को कम कर पाएंगे?

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सबसे पहले जानिए- नया क्या बदला है?

16 सितंबर 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने CBFC के नए बोर्ड की घोषणा की। आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, बोर्ड तत्काल प्रभाव से लागू होगा और तीन साल या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, काम करेगा। इसका गठन सिनेमैटोग्राफ अधिनियम, 1952 की धारा 3(1) और सिनेमैटोग्राफ (सर्टिफिकेशन) नियम, 2024 के नियम 3 के तहत किया गया है। यानी अभी जो बदला है, वह मुख्य रूप से बोर्ड की सदस्यता है। CBFC का कानूनी ढांचा या उसकी मूल जिम्मेदारी नहीं बदली है।

कौन-कौन हैं नए 18 सदस्य?

सरकार की ओर से जारी आधिकारिक सूची के मुताबिक नए बोर्ड में ये सदस्य शामिल हैं:-

  • 1. विनोद अनुपम : फिल्म समीक्षक
  • 2. मनोज जोशी : अभिनेता
  • 3. अभिषेक जैन : फिल्म लेखक/निर्देशक
  • 4. रिकी केज : संगीतकार
  • 5. प्रियदर्शन : फिल्म निर्देशक
  • 6. सुनील शेट्टी : अभिनेता
  • 7. हंसराज हंस : गायक
  • 8. सुप्रिया यारलागड्डा : फिल्म निर्माता
  • 9. यतींद्र मिश्रा : लेखक/कवि
  • 10. रूपाली गांगुली : अभिनेत्री
  • 11. प्रीति जिंटा : अभिनेत्री
  • 12. नीला माधब पांडा : फिल्म निर्माता/निर्देशक
  • 13. पंकज त्रिपाठी : अभिनेता
  • 14. प्रोसेनजीत चटर्जी : अभिनेता
  • 15. पल्लवी जोशी : अभिनेत्री/निर्माता
  • 16. निशिगंधा वाड : अभिनेत्री
  • 17. वामन केंद्रे : रंगमंच निर्देशक
  • 18. रमेश पतंगे : लेखक

इस सूची से एक बात साफ दिखाई देती है, नए बोर्ड में सिर्फ फिल्मी सितारों को ही जगह नहीं मिली है। संगीत, साहित्य, थिएटर, फिल्म आलोचना और क्षेत्रीय सिनेमा से जुड़े लोगों को भी शामिल किया गया है।

ग्रैमी विजेता रिकी केज की एंट्री क्यों खास?

नई टीम में सबसे चर्चित नामों में से एक रिकी केज हैं। रिकी केज, भारतीय संगीतकार हैं और तीन बार ग्रैमी पुरस्कार जीत चुके हैं। उनका शामिल होना इसलिए भी खास है क्योंकि CBFC बोर्ड में अब सिर्फ अभिनय और फिल्म निर्माण से जुड़े अनुभव के बजाय संगीत जैसे रचनात्मक क्षेत्र का अनुभव भी शामिल होगा। हालांकि, बोर्ड के सदस्य के तौर पर उनकी भूमिका फिल्म प्रमाणन से जुड़ी सामूहिक जिम्मेदारी का हिस्सा होगी, किसी एक सदस्य के पास अकेले फिल्म पर फैसला लेने की शक्ति नहीं होती।

प्रीति जिंटा से पंकज त्रिपाठी तक बड़े फिल्मी चेहरे

नई टीम में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के कई लोकप्रिय कलाकार हैं। प्रीति जिंटा, पंकज त्रिपाठी, सुनील शेट्टी और मनोज जोशी जैसे अभिनेता अब उस बोर्ड का हिस्सा होंगे, जो फिल्मों के प्रमाणन से जुड़ी प्रक्रिया में भूमिका निभाता है। इसके साथ ही पल्लवी जोशी, रूपाली गांगुली और प्रोसेनजीत चटर्जी जैसे नाम भी शामिल हैं। इससे बोर्ड में हिंदी सिनेमा के साथ-साथ बंगाली और क्षेत्रीय मनोरंजन जगत का प्रतिनिधित्व भी दिखाई देता है।

सिर्फ बॉलीवुड नहीं, क्षेत्रीय सिनेमा और थिएटर को भी जगह

नई सूची को देखें तो इसमें कई ऐसे नाम हैं, जो मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा से बाहर की दुनिया का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  • प्रोसेनजीत चटर्जी बंगाली सिनेमा के बड़े नाम हैं।
  • निशिगंधा वाड मराठी रंगमंच और सिनेमा से जुड़ी हैं।
  • वामन केंद्रे थिएटर के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं।
  • सुप्रिया यारलागड्डा तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री से जुड़ी हैं।
  • नीला माधब पांडा सामाजिक विषयों और क्षेत्रीय संदर्भों वाली फिल्मों के लिए पहचाने जाते हैं।

यानी बोर्ड की नई संरचना में अलग-अलग भाषाओं और माध्यमों से आने वाले अनुभवों को शामिल किया गया है।

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CBFC आखिर करता क्या है?

यहां एक जरूरी फर्क समझना जरूरी है। आम बोलचाल में इसे 'सेंसर बोर्ड' कहा जाता है, लेकिन इसका आधिकारिक नाम Central Board of Film Certification यानी CBFC है। इसका मुख्य काम सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए फिल्मों को प्रमाणित करना है। फिल्म की सामग्री के आधार पर उसे उपयुक्त प्रमाणपत्र और वर्गीकरण दिया जाता है। मौजूदा कानूनी ढांचे के तहत बोर्ड फिल्मों के प्रमाणन से जुड़े नियमों के अनुसार काम करता है। इसलिए नए 18 सदस्य आने का मतलब यह नहीं है कि अब CBFC का कानून या अधिकार बदल गया है। बदली है टीम, नियमों का मूल ढांचा नहीं।

फिर इतने समय बाद बोर्ड बदलने की जरूरत क्यों पड़ी?

सरकारी अधिसूचना में बोर्ड के पुनर्गठन का कानूनी आधार बताया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछली बोर्ड संरचना का पुनर्गठन लंबे समय से लंबित था और कुछ सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो चुका था। CBFC बोर्ड का पुनर्गठन सामान्य तौर पर निर्धारित अवधि के बाद किया जाता है। पिछला व्यापक पुनर्गठन 2017 में हुआ था। उस समय बोर्ड में 12 सदस्य थे। इस बार सदस्य संख्या बढ़ाकर 18 की गई है।

फिल्मों की रिलीज में CBFC इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

फिल्म बनने के बाद उसके सिनेमाघरों में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए प्रमाणन जरूरी होता है। यही वजह है कि फिल्म निर्माता अक्सर प्रमाणन प्रक्रिया को लेकर काफी सतर्क रहते हैं। किसी फिल्म को प्रमाणपत्र मिलने में देरी हो जाए तो रिलीज डेट प्रभावित हो सकती है। अगर किसी दृश्य, संवाद या सामग्री में बदलाव मांगा जाए तो निर्माता को फिल्म दोबारा जमा करनी पड़ सकती है। यही कारण है कि CBFC का फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रहता, कई बार उसका सीधा असर फिल्म की रिलीज, कारोबार और दर्शकों तक पहुंच पर पड़ता है।

'पंजाब 95' से 'सतलुज' तक विवाद क्यों हुआ?

2026 में दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'पंजाब 95', जिसे बाद में 'सतलुज' नाम से रिलीज किया गया, प्रमाणन विवाद का चर्चित उदाहरण बनी। फिल्म के निर्माताओं और CBFC के बीच लंबे समय तक प्रमाणन को लेकर गतिरोध रहा। निर्माताओं की ओर से बड़ी संख्या में बदलाव मांगे जाने का दावा किया गया था। बाद में फिल्म नए नाम 'सतलुज' के साथ OTT पर आई, लेकिन भारत में प्लेटफॉर्म से उसके हटाए जाने की खबरों ने एक बार फिर प्रमाणन और रिलीज प्रक्रिया पर चर्चा छेड़ दी। यह मामला इस बात का उदाहरण बना कि प्रमाणन प्रक्रिया में देरी या बदलाव की मांग किसी फिल्म की सार्वजनिक रिलीज को किस तरह प्रभावित कर सकती है।

'वेलकम टू द जंगल' और 'जना नायकन' भी चर्चा में रहे

हाल के समय में दूसरी फिल्मों को लेकर भी प्रमाणन प्रक्रिया चर्चा में रही है। 'वेलकम टू द जंगल' को प्रमाणन के दौरान कई संशोधनों के बाद UA 16+ प्रमाणपत्र मिला। वहीं, तमिल अभिनेता थलपति विजय की 'जना नायकन' को लेकर प्रमाणन प्रक्रिया से जुड़ी देरी और कानूनी विवाद भी सामने आए। इन मामलों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया कि फिल्म प्रमाणन और रचनात्मक स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।