उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सुधार के लिए चलाए जा रहे अभियानों का असर जमीन पर दिखने लगा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में नाटेपन की समस्या में 8.2 प्रतिशत अंक की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ( फाइल फोटो )
- Published: 19 Sep 2026, 12:02 PM IST
- Last Updated: 19 Sep 2026, 12:02 PM IST
उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा चलाए जा रहे निरंतर बाल विकास और स्वास्थ्य अभियानों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के पोषण, नियमित टीकाकरण और स्वास्थ्य देखभाल पर दिए गए विशेष जोर के कारण प्रदेश में बच्चों के शारीरिक कद-काठ और सेहत में बड़ा सुधार देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) में जहां प्रदेश में नाटेपन का शिकार बच्चों का प्रतिशत 39.7 दर्ज किया गया था, वहीं NFHS-6 के नए आंकड़ों में यह घटकर 31.5 प्रतिशत रह गया है। महज चार वर्षों में 8.2 प्रतिशत की यह बड़ी गिरावट योगी सरकार की स्वास्थ्य और पोषण नीतियों की बड़ी सफलता को दर्शाती है।
योगी सरकार की स्वास्थ्य और पोषण नीतियों का दिखा असर
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल के अनुसार, बच्चों के शारीरिक विकास और लंबाई में यह सुधार राज्य सरकार द्वारा चलाए गए दीर्घकालिक और लक्षित प्रयासों का परिणाम है।
प्रदेश सरकार ने आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य विभागों के तालमेल से पोषण वितरण प्रणाली को मजबूत किया है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समय पर टीकाकरण, उचित पूरक आहार और परिवारों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने से कुपोषण के मामलों में भारी कमी आई है।
शुरुआती 1000 दिनों पर सरकार का विशेष फोकस
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बच्चे के सर्वांगीण विकास के लिए उसके जीवन के शुरुआती 1000 दिन (गर्भावस्था से लेकर बच्चे के 2 वर्ष का होने तक) सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। योगी सरकार ने इस संवेदनशील अवधि को ध्यान में रखते हुए विशेष अभियान चलाए हैं।
माताओं के उचित पोषण, नियमित जांच, संस्थागत प्रसव और अनिवार्य स्तनपान को बढ़ावा देने से प्रदेश में लंबे समय से चली आ रही कुपोषण की समस्या को नियंत्रित करने में बड़ी सफलता मिली है।
सुधार के मामले में राष्ट्रीय औसत से भी आगे बढ़ा उत्तर प्रदेश
एनएफएचएस-6 के आंकड़े यह साबित करते हैं कि कुपोषण और नाटेपन से लड़ाई में उत्तर प्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर के मुकाबले अधिक तीव्र सुधार दर्ज किया है।
राष्ट्रीय स्तर पर 5 साल से कम उम्र के बच्चों में नाटापन 35.5 प्रतिशत से घटकर 29.3 प्रतिशत (6.2% की कमी) हुआ है, जबकि योगी सरकार के प्रभावी प्रबंधन से उत्तर प्रदेश में यह गिरावट 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह उपलब्धि यह स्पष्ट करती है कि प्रदेश सरकार की 'कुपोषण मुक्त उत्तर प्रदेश' की संकल्पना अब धरातल पर साकार हो रही है।