जमुई में लगातार मिल रही शिकायतों के बीच बिहार सरकार के पीएचईडी मंत्री सह जमुई के प्रभारी मंत्री संजय सिंह ने गुरुवार देर रात सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया।
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मंत्री के अचानक पहुंचते ही अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खुल गई। शिशु वार्ड में रात के समय डॉक्टर की मौजूदगी नहीं मिलने, वार्ड की व्यवस्था में कमी और इमरजेंसी में गंदगी देखकर मंत्री ने सिविल सर्जन के प्रति कड़ी नाराजगी जताई। मंत्री ने कहा कि नवजात शिशुओं के वार्ड में रात के समय डॉक्टर नहीं मिलना बेहद गंभीर मामला है। यह बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ है।
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पीएचईडी मंत्री सह जमुई के प्रभारी संजय सिंह।


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स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही
उन्होंने कहा कि वार्ड में मौजूद महिला कर्मी भी यह स्पष्ट नहीं कर सकीं कि डॉक्टर कब आए और कब चले गए। मौके पर सिविल सर्जन भी डॉक्टर की मौजूदगी की स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके। मंत्री ने इसे स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही बताया।
इमरजेंसी वार्ड का निरीक्षण करने पर साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद खराब मिली। मंत्री ने कहा कि अस्पताल के कई वार्डों में गंदगी मिली है।
अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर ऐसी स्थिति किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जांच के बाद जिस स्तर पर भी लापरवाही सामने आएगी, संबंधित लोगों पर कार्रवाई होगी।
नियम न मानने वाले नर्सिंग होम सील करें
मंत्री ने शुक्रवार को हुई 20 सूत्री समिति की बैठक में उठी शिकायतों का भी जिक्र किया। बैठक में जमुई के कई नर्सिंग होम के पंजीकरण और वहां इलाज कर रहे चिकित्सकों की योग्यता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए थे।
मंत्री ने जिलाधिकारी को जिले के सभी नर्सिंग होम की जांच कर एक महीने के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जांच में जो नर्सिंग होम नियमों के विपरीत पाए जाएंगे, उन्हें तत्काल सील किया जाएगा।

परिजन बोले-व्हीलचेयर मांगने के बाद मिली
निरीक्षण के बाद अस्पताल की व्यवस्था को लेकर एक मरीज के परिजन ने भी गंभीर आरोप लगाए। एक युवक अपनी मां को गोद में उठाकर इलाज के लिए ले जाता दिखा।
उसने बताया कि व्हीलचेयर मांगने के बाद ही मिली, जबकि मरीजों के परिजनों को खुद पहल करनी पड़ती है। युवक ने आरोप लगाया कि मंत्री के निरीक्षण के दौरान अस्पताल का व्यवहार बदल गया, लेकिन उनके जाते ही कर्मचारी फिर पुराने रवैये पर लौट आए।

मंत्री ने कहा कि अस्पताल की कमियां जल्द दूर कराई जाएंगी। सफाई व्यवस्था समेत प्रत्येक वार्ड की जांच होगी। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
औचक निरीक्षण ने व्यवस्था सुधारने के सरकारी दावों के बीच सदर अस्पताल की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।