मृतक बच्चे के परिजन पीजीआई प्रशासन और चंडीगढ़ पुलिस को शिकायत देने के बाद उसकी कॉपी दिखाते हुए।
पीजीआई चंडीगढ़ में 18 अगस्त को जन्मे नवजात बच्चे की मृत्यु के बाद उसकी पहचान और जेंडर को लेकर परिवार ने गंभीर सवाल उठाए हैं। बच्चे के पिता लकी कुमार ने पीजीआई प्रशासन और थाना पुलिस को शिकायत देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार व्यक्ति
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शिकायत में पिता ने पूरे घटनाक्रम का जिक्र करते हुए कहा है कि 18 अगस्त को पीजीआई में बच्चे के जन्म के बाद डॉक्टरों और स्टाफ ने उन्हें बताया था कि बच्चा स्वस्थ है और मेल यानी लड़का है। इसके बाद बच्चे को प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया, जहां 19 अगस्त को डॉक्टरों ने परिवार से कहा कि ‘बेबी का जेंडर मेल नहीं है।’ ये सभी आरोप शिकायत में लगाए गए हैं। दैनिक भास्कर इन आरोपों की पुष्टि नहीं करता है।
परिवार के अनुसार, इसके बाद उन्होंने पीजीआई से संपर्क किया। वहां से बच्चे को तुरंत वापस पीजीआई लाने के लिए कहा गया। 20 अगस्त की सुबह बच्चे को वापस पीजीआई ले जाया गया। शिकायत में कहा गया है कि वहां परिवार से कुछ कागजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। उन्हें बताया गया कि बच्चे की हालत गंभीर है और अभी यह साफ नहीं है कि बच्चा लड़का है या लड़की। इसके बाद नवजात की मौत हो गई।
परिवार ने शिकायत में कहा है कि वह बिना जांच किसी डॉक्टर, कर्मचारी या अस्पताल को दोषी नहीं ठहरा रहे हैं, लेकिन घटनाक्रम में विरोधाभास होने के कारण बच्चे की पहचान में गड़बड़ी, मिक्स-अप या अन्य गंभीर लापरवाही की आशंका है। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

पीजीआई चंडीगढ़।
इसे लेकर पीजीआई प्रशासन से बात की गई तो उनका कहना है कि शिकायत अभी उनके पास आई है। शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जाएगी। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी। अगर ऐसा कुछ हुआ है तो मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाएगी।
ये आरोप लगाए शिकायत में परिवार ने ...
18 अगस्त को बच्चे के जन्म के बाद मेल बताया: शिकायत में पिता लकी कुमार ने कहा है कि उनकी पत्नी कोमल का प्रसव 18 अगस्त 2026 को पीजीआई चंडीगढ़ में हुआ था। डॉक्टरों ने बताया था कि बच्चा समय से पहले पैदा हो रहा है और बच्चे को गंभीर जोखिम हो सकता है। इसके संबंध में परिवार से सहमति-पत्र पर हस्ताक्षर करवाए गए। बच्चे के जन्म के बाद डॉक्टरों और स्टाफ ने बताया कि बच्चा स्वस्थ है और मेल यानी लड़का है।
पीजीआई ने प्राइवेट अस्पताल भेजा: शिकायत के अनुसार, पीजीआई की ओर से परिवार को बताया गया कि बच्चे के लिए अस्पताल में सीट/बेड उपलब्ध नहीं है। इसके बाद बच्चे को प्राइवेट अस्पताल में भर्ती करवाया गया। परिवार 18 अगस्त की रात नवजात को पीजीआई से प्राइवेट अस्पताल लेकर गया।
19 अगस्त को प्राइवेट अस्पताल में जेंडर को लेकर अलग जानकारी: शिकायत में कहा गया है कि बच्चा 19 अगस्त को पूरे दिन प्राइवेट अस्पताल में भर्ती रहा। इसी दिन प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों ने परिवार को बताया कि ‘बेबी का जेंडर मेल नहीं है।’ शिकायतकर्ता के अनुसार, यह बात उनके लिए गंभीर और चौंकाने वाली थी, क्योंकि इससे एक दिन पहले पीजीआई में बच्चे को मेल यानी लड़का बताया गया था।
पीजीआई से बच्चे को वापस बुलाया: शिकायत के अनुसार, प्राइवेट अस्पताल से मिली जानकारी के बाद परिवार ने पीजीआई से संपर्क किया और पूरी बात बताई। इसके बाद पीजीआई के संबंधित डॉक्टरों और अधिकारियों ने बच्चे को तुरंत वापस पीजीआई लाने के लिए कहा।
20 अगस्त को फिर पीजीआई लेकर गए: शिकायत में कहा गया है कि पीजीआई के कहने पर 20 अगस्त की सुबह बच्चे को वापस पीजीआई ले जाया गया। वहां परिवार से कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए। परिवार के अनुसार, उन्हें बताया गया कि बच्चे की हालत बहुत गंभीर है, बच्चा बहुत ज्यादा बीमार है और उसकी मृत्यु भी हो सकती है। साथ ही उन्हें बताया गया कि अभी यह निश्चित नहीं है कि बच्चा मेल है या फीमेल।
इसके बाद बच्चे की मौत: शिकायत में पिता ने कहा है कि दुर्भाग्यवश उनके नवजात बच्चे की मृत्यु हो गई। बच्चे की मौत के बाद परिवार ने उसकी पहचान और जेंडर को लेकर सामने आए विरोधाभासों की जांच की मांग की है।
PGI-प्राइवेट अस्पताल का रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
परिवार ने पुलिस से मांग की है कि पीजीआई और प्राइवेट अस्पताल में बच्चे से संबंधित सभी मूल मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित करवाए जाएं। 18 अगस्त 2026 से वर्तमान समय तक की सभी संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित या जब्त करवाने की मांग की गई है, ताकि कोई रिकॉर्ड डिलीट या ओवरराइट न हो सके।
शिकायत में बच्चे और उसकी मां कोमल के पहचान टैग, बैंड तथा मां-बच्चे से संबंधित पहचान रिकॉर्ड सुरक्षित करवाने की मांग भी की गई है। इसके अलावा 18 अगस्त को बच्चे के जन्म से लेकर उसी रात प्राइवेट अस्पताल ले जाने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने को कहा गया है।
परिवार ने 18 अगस्त की रात पीजीआई से प्राइवेट अस्पताल भेजे जाने के कारण और उससे जुड़े रेफरल व ट्रांसफर रिकॉर्ड की जांच की मांग की है। साथ ही 19 अगस्त को प्राइवेट अस्पताल में बच्चे के दाखिले, इलाज और पहचान से संबंधित सभी रिकॉर्ड की जांच करने को कहा है।
प्राइवेट अस्पताल के डॉक्टरों के रिकॉर्ड की जांच
परिवार ने पुलिस से 19 अगस्त को प्राइवेट अस्पताल द्वारा ‘बेबी का जेंडर मेल नहीं है’ कहे जाने से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड और डॉक्टरों के नोट्स की जांच करने की मांग की है। इसके अलावा पीजीआई से संपर्क के बाद बच्चे को तुरंत वापस पीजीआई बुलाए जाने से संबंधित सभी बातचीत, कॉल और ट्रांसफर रिकॉर्ड सुरक्षित करवाने की मांग की गई है।
20 अगस्त की सुबह प्राइवेट अस्पताल से पीजीआई वापस लाए जाने का पूरा ट्रांसफर रिकॉर्ड, बच्चे को ले जाने वाली एंबुलेंस या वाहन तथा उसके चालक और स्टाफ से संबंधित रिकॉर्ड की जांच करने की मांग भी शिकायत में की गई है।
डॉक्टरों-स्टाफ के बयान दर्ज करने की मांग
शिकायत में परिवार ने 18 अगस्त से 20 अगस्त के दौरान पीजीआई और प्राइवेट अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्टाफ की ड्यूटी रोस्टर सुरक्षित करवाकर उनके बयान दर्ज करने की मांग की है।
इसके अलावा 20 अगस्त को पीजीआई में परिवार से हस्ताक्षर करवाए गए सभी दस्तावेजों की जांच कर उनकी प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराने की मांग की गई है। बच्चे की पहचान और जेंडर से संबंधित सभी रिकॉर्ड की स्वतंत्र जांच कराने की मांग भी शिकायत में शामिल है।
डीएनए या वैज्ञानिक जांच की मांग
परिवार ने बच्चे की पहचान और मामले की सच्चाई स्पष्ट करने के लिए डीएनए अथवा अन्य वैज्ञानिक और फॉरेंसिक जांच करवाने की मांग की है। साथ ही सभी सीसीटीवी, मेडिकल रिकॉर्ड, पहचान रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के लिए तत्काल कार्रवाई करने को कहा है।
शिकायत में कहा गया है कि यदि जांच में किसी डॉक्टर, कर्मचारी, अधिकारी, अस्पताल या अन्य व्यक्ति की लापरवाही, गलत जानकारी, रिकॉर्ड में हेरफेर, बच्चे की पहचान में गड़बड़ी या मिक्स-अप अथवा कोई आपराधिक कृत्य सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। संज्ञेय अपराध के साक्ष्य मिलने पर एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की गई है।
डायरी नंबर और जांच की जानकारी देने की मांग
पिता ने पुलिस से शिकायत का डायरी, डीडी या शिकायत नंबर उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही पुलिस द्वारा की गई जांच और कार्रवाई की जानकारी लिखित रूप में देने को कहा है।
शिकायत के अंत में पिता ने कहा है कि उनका उद्देश्य किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशान करना नहीं है। उनका उद्देश्य बच्चे की मृत्यु के संबंध में सच्चाई सामने लाना, बच्चे की पहचान और जेंडर से जुड़े विरोधाभासों की निष्पक्ष जांच करवाना और यदि किसी व्यक्ति की लापरवाही या गैरकानूनी कृत्य सामने आए तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करवाना है।
पीजीआई के दस्तावेज में ‘Sex-Boy’ दर्ज
परिवार की शिकायत के साथ पीजीआई का एक ‘New Born Check List’ दस्तावेज भी दिया गया है। इसमें Postgraduate Institute of Medical Education & Research, Chandigarh-160 012 (India) और ‘NEW BORN CHECK LIST’ लिखा है। दस्तावेज में ‘Sex-Boy -Boy’ दर्ज है।