Updated: Sunday, July 12, 2026, 19:07 [IST]
Modi Indonesia Australia New Zealand visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 दिनों के विदेश दौरे के बाद 12 जुलाई को भारत लौट आए हैं। इस दौरान उन्होंने इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का दौरा किया। तीनों देशों के साथ रक्षा, व्यापार, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, क्रिटिकल मिनरल्स, शिक्षा और टेक्नोलॉजी समेत कई अहम समझौते हुए।
इन समझौतों का असर सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, ऊर्जा जरूरतों और चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में भी मदद मिलेगी। आइए जानते हैं कि इस दौरे से भारत को क्या-क्या बड़ी उपलब्धियां मिलीं।
इंडोनेशिया के साथ क्या-क्या हुई डील?
सबांग पोर्ट से हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की ताकत
भारत और इंडोनेशिया मिलकर मलक्का जलडमरूमध्य के पास स्थित सबांग पोर्ट विकसित करेंगे। ग्रेट निकोबार ट्रांसशिपमेंट हब के साथ मिलकर यह परियोजना हिंद महासागर में भारत की रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करेगी। इससे अहम समुद्री मार्गों पर भारत की निगरानी क्षमता बढ़ेगी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
ब्रह्मोस डील से रक्षा निर्यात को मिलेगा बड़ा बढ़ावा
इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम खरीदने पर सहमति जताई है। इस डील के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा विदेशी देश बन जाएगा। इससे भारत के रक्षा निर्यात को गति मिलेगी, स्वदेशी रक्षा उद्योग मजबूत होगा और 'मेक इन इंडिया' अभियान को भी नई मजबूती मिलेगी।
दक्षिण चीन सागर में मजबूत होगी भारत की रणनीतिक साझेदारी
ब्रह्मोस मिसाइल सौदा केवल रक्षा निर्यात तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका बड़ा रणनीतिक महत्व भी है। दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच इंडोनेशिया के साथ रक्षा सहयोग बढ़ने से भारत की क्षेत्रीय भूमिका मजबूत होगी। इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सुरक्षा सहयोग और सामरिक संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।
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ऑस्ट्रेलिया के साथ कितने समझौते
यूरेनियम सप्लाई से परमाणु ऊर्जा को मिलेगी मजबूती
ऑस्ट्रेलिया ने भारत को शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए यूरेनियम की सप्लाई बढ़ाने पर सहमति दी है। इससे भारत को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी और 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने के लक्ष्य को गति मिलेगी।
क्रिटिकल मिनरल्स से घटेगी चीन पर निर्भरता
दोनों देशों ने लीथियम, कोबाल्ट और अन्य क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन मजबूत करने का फैसला किया है। ये खनिज बैटरी, इलेक्ट्रिक वाहन, मोबाइल और सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए जरूरी हैं, जिससे भारत की चीन पर निर्भरता कम होगी।
रक्षा और समुद्री सुरक्षा में बढ़ेगा सहयोग
भारत और ऑस्ट्रेलिया ने रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देने का फैसला किया है। रक्षा मंत्रियों की नियमित बैठक, साइबर सुरक्षा, नौसैनिक सहयोग और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संयुक्त रणनीति से भारत की समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक क्षमता मजबूत होगी।
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न्यूजीलैंड से कई अहम समझौते पर मुहर
FTA से व्यापार और निवेश को मिलेगी नई रफ्तार
भारत और न्यूजीलैंड ने रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करते हुए 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) लागू होने से कई उत्पादों पर टैरिफ कम या खत्म होगा। साथ ही न्यूजीलैंड ने भारत में अगले 15 वर्षों में बड़े निवेश की योजना भी बनाई है।
कृषि, शिक्षा और उद्योग क्षेत्रों को होगा फायदा
दोनों देशों के बीच हुए समझौतों से कृषि, फूड प्रोसेसिंग, शिक्षा, टेक्नोलॉजी और उद्योग क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा। इससे भारतीय उत्पादों को न्यूजीलैंड के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, जबकि निवेश और तकनीकी साझेदारी से रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इंडो-पैसिफिक में मजबूत होगी भारत की रणनीतिक स्थिति
इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ रक्षा, समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन और नई तकनीकों पर बढ़ा सहयोग भारत की कूटनीतिक ताकत को मजबूत करेगा। इससे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का संतुलन बनाने, क्षेत्रीय स्थिरता बढ़ाने और भारत की वैश्विक रणनीतिक भूमिका को नई मजबूती मिलेगी।