'वर्दी उतारकर आओ, हैसियत पता चलेगी' POK में पाकिस्तान सेना का जमकर विरोध

Published on 2 अग॰ 2026

Aug 02, 2026 08:19 am ISTलाइव हिन्दुस्तान

Follow us on Google News

share

पीओके में पाकिस्तान की सेना का विरोध लगातार जारी है। JAAC के नेता सरदार अमन खान ने पाकिस्तानी फौजी अधिकारियों को चुनौती दी है कि अगर उन्हें अपनी लोकप्रियता पर भरोसा है, तो फौज छोड़कर जनता के बीच में आना चाहिए।

JAAC's agitation continues in PoK; warning issued to Asim Munir's army; Pakistan Army.

पीओके में जारी आंदोलन

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) में पाकिस्तानी सेना को जबरदस्त विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कई महीनों से जारी विरोध प्रदर्शन अब अपने तीखे दौर में है। प्रदर्शनकारी सीधे पाकिस्तानी सेना को चुनौती दे रहे हैं। जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी ऐक्शन लीग (JAAC) के झंडे तले हो रहे इस प्रदर्शन में जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। ऐसी ही एक रैली में JAAC चीफ सरदार अमन खान ने मुनीर सेना को सीधी चुनौती दी। उन्होंने कहा कि अगर फौज को अपनी लोकप्रियता पर जरा भी भरोसा है, तो उन्हें वर्दी उतारकर जनता का सामना करना चाहिए। उन्हें अपनी हैसियत पता लगने में जरा भी समय नहीं लगेगा।

रावलकोट के फारुक-ए-आजम चौक पर हजारों प्रदर्शनकारियों की भीड़ को संबोधित करते हुए सरदार खान ने पूरे पाकिस्तान की समस्याओं के लिए नागरिक संगठनों में फौज की उपस्थिति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने नागरिक मामलों में फौज के दबदबे के तुरंत खात्मे की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर वर्दीधारी अधिकारियों को अपने पद और लोकप्रियता का घमंड है, तो उन्हें फौज छोड़कर जनता के सामने आना चाहिए। लोग तुरंत ही उन्हें उनकी हैसियत बता देंगे।

कश्मीर की आबादी का इस्तेमाल हथियार की तरह किया- सरदार खान

JAAC नेता ने भारत की तरफ से दशकों से किए जा रहे दावों को सही साबित किया। उन्होंने पाकिस्तानी फौज पर आरोप लगाया कि अतीत में सेना ने स्थानीय आबादी को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया है। उन्हें मुजाहिदीन बनाने के नाम पर आतंक के दलदल में धकेल दिया गया। खान ने कहा कि आज जब स्थानीय लोग अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं, वह स्कूल, अस्पताल जैसी बुनियादी जरूरतों की मांग कर रहे हैं। तो उन्हें देशद्रोही और उपद्रवी करार देकर गोली मारी जा रही है।

बता दें, पीओके में जारी इस आंदोलन में अभी तक पाकिस्तानी फौज की फायरिंग में करीब तीन दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है।

पूरे पाकिस्तान की समस्या की जड़ नागरिक मामलों पर फौज का दबदबा-खान

JAAC नेता ने सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा से लेकर पंजाब और POK के इलाकों की शिकायतों का एक-एक करके जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सभी इलाकों में परेशानियां हैं। लोग अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पाकिस्तानी चुनावी प्रक्रिया पर कड़े सवाल उठाते हुए खान ने कहा कि पूरा चुनाव एक खास विंग द्वारा करवाया जाता है। यह केवल दिखाता है कि आपकी पसंद का नेता चुना जा रहा है, जबकि अंदर सब धांधली की जा रही होती है। इस विंग का मकसद केवल राजनीतिक ताकत पर अपने दबदबे को बरकरार रखना होता है।

बता दें, वर्तमान में पीओके में जो आंदोलन चल रहा है, वह क्षेत्र की राजनीतिक सीटों को लेकर भी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके प्रशासन में उनकी ही भागीदारी नहीं है। कराची और लाहौर में बैठे लोगों को यहां चुनकर खड़ा कर दिया जाता है।

गरीब टैक्स भरता है, ताकि फौजी अफसर आलीशान जिंदगी जीएँ- खान

पाकिस्तान में आर्थिक असमानता को उजागर करते हुए खान ने फौजी अफसरों और नेताओं को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का दिहाड़ी मजदूर हर चीज पर टैक्स देने के लिए बाध्य है। इस टैक्स के पैसे से ही राजनेता और फौजी अधिकारी अपनी आलीशान जिंदगी जीते हैं। इनकी विदेश यात्राओं का खर्च भी इसी टैक्स के पैसे से निकलता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनरलों और राजनेताओं की राय का अब कोई महत्व नहीं है, और ऐलान किया कि इलाके के भविष्य के शासन को तय करने में आम मजदूर की आवाज ही सबसे ऊपर होनी चाहिए।

अदालतों का मतलब नहीं- खान

पाकिस्तानी न्यायिक व्यवस्था की खामियों को उजागर करते हुए खान ने कहा कि जजों का कोई मतलब नहीं है। यहां की कानून व्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद हो गई है। क्योंकि मोटी तनख्वाह लेने के बाद भी यह जज फौजी अधिकारियों या राजनेताओं के खिलाफ कोई ऐक्शन नहीं ले पाते। जनता को इन तक पहुंचने के लिए काफी मशक्कत करनी पडती है। इसके बाद भी यह आम जनता को नहीं बचा पाते।

आपको बता दें, पाकस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले काफी समय से संघर्ष जारी है। बिजली की दरों से शुरू हुआ यह आंदोलन आज पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुका है। JAAC को पाकिस्तान की सरकार और फौजी अधिकारी आतंकवादी करार देते हैं। हाल ही में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने प्रदर्शनकाकरियों को भारत की तरह दुश्मन करार दिया था। इस आंदोलन में अभी तक तीन दर्जन से ज्यादा लोगों के मारे जाने की खबर है। पाकिस्तान सरकार ने आंदोलनकारियों की ज्यादातर मांगों को स्वीकार कर लिया है। लेकिन राजनैतिक स्थिति में बदलाव को लेकर अभी भी स्थिति बिगड़ी हुई है।