राजेश खन्ना के पूर्व बंगले को ‘भूतिया’ बताने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई रोक

Published on 29 जुल॰ 2026

राजेश खन्ना के पूर्व बंगले को ‘भूतिया’ बताने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई रोक

राजेश खन्ना का मुंबई के बांद्रा में आशीर्वाद नाम से बंगला था. उसके नए मालिक ने बंगले को भूतिया या मनहूस कहने के खिलाफ कोर्ट में केस किया है.

Written By : पीटीआई- भाषा |  Updated at : 29 Jul 2026 10:31 PM (IST)

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Bombay HC Court restrains labeling Rajesh Khanna former bungalow asirvad as haunted राजेश खन्ना के पूर्व बंगले को ‘भूतिया’ बताने पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने लगाई रोक

राजेश खन्ना

Source : IMDB

अपने जमाने के सुपरस्टार एक्टर राजेश खन्ना का बंगला 'आशीर्वाद' एक बार फिर चर्चा में है. बॉम्बे हाई कोर्ट ने मीडिया संगठनों और ऑनलाइन वेबसाइट्स को को बांद्रा स्थित ‘आशीर्वाद’ बंगले को 'शापित', 'भूतिया' या 'मनहूस' बताने से रोक दिया है. ये बंगला एक समय दिवंगत बॉलीवुड सुपरस्टार राजेश खन्ना के स्वामित्व में था. राजेश खन्ना का बंगला मुंबई में है.

न्यायमूर्ति आरिफ एस. डॉक्टर ने 24 जुलाई को पारित एक अंतरिम आदेश में कहा कि इस तरह से कहना पहली नजर में मानहानिकारक हैं. साथ ही याचिकाकर्ता के शांतिपूर्ण एवं सम्मान के साथ जीवन जीने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करते हैं. कुछ साल पहले इस प्रतिष्ठित बंगले को खरीदने वाले कारोबारी शशि शेट्टी ने अदालत का रुख किया था. उन्होंने कहा कि इंटरनेट पर कई लेख, पोस्ट और वीडियो मिले, जिनमें इस संपत्ति को 'भूतिया', 'शापित' और 'अपशकुनी' बताया गया था. इसके बाद से ही कोर्ट में मामला है.

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नए मकान का नाम भी 'आशीर्वाद'

शेट्टी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने अदालत को बताया कि मूल बंगले को गिराकर नया मकान बनाया गया है, लेकिन उसका नाम नहीं बदला गया है. वकील ने कहा कि नया मकान भी ‘आशीर्वाद’ नाम से ही जाना जाता है. याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि मीडिया वेबसाइट ने हाल में ‘19 रियल हॉन्टेड हाउसेस इन इंडिया दैट विल गिव यू ए कोल्ड स्वीट’ शीर्षक से एक लेख प्रकाशित किया था, जिसमें आशीर्वाद बंगले को भी शामिल किया गया था.

न्यायाधीश ने कहा कि मालिक द्वारा अंतरिम राहत का अनुरोध करना 'पूरी तरह उचित' है. अदालत ने अपने आदेश में कहा, 'मेरे प्रथम दृष्टया विचार में यह सामग्री स्पष्ट रूप से याचिकाकर्ता का मानहानि करती है और यह संकेत देती है कि वह एक भूतिया और कथित रूप से शापित बंगले में रहते हैं.'

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उच्च न्यायालय ने कहा कि यह शेट्टी के 'शांतिपूर्ण और सम्मान के साथ जीवन जीने के अधिकार' को भी प्रभावित करती है. अदालत ने ये भी कहा कि किसी भी प्रतिवादी ने अदालत में पेश होकर अपनी प्रकाशित सामग्री का बचाव या औचित्य साबित नहीं किया.

अदालत ने कहा, 'मेरे प्रथम दृष्टया विचार में ऐसी सामग्री पूरी तरह अनुचित है और यह केवल सनसनी फैलाने के उद्देश्य से प्रकाशित की गई प्रतीत होती है, जिससे याचिकाकर्ता को नुकसान हो रहा है, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है.' अदालत द्वारा दी गई अंतरिम राहत अगली सुनवाई 21 अगस्त, 2026 तक जारी रहेगी.

Published at : 29 Jul 2026 10:31 PM (IST)

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