भोपाल, 31 जुलाई 2026: जवान और किसान निश्चित रूप से भारत में दो संवेदनशील नाम है और इनका सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन क्या जवान के नाम पर चौकीदार और किसान के नाम पर जमीदार को उतना ही सम्मान देना चाहिए? भोपाल किसान आंदोलन की सफलता के बाद बाजार में मूंग दाल के दाम दोगुना होने वाले हैं क्योंकि, किसान ने बाजार में सप्लाई बंद कर दी है और व्यापारियों ने जमाखोरी शुरू कर दी है। मतलब एक तो आंदोलन के कारण पब्लिक परेशान हुई और अब आंदोलन की सफलता के कारण पब्लिक परेशान होगी। यहां नोट करना जरूरी है कि मूंग दाल के उत्पादक घाटे में नहीं थे, किसी प्राकृतिक आपदा का शिकार नहीं हुए थे। यह लड़ाई पेट के लिए नहीं प्रॉफिट के लिए थी।
भोपाल में 2 दिन तक चले आंदोलन के बाद मूंग दाल के उत्पादकों की मांग तो पूरी हो गई लेकिन बाजार की हालत पतली हो गई। मूंग दाल के उत्पादकों के कारण सरकार को कम से कम 6000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा और जनता को भी इसका भुगतान करना पड़ेगा। भोपाल की कारों मंडी में मूंग दाल की आवक 167 क्विंटल थी, जो मुख्यमंत्री की 60% वाली घोषणा के बाद मात्र 25 क्विंटल रह गई है। मतलब सिर्फ 24 घंटे के अंदर बाजार में मूंग दाल की आवक में 85% की गिरावट हो गई। सिर्फ इतना ही नहीं है, मंडी में मूंग दाल की नीलामी जो 4 से ₹5000 प्रति क्विंटल के बीच चल रही थी, गुरुवार को बढ़ाकर 5600 से 6800 प्रति क्विंटल के बीच हो गई। मतलब खुले बाजार में, घटिया क्वालिटी की एक क्विंटल पर लगभग ₹2000 बढ़ गए। जबकि अच्छी क्वालिटी की मूंग दाल ₹8000 प्रति क्विंटल पर बिक रही है।
भोपाल मंडी व्यापारी संघ का बयान
करोंद मंडी व्यापारी संघ के प्रवक्ता संजीव जैन ने बताया कि सरकार के फैसले का असर मंडियों में साफ दिखाई देने लगा है। आक्क घटने से भाव बढ़ गए हैं। आने वाले दिनों में इसका असर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। मंडियों से बड़ी मात्रा में मूंग दाल मिलों में जाती है और वहीं से प्रोसेस होकर रिटेल बाजार तक पहुंचती है। ऐसे में यदि आवक कम रही तो मूंग दाल के दाम भी बढ़ सकते हैं। भोपाल से मूंग कर्नाटक, दिल्ली, इंदौर, कटनी और पिपरिया की दाल मिलों में भेजी जाती है। राज्य सरकार इस समय 8768 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मूंग खरीद रही है, जबकि करोंद मंडी में गुरुवार को इसका भाव 5600 से 6800 रुपए प्रति क्विंटल रहा।
रिटेल मार्केट में मूंग दाल की कीमत डबल हो जाएगी
करोंद मंडी व्यापारी संघ के प्रवक्ता संजीव जैन के बयान का सीधा अर्थ होता है कि, किसान 8768 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से 60% दाल सरकार को बेच देगा। बची हुई 40% घटिया दाल खुली मंडी में आएगी। 24 घंटे के भीतर मूंग दाल की कीमत 6800 हो गई है। जैसे-जैसे बाजार में मूंग दाल की कमी होती जाएगी, दाम बढ़ते चले जाएंगे और ₹8000 तक पहुंचाने की संभावना है। मतलब किसान को तो बंपर प्रॉफिट होगा लेकिन, आम जनता के लिए रिटेल मार्केट में मूंग दाल की कीमत डबल हो जाएगी।
भोपाल किसान आंदोलन के कारण जमाखोरी हो गई
मुख्यमंत्री द्वारा की गई 60% की घोषणा के बाद एक तरफ किसानों ने मंडी में मूंग दाल की सप्लाई बंद कर दी है तो दूसरी तरफ व्यापारियों ने भी जमाखोरी शुरू कर दी है। मूंग दाल का उत्पादन करने वाले किसानों के पास अपने वेयरहाउस हैं। वैसे भी मूंग दाल, प्याज की तरह जल्दी खराब नहीं होती। जिन किसानों के पास अपने वेयरहाउस नहीं है, उन्होंने अपने पड़ोसी के वेयर हाउस में मूंग दाल रख दी है। वह बिल्कुल भी जल्दी में नहीं है, क्योंकि उनकी लड़ाई पेट के लिए नहीं प्रॉफिट के लिए थी।
शायद यह बताना भी जरूरी है कि मूंग दाल, भारत में गरीब की थाली का पोषण होता है। तो मूंग के उत्पादक किसानों ने आंदोलन करके भारत के गरीबों की थाली में उनका पोषण आहार महंगा कर दिया।
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