कोर्ट का आदेश भी काफी नहीं! कब और क्यों नहीं हो पाता किसी अवैध विदेशी का डिपोर्टेशन?

Published on 1 अग॰ 2026

कोर्ट का आदेश भी काफी नहीं! कब और क्यों नहीं हो पाता किसी अवैध विदेशी का डिपोर्टेशन?

अवैध विदेशियों का डिपोर्टेशन कब अटक जाता है

भारत में अवैध रुप से रह रहे विदेशी नागरिकों डिपोर्टेशन कैसे किया जाता है. इसको लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि अगर किसी विदेशी नागरिक की राष्ट्रीयता की पुष्टि नहीं हुई है, तो उसे अदालत के आदेश के बाद भी उसके कथित देश में डिपोर्ट किया जा सकता. ऐसा इसलिए क्योंकि बिना संबंधित देश की कंफर्मेशन और स्वीकार्यता के डिपोर्टेशन की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकती.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह जवाब गृह मंत्रालय (MHA) ने राजूबाला दास बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे के बाबत दिया. यह याचिका उन लोगों से जुड़ी है जिन्हें विदेशी घोषित किया गया है, लेकिन उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि नहीं हो सकी है. सुप्रीम कोर्ट ने 21 मार्च 2025 को केंद्र सरकार से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब मांगा था, जिसके बाद यह हलफनामा दाखिल किया गया.

विदेशी नागरिकों का डिपोर्टेशन किस आधार पर होता है?

  • उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि हो जाए
  • उसके पास वैध यात्रा दस्तावेज (पासपोर्ट/ट्रैवेल डॉक्यूमेंट ) हो
  • संबंधित देश उसे अपना नागरिक मानकर वापस लेने को तैयार हो.

भारत में डिपोर्टेशन की प्रक्रिया क्या है?

भारत में विदेशी नागरिकों के प्रवेश, निवास और डिपोर्टेशन से जुड़े मामलों को मुख्य रूप से फॉरेनर्स एक्ट, 1946, Passport Act और केंद्र सरकार के प्रशासनिक दिशा-निर्देश कंट्रोल होते हैं.गृह मंत्रालय के हलफनामे के मुताबिक कोई विदेशी नागरिक वैध पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेज के साथ भारत में पाया जाता है और उसकी सजा या मुकदमा पूरा हो चुका है, तो संबंधित राज्य सरकार, केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन या FRRO उसे उसके देश भेज सकती है.

अगर किसी व्यक्ति के पास कोई वैध यात्रा दस्तावेज नहीं है, तो सबसे पहले उसकी राष्ट्रीयता की पुष्टि करनी पड़ती है. इसके बाद संबंधित देश के दूतावास या उच्चायोग से ट्रैवल डॉक्यूमेंट जारी कराया जाता है. अगर दूतावास या उच्चायोग ट्रैवेल डॉक्यूमेंट देने से मना कर देता या अपने देश का नागरिक मानने से इनकार कर देता है, तो भारत जबर्दस्ती उस नागरिक को उसके देश डिपोर्ट नहीं कर पाएगा.

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राष्ट्रीयता की पुष्टि क्यों जरूरी है?

  • केंद्र सरकार ने कहा कि राष्ट्रीयता तय करना किसी भी देश का संप्रभु अधिकार है.
  • भारत यह तय नहीं कर सकता कि कोई व्यक्ति बांग्लादेश, म्यांमार या किसी अन्य देश का नागरिक है.
  • अगर कोई देश उस व्यक्ति को अपना नागरिक मानने से इनकार कर दे, तो भारत उसे वहां नहीं भेज सकता.

अगर विदेशी नागरिकों की राष्ट्रीयता तय नहीं हो तो क्या होगा?

  • वे फरार हो सकते हैं.
  • राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है.
  • भविष्य में डिपोर्टेशन करना मुश्किल हो सकता है.
  • ऐसे लोगों को खुला छोड़ना सही नहीं
  • इसलिए ऐसे लोगों को निर्धारित होल्डिंग सेंटर में रखा जाता है
  • यहां उनकी आवाजाही सीमित रहती है.

सरकार ने कहा कि राष्ट्रीयता की पुष्टि पूरी तरह संबंधित विदेशी सरकार पर निर्भर करती है.कोई देश जल्दी जवाब दे सकता है. कोई देश महीनों या वर्षों तक जवाब नहीं देता. कई बार संबंधित देश व्यक्ति को अपना नागरिक मानने से ही इनकार कर देता है. आप किसी देश पर उसके नागरिकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि करने के लिए दबाव नहीं बना सकते हैं. उस देश के पास अपने नागरिक को लेकर अपने हिसाब से फैसला लेने का अधिकार है.

क्या ऐसे लोगों को हमेशा हिरासत में रखा जा सकता है?

केंद्र ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट के 2012 के ‘भीम सिंह बनाम भारत संघ’ फैसले का हवाला दिया. उस फैसले के बाद गृह मंत्रालय ने राज्यों को निर्देश दिया था कि अगर कोई विदेशी नागरिक अपनी सजा पूरी कर चुका है, लेकिन राष्ट्रीयता की पुष्टि या ट्रैवल डॉक्यूमेंट न मिलने के कारण उसे डिपोर्ट नहीं किया जा सकता, तो उसे जेल में रखने के बजाय जेल के बाहर बने उपयुक्त होल्डिंग सेंटर में रखा जाए. वहां, उसकी आवाजाही पर निगरानी रखी जाए, लेकिन उसे हमेशा के लिए जेल में नहीं रखा जाए.

हाल के वर्षों में यह मुद्दा क्यों चर्चा में रहा?

हाल के कुछ सालों में विदेशी नागरिकों के डिपोर्टेशन को लेकर अदालत में कई मामले आए हैं. एक मामले में अदालत ने असम सरकार और केंद्र से पूछा था कि विदेशी घोषित लोगों को डिपोर्ट क्यों नहीं किया जा रहा.एक अन्य मामले में अदालत ने कथित बांग्लादेशी नागरिकों को लंबे समय तक हिरासत में रखने पर सवाल उठाया था. पश्चिम बंगाल से कुछ लोगों को कथित रूप से जबरन बांग्लादेश भेजे जाने का मामला भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है.

सचिन धर दुबे

सचिन धर दुबे

सचिन धर दुबे को डिजिटल पत्रकारिता में करीब 7 साल का अनुभव है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 2018 में न्यूज 18 से की. फिर गांव कनेक्शन, ANI, आजतक होते हुए अब TV9 Hindi तक पहुंचे. न्यूज 18 में असाइनमेंट पर कॉपी एडिटर, गांव कनेक्शन में मल्टीमीडिया जर्नलिस्ट, ANI में कंटेंट राइटर और आजतक में सीनियर सब एडिटर पद पर काम किया. सचिन ने कृषि पत्रकारिता में काफी समय बिताया. उनकी राजनीति, विश्व, स्पोर्ट्स, हिस्ट्री ओरिएंटेड विषयों पर लिखने में काफी इंटरेस्ट है. सचिन ने गांव कनेक्शन में रहते हुए ग्राउंड रिपोर्टिंग में भी हाथ आजमाया है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय से Msc इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के रहने वाले हैं.

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