सतलुज विवाद पर जिमी शेरगिल का बड़ा बयान, बोले- ऐसी फिल्में छिपे सच सामने लाती हैं, इसलिए मुश्किल में पड़ती हैं
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Written By:
सोनाली झा
Updated On: Aug 08, 2026 | 11:14 PM IST
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सार
Jimmy Shergill Reaction: ‘सतलुज’ की रिलीज और सेंसरशिप विवाद के बीच जिमी शेरगिल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील ऐतिहासिक दौर पर बनी फिल्में अक्सर मुश्किल में पड़ती हैं।

दिलजीत दोसांझ और जिमी शेरगिल (फोटो सोर्स-सोशल मीडिया)
विस्तार
Jimmy Shergill Reaction Satluj Controversy: फिल्म ‘सतलुज’ की रिलीज को लेकर चल रहे विवाद के बीच अभिनेता जिमी शेरगिल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। फिल्म की रिलीज पर लगी रोक और इसके सेंसरशिप विवाद को लेकर जब उनसे सवाल किया गया, तो अभिनेता ने कहा कि इतिहास के राजनीतिक रूप से संवेदनशील दौर को दिखाने वाली फिल्में अक्सर मुश्किलों में फंस जाती हैं। उनके मुताबिक, ऐसी कहानियां कई बार उन पहलुओं को सामने लाती हैं, जो लंबे समय से छिपे हुए होते हैं और इसी वजह से मामला राजनीतिक रूप से पेचीदा हो जाता है।
जिमी शेरगिल ने कहा कि राजनीति हमेशा होती रही है और आगे भी होती रहेगी, लेकिन संवेदनशील मुद्दों को सामने लाना जरूरी है, क्योंकि इससे किसी घटना या दौर के अलग-अलग पहलुओं पर चर्चा का मौका मिलता है। अभिनेता ने कहा कि जब किसी संवेदनशील मामले के एक पहलू को भी छुआ जाता है, तो उसके साथ जुड़े दूसरे छिपे हुए पहलू भी सामने आने लगते हैं। उनके मुताबिक, यही पूरी प्रक्रिया चीजों को राजनीतिक और जटिल बना देती है।
ZEE5 से हटाई गई थी सतलुज
बता दें कि दिलजीत दोसांझ अभिनीत फिल्म ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा की जिंदगी पर आधारित है। फिल्म को भारत में ZEE5 पर रिलीज किया गया था, लेकिन महज दो दिन बाद इसे प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया। फिल्म काफी लंबे समय तक सेंसरशिप से जुड़ी अड़चनों में फंसी रही थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की ओर से कई बदलाव और कट सुझाए गए थे। इसी वजह से इसकी रिलीज को लेकर लंबे समय तक अनिश्चितता बनी रही।
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माचिस से जुड़ा जिमी का पुराना अनुभव
‘सतलुज’ पर सवाल के दौरान जिमी शेरगिल की फिल्म ‘माचिस’ का भी जिक्र हुआ। साल 1996 में रिलीज हुई गुलजार निर्देशित ‘माचिस’ 1980 के दशक में पंजाब में उग्रवाद और हिंसा के दौर पर आधारित थी। फिल्म में चंद्रचूड़ सिंह, ओम पुरी और तब्बू जैसे कलाकार नजर आए थे। कहानी में राजनीतिक अस्थिरता के बीच आम लोगों की जिंदगी और उनके संघर्ष को दिखाया गया था। जिमी शेरगिल का मानना है कि संवेदनशील राजनीतिक दौर को पर्दे पर उतारना आसान नहीं होता, क्योंकि ऐसी कहानियां कई सवाल खड़े करती हैं और अलग-अलग प्रतिक्रियाओं को जन्म देती हैं।
