जापान की तर्ज पर 'वन विलेज वन प्रोडक्ट' को उत्तर प्रदेश में भी 24 जनवरी 2018 को 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट'(ODOP) की शुरुआत हुई. इसकी सफलता को देखते हुए केंद्र सरकार ने भी इसको अपना लिया, जिसके बाद देश भर में सरकार की ये स्कीम फैल गई.
वाराणसी में भी ODOP के तहत लकड़ी के खिलौना, गुलाबी मीनाकारी और साड़ी उद्योग है. इस योजना के शुरू होने के बाद से ही इन उत्पादों, खासकर साड़ी-सिल्क मटेरियल उद्योग में काफी बढ़ोतरी देखने को मिली है.
वाराणसी का ODOP-CFC जगतपुर में चल रहा है. जिसकी खास बात ये है कि वाराणसी और आसपास के बुनकरों को छोटे-मोटे काम के लिए कहीं और भटकना नहीं पड़ रहा है. वो यही एक ही छत के नीचे अपने बिनाई किए हुए सिल्क मैटेरियल और साड़ियों पर डिजिटल प्रिंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग और डाइंग एवं फिनिशिंग करा पा रहे है.
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एक ही छत के नीचे डिजिटल प्रिंटिंग से फिनिशिंग तक
ODOP-CFC का संचालन करने वाली यहां की निदेशक नमिता भुराड़िया ने खास बातचीत में बताया कि उनके केंद्र में मशीन से काम को आसान और तेज बनाया जाता है. उन्होंने आगे बताया कि यहां डिजिटल प्रिंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग, डाइंग और फिनिशिंग का काम होता है. बुनकर उनके सेंटर तक आते है और यहां मिलने वाली सुविधाओं का फायदा कम दरों में लेते है.
भराड़िया ने ये भी बताया कि दो साल पहले महज 4 कर्मचारियों से शुरू किया गया काम आज 70 से भी ज्यादा से पहुंच गया है और पहले से अब में उन्हें आर्थिक लाभ भी हुआ है.

वहीं ODOP-CFC अपने सिल्क मटेरियल पर काम कराने पहुंचे बुनकर रितेश पाल ने बताया कि इस सेंटर का उनको फायदा मिल रहा है. एक ही छत के नीचे उनके सारे काम हो जाते है और उन्हें भटकना नहीं पड़ रहा है.
आर्थिक रूप से मौजूद हुए कारीगर
यहां से जुड़े कारीगरों की बात करे तो कुलदीप और मनीष बताते है कि यहां काम करने से उनकी माली स्थिति पहले से बेहतर हुई है. वहीं डिजाइनर पकंज सिंह पटेल ने भी बताया कि पढ़ाई के बाद सीधे नौकरी मिल जाने से वो आर्थिक रूप से मजबूत हुए है और यहां का माहौल बहुत अच्छा है.
डिजाइनर प्रिंस गुप्ता ने भी बताया कि एक छत के नीचे काफी कुछ सीखने का मौका मिलता है और यहां नौकरी करके उनकी भी माली स्थिति में सुधार हुआ है.

बुनकर बहुल वाराणसी के लोहता के भट्टी गांव में ODOP के तहत अपनी जकाट मशीन चलाने वाले बुनकर शैलेश सिंह ने बताया कि ODOP के बाद से उद्यमियों को बैंक का पूरा सपोर्ट मिला है. मशीन खरीदने के बाद प्रोडक्शन काफी बढ़ा, जिसका फायदा सिर्फ मुझे नहीं, बल्कि मुझसे जुड़े लोगों को भी मिला है.
'ODOP ने पूरे समाज का भी भला किया'
सुविधाओं के बारे में उन्होंने बताया कि 25% सब्सिडी या ज्यादा से ज्यादा 10 लाख रुपए का प्रॉफिट उनको मिला. उन्होंने कहा कि बनारसी साड़ी और ड्रेस मटेरियल की मार्केटिंग तो खुद ही हो जाती है. आमदनी में बढ़ोतरी के सवाल पर उन्होंने कहा कि आर्थिक स्थिति अच्छी हुई, बैंक से संबंध अच्छे हुए और मुझसे जुड़े लोगों का भी भला हुआ. इस तरह ODOP ने पूरे समाज का भी भला किया.
बुनकर शैलेश की ही फैक्ट्री में काम करने वाले धनंजय सिंह ने बताया कि पहले वो हरियाणा के पानीपत में काम करते थे. लेकिन मूलरूप से फतेहपुर के होने के चलते वाराणसी से घर आना जाना आसान हो जाता है. इसलिए वो पानीपत से वाराणसी आकर मशीनों की देखभाल करने लगे और उनके साथ कुछ और भी मजदूर आ गए. इससे उनकी काफी न सिर्फ बचत हो रही है, बल्कि माली स्थिति भी सुधरी है और बचत किया हुआ रुपया घर के काम आ रहा है. ODOP के लिए वो सरकार का दिल से धन्यवाद देते है.

केंद्र सरकार दे रही सब्सिडी
ODOP के बारे में जानकारी देते हुए वाराणसी के जिला उद्योग प्रोत्साहन और उद्यमिता विकास केंद्र के उद्योग उपायुक्त अभिषेक प्रियदर्शी ने खास बातचीत में बताया कि सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है. जो न सिर्फ राज्य, बल्कि केंद्र सरकार की ओर से चलाई जा रही है. इस योजना के तहत वाराणसी से कुल तीन उत्पाद लिए गए है. पहला है वाराणसी साड़ी, दूसरा है गुलाबी मीनाकारी और तीसरा है लकड़ी का खिलौना.
परंपरागत कारीगर, आर्टिजन और उद्यमी जो सालों से इस काम को करते चले आ रहे है, उनको वित्तीय समावेश में आगे बढ़ाने के लिए ये कार्यक्रम लाया गया है. इसके तहत सरकार कई तरह की सुविधाएं मुहैया करा रही है. पहली सुविधा के तहत सब्सिडीयुक्त लोग दिया जा रहा है, जिसके तहत 25% तक की सब्सिडी दी जा रही है.
अब तक 820 साड़ी व्यवसायियों को ODOP मार्जिन मनी के तहत लोन दिया गया है. अब तक कुल 31 करोड़ तक की सब्सिडी तो 126 करोड़ का लोन दिया गया है. दूसरा घटक ट्रेनिंग का है. पहले से काम कर रहे कारीगरों को 10 दिनों की ट्रेनिंग और टूल किट दिया जाता है. इसके तहत 2500 लोगों को ट्रेनिंग देकर लोन दिया गया और फिर आगे सीएम योजना के तहत लोन देकर आगे बढाने का काम किया जा रहा है.

तीसरा घटक ODOP-CFC है, जिसमें कुल चार तरह के काम होते है- डिजिटल प्रिंटिंग, स्क्रीन प्रिंटिंग, ब्लॉक प्रिंटिंग और डाइंग और फिनिशिंग है. ये सारा काम बाजार रेट से कम दर पर मुहैया कराया जाता है और बुनकर अपना काम करा सकते है. इसको 90% का सरकार ने अनुदान भी दिया है.
बनारसी साड़ी का एक्पोर्ट 5 गुना बढ़ा
चौथा घटक है ODOP-MDA, जिसके तहत प्रोडक्ट की मार्किंटिग का जाती है और 75% तक का स्टॉल का किराया सरकार देती है. एक आदमी के आने जाने का किराया भी सरकार देती और माल ढुलाई का खर्चा भी सरकार देती है. अब तक इसके तहत 3-4 हजार लोगों को सरकार ने देश-विदेश में और प्रदेश में ये सुविधा दी जा रही है. उन्होंने आगे बताया कि बनारसी साड़ी का एक्पोर्ट लगातार बढ़ा है.
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गल्फ वार के चलते थोड़ी दिक्कत जरूर आई है. लेकिन जब से ये योजना शुरू हुई है तभी से 5 गुना एक्सपोर्ट बढ़ा है. इसमें इंटरस्टेट एक्सपोर्ट भी शामिल है. उन्होंने आगे बताया कि हमारा मकसद है कि कारीगरों को उद्यमी, स्माल उद्यमी को माइक्रो उद्यमी बनाए, माइक्रो उद्यमी को मीडियम उद्यमी और मीडियम उद्यमी को बड़ा उद्यमी बनाए. इनको ज्यादा से ज्यादा एक्सपोर्ट में जोड़कर अपना पैसा मजबूत करें.
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