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बारिश के मौसम में बच्चों के साथ जरूर करें ये काम, कोसों दूर रहेगा इंफेक्शन
- Authored by: मोहित तिवारी
- Updated Aug 9, 2026, 10:08 AM IST
Monsoon Skin Care Tips for Kids: बारिश के मौसम में इंफेक्शन का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है। ऐसे में अपने बच्चों को इंफेक्शन से बचाने के लिए आप कुछ उपाय कर सकते हैं।
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बच्चों को इंफेक्शन से कैसे बचाएं
Monsoon Skin Care Tips for Kids: बारिश का मौसम बच्चों को जितना पसंद आता है, उनकी त्वचा के लिए यह मौसम उतनी ही सावधानी मांगता है। लगातार नमी, पसीना, गीले कपड़े, कीचड़ और बारिश का गंदा पानी बच्चों की स्किन पर परेशानी पैदा कर सकता है। खासतौर पर पैर, उंगलियों के बीच की जगह, जांघों के आसपास और शरीर की वे जगहें जहां नमी लंबे समय तक बनी रहती है, वहां खुजली, लाल चकत्ते और फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है।
होम्योपैथिक चिकित्सक अमित मल्होत्रा के अनुसार, बारिश के मौसम में बच्चों को हर समय घर के अंदर रखने के बजाय उनकी रोजमर्रा की साफ-सफाई पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है। बारिश में भीगने के बाद कपड़े बदलना, शरीर को अच्छी तरह सुखाना और पैरों को साफ रखना छोटी आदतें हैं, जो त्वचा से जुड़ी कई परेशानियों का जोखिम कम कर सकती हैं।
बारिश में बच्चों की त्वचा को रखें सूखा
बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है। बच्चे खेलते समय पसीने से भीगते हैं और कई बार बारिश में भीगने के बाद लंबे समय तक गीले कपड़ों में रहते हैं। शरीर पर लगातार नमी बनी रहने से त्वचा में जलन और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बच्चे बारिश में भीग जाएं तो घर पहुंचने के बाद उनके गीले कपड़े तुरंत बदल दें। शरीर को साफ पानी से धोकर मुलायम तौलिये से अच्छी तरह सुखाएं। खासतौर पर बगल, गर्दन, जांघों और पैरों की उंगलियों के बीच नमी नहीं रहने दें।
बाहर से लौटते ही बच्चों के हाथ-पैर साफ कराएं
बारिश के मौसम में सड़क और आसपास जमा पानी में मिट्टी, गंदगी और दूसरे प्रदूषक मिल सकते हैं। बच्चे बाहर खेलने के बाद जब घर लौटते हैं तो उनके हाथ-पैर पर यह गंदगी लगी रह सकती है। बाहर से आने के बाद बच्चों के हाथ और पैर साबुन व साफ पानी से धोना रोज की आदत बनाएं। हाथों की सफाई खाने से पहले भी जरूरी है। पैरों को धोने के बाद उन्हें पूरी तरह सुखाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पैरों की उंगलियों के बीच नमी न रहने दें
बरसात में बच्चों के पैरों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। गीले जूते-मोजे पहनने या बारिश के पानी में चलने के बाद पैरों की उंगलियों के बीच नमी बनी रह सकती है। बच्चे बारिश में भीग जाएं तो उनके मोजे और जूते बदल दें। पैरों को साफ पानी से धोकर उंगलियों के बीच की जगह को भी अच्छी तरह सुखाएं। जूते पूरी तरह सूखने के बाद ही दोबारा पहनाएं। अगर पैरों में लगातार खुजली, सफेद पड़ती त्वचा, छिलना या लालिमा दिखाई दे तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें।
गीले और पसीने वाले कपड़ों में बच्चों को ज्यादा देर न रखें
बारिश में भीगने के अलावा पसीने से भी बच्चों के कपड़े गीले हो सकते हैं। गीले कपड़े लंबे समय तक शरीर से चिपके रहने पर त्वचा में घर्षण और जलन बढ़ सकती है। बच्चों को मौसम के अनुसार ढीले और आरामदायक कपड़े पहनाएं। सूती कपड़े त्वचा पर अपेक्षाकृत आरामदायक रहते हैं और पसीना होने पर कपड़े बदलना बेहतर रहता है।
बच्चों के नाखून छोटे रखें
बच्चों को खुजली होने पर वे बार-बार त्वचा खुजा सकते हैं। नाखून बड़े होने पर उनके नीचे गंदगी जमा हो सकती है और खुजलाने के दौरान त्वचा पर खरोंच लगने का खतरा भी बढ़ जाता है। बारिश के मौसम में बच्चों के नाखून नियमित रूप से काटकर छोटे रखें। हाथों की सफाई के साथ नाखूनों के नीचे जमा गंदगी पर भी ध्यान दें।
बारिश के जमा पानी और कीचड़ से बचाएं
बच्चों को बारिश में खेलना पसंद होता है, लेकिन जमा हुए गंदे पानी और कीचड़ में खेलने की आदत त्वचा के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। खासकर जब पैरों पर पहले से कोई कट, खरोंच या त्वचा की समस्या हो। बाहर खेलते समय बच्चों को साफ और सुरक्षित जगह पर खेलने दें। अगर पैर गंदे या कीचड़ से भर जाएं तो घर लौटने के बाद उन्हें साफ पानी से धोकर अच्छी तरह सुखाएं।
हर रैश पर एंटीफंगल क्रीम न लगाएं
बारिश के मौसम में त्वचा पर लाल दाने या खुजली दिखाई देने पर कई लोग तुरंत एंटीफंगल क्रीम या पाउडर इस्तेमाल करना शुरू कर देते हैं। बच्चों की त्वचा पर ऐसा बिना डॉक्टर की सलाह के करना सही नहीं है। हर लाल चकत्ता फंगल इंफेक्शन नहीं होता। रैश का कारण एलर्जी, घर्षण, गर्मी या कोई दूसरी त्वचा संबंधी समस्या भी हो सकती है। किसी दवा या एंटीफंगल उत्पाद का इस्तेमाल बच्चे की उम्र और त्वचा की स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह से करना बेहतर है।
बच्चों को बहुत भारी क्रीम लगाने से बचें
बारिश के मौसम में त्वचा पर चिपचिपाहट और पसीना पहले से ज्यादा हो सकता है। ऐसे में जरूरत से ज्यादा भारी या तैलीय क्रीम लगाने से त्वचा पर चिपचिपापन बढ़ सकता है। अगर बच्चे की त्वचा रूखी है तो उसकी त्वचा के अनुरूप हल्का मॉइश्चराइजर इस्तेमाल किया जा सकता है। किसी नए प्रोडक्ट को पूरे शरीर पर लगाने से पहले उसकी उपयुक्तता को लेकर डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है, खासकर छोटे बच्चों के मामले में।
बच्चों के खाने-पीने पर भी रखें ध्यान
बारिश के मौसम में बच्चों को साफ पानी और ताजा भोजन देना जरूरी है। घर का बना ताजा और गर्म खाना उनकी रोज की डाइट का हिस्सा होना चाहिए। बच्चों को मौसमी फल और सब्जियां दें। विटामिन और दूसरे पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार शरीर की सामान्य प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में मदद करता है। केवल किसी एक फल या विटामिन को इंफेक्शन से बचाव की गारंटी मानना सही नहीं है।
त्वचा पर ये बदलाव दिखें तो डॉक्टर को दिखाएं
अगर बच्चे की त्वचा पर हल्का रैश कुछ समय में ठीक हो जाए तो सामान्य देखभाल के साथ उस पर नजर रखी जा सकती है। लगातार बढ़ती लालिमा, तेज खुजली, त्वचा का छिलना, दर्द, सूजन, पस वाले दाने या बार-बार लौटने वाले रैश को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर जब त्वचा की समस्या फैल रही हो या बच्चा लगातार खुजली के कारण परेशान हो रहा हो, तब बाल रोग विशेषज्ञ या त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
बारिश में बच्चों के लिए सबसे जरूरी आदत क्या है
बरसात में बच्चों को इंफेक्शन से बचाने के लिए किसी एक उपाय पर निर्भर रहने के बजाय साफ-सफाई और त्वचा को सूखा रखने की आदत सबसे अहम है। बाहर से आने के बाद हाथ-पैर धोना, बारिश में भीगने पर कपड़े बदलना, पैरों की उंगलियों के बीच नमी साफ करना और गंदे पानी से दूरी बनाए रखना रोजमर्रा की ऐसी सावधानियां हैं जिनसे त्वचा संबंधी परेशानियों का जोखिम कम किया जा सकता है। बच्चे बारिश में खेलें, मौसम का आनंद लें, लेकिन गीले कपड़ों, गंदे पानी और लगातार नमी को लंबे समय तक शरीर पर रहने न दें। यही छोटी-छोटी सावधानियां बरसात में बच्चों की त्वचा को स्वस्थ रखने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी होम्योपैथिक चिकित्सक द्वारा दी गई सलाह पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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मोहित तिवारीauthor
मोहित तिवारी को पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 साल का अनुभव है। इन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में फील्ड रिपोर्टिंग से की थी। मोहित ने प्रिंट, टीवी और डिजिटल तीनों प्लेटफॉर्म पर काम किया है। देश-विदेश, लाइफस्टाइल, धर्म और आध्यात्मिक विषयों में गहरी रुचि रखने वाले मोहित ने ज्योतिष का भी व्यापक अध्ययन किया है। मोहित के आलेख लाइफस्टाइल, हेल्थ, न्यूज, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर गहरी शोध और प्रामाणिकता पर आधारित होते हैं और इन विषयों पर वह 12,000 से अधिक आर्टिकल लिख चुके हैं।
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