Shekhupur Assembly Caste Equations में यादव, मुस्लिम और शाक्य मतदाता चुनावी राजनीति की तीन सबसे महत्वपूर्ण धुरियां हैं। इनके साथ अनुसूचित जाति, मौर्य, ब्राह्मण, ठाकुर और दूसरे गैर-यादव OBC समुदाय सीट का राजनीतिक संतुलन तय करते हैं। मुस्लिम आबादी की हिस्सेदारी करीब 27.90 प्रतिशत और अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी लगभग 17.37 प्रतिशत बताई जाती है, जबकि यादव यहां सबसे बड़ा OBC समुदाय माना जाता है। 2026 की अंतिम मतदाता सूची में शेखूपुर विधानसभा में 3,50,557 मतदाता हैं। इनमें 1,94,203 पुरुष, 1,56,348 महिला और 6 थर्ड जेंडर मतदाता शामिल हैं।
उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के जातिगत समीकरण / जातीय समीकरण और ‘सोशल इंजीनियरिंग’ पर चुनावी परिणाम काफी हद तक निर्भर करता है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों की मानें तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 एक ऐसा निर्णायक अवसर है जो राज्य की दीर्घकालिक राजनीतिक दिशा को स्पष्ट करेगा।
उत्तर प्रदेश एसआईआर (SIR) की अंतिम सूची 2026 के तहत राज्य के सभी 75 जिलों में विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप कुल मतदाताओं की संख्या में कमी दर्ज की गई है।
बदायूं जिले के शेखूपुर विधानसभा के 2012 से 2022 तक का तुलनात्मक विश्लेषण, ताज़ा अपडेट, चुनावी इतिहास और पिछले चुनावों के नतीजे
उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों का 2007 से 2022 तक तुलनात्मक विश्लेषण, जिसमें प्रत्येक सीट का चुनावी इतिहास, विजेता और उपविजेता प्रत्याशी, मत प्रतिशत, जीत का अंतर और बदलते राजनीतिक समीकरण शामिल हैं।
शेखूपुर विधानसभा संख्या 116 सामान्य यानी अनारक्षित सीट है। प्रशासनिक रूप से यह बदायूं जिले में आती है, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिहाज से आंवला संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। परिसीमन के बाद 2008 में यह नई विधानसभा अस्तित्व में आई और यहां पहला विधानसभा चुनाव 2012 में हुआ। मौजूदा विधायक समाजवादी पार्टी के हिमांशु यादव हैं, जिन्होंने 2022 में भाजपा के धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य को केवल 6,100 वोट से हराया था।
शेखूपुर विधानसभा एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| विधानसभा | शेखूपुर |
| विधानसभा संख्या | 116 |
| जिला | बदायूं |
| लोकसभा क्षेत्र | आंवला |
| आरक्षण स्थिति | सामान्य |
| वर्तमान विधायक | हिमांशु यादव |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| 2026 कुल मतदाता | 3,50,557 |
| पुरुष मतदाता | 1,94,203 |
| महिला मतदाता | 1,56,348 |
| थर्ड जेंडर | 6 |
| 2022 विजेता | हिमांशु यादव, SP |
| 2022 उपविजेता | धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य, BJP |
| 2022 जीत का अंतर | 6,100 वोट |
| 2024 लोकसभा में SP वोट | 1,04,751 |
| 2024 लोकसभा में BJP वोट | 89,640 |
| 2024 SP बढ़त | 15,111 वोट |
| मुस्लिम आबादी | करीब 27.90% |
| अनुसूचित जाति | करीब 17.37% |
| ग्रामीण आबादी | करीब 90.23% |
| प्रमुख सामाजिक समूह | यादव, मुस्लिम, शाक्य, SC, मौर्य, ब्राह्मण, ठाकुर |
शेखूपुर की खासियत यह है कि सीट बनने के बाद किसी भी दल ने लगातार दो विधानसभा चुनाव नहीं जीते। 2012 में सपा, 2017 में भाजपा और 2022 में फिर सपा जीती। यही बदलता रुझान 2027 के चुनाव को खास बनाता है।
Shekhupur Assembly Caste Equations में सबसे बड़ा राजनीतिक आधार यादव और मुस्लिम मतदाताओं का दिखाई देता है। यादव को सीट का सबसे बड़ा OBC समुदाय माना जाता है, जबकि मुस्लिम आबादी लगभग 27.90 प्रतिशत है। अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 17.37 प्रतिशत है। इसके अलावा शाक्य, मौर्य, ब्राह्मण और ठाकुर समुदाय भी अच्छी संख्या में मौजूद हैं।
यहां एक महत्वपूर्ण सावधानी जरूरी है। निर्वाचन आयोग विधानसभा स्तर पर यादव, मुस्लिम, शाक्य, मौर्य, ब्राह्मण या ठाकुर मतदाताओं की जाति-वार आधिकारिक संख्या प्रकाशित नहीं करता। इसलिए जातीय प्रतिशत और संख्या को चुनावी तथा सामाजिक अनुमान के रूप में ही देखा जाना चाहिए। 2026 की आधिकारिक मतदाता सूची का कुल आंकड़ा 3,50,557 है।
शेखूपुर विधानसभा का संकेतात्मक जातीय समीकरण
| जाति/समुदाय | संकेतात्मक स्थिति | 2027 में महत्व |
| यादव | सबसे बड़ा OBC समुदाय | SP की सबसे मजबूत सामाजिक धुरी |
| मुस्लिम | करीब 27.90% | बड़ा स्वतंत्र वोट ब्लॉक |
| अनुसूचित जाति | करीब 17.37% | BJP-SP-BSP तीनों के लिए निर्णायक |
| शाक्य | प्रमुख गैर-यादव OBC | BJP की मजबूत सामाजिक ताकत |
| मौर्य | प्रभावशाली गैर-यादव OBC | 2027 में बड़ा स्विंग फैक्टर |
| ब्राह्मण | महत्वपूर्ण सवर्ण समूह | BJP समेत प्रमुख दलों के लिए अहम |
| ठाकुर/राजपूत | प्रभावशाली सवर्ण मतदाता | करीबी मुकाबले में महत्वपूर्ण |
| अन्य OBC | गांव और बूथ के अनुसार प्रभाव | चुनावी अंतर बदल सकते हैं |
| 2026 कुल मतदाता | 3,50,557 | — |
शेखूपुर में केवल यादव-मुस्लिम समीकरण को देखकर चुनावी परिणाम का अनुमान लगाना पर्याप्त नहीं है। 2017 में भाजपा ने शाक्य प्रत्याशी के साथ सीट जीती थी, जबकि 2022 में सपा के यादव उम्मीदवार ने उसे वापस हासिल किया। दोनों चुनावों में बसपा को भी बड़ी संख्या में वोट मिले। इससे साफ है कि गैर-यादव OBC, दलित और तीसरे दल का वोट यहां बेहद महत्वपूर्ण है।
यादव मतदाता SP की सबसे मजबूत राजनीतिक धुरी
शेखूपुर में यादव मतदाता सबसे बड़ा OBC समुदाय माने जाते हैं। सीट के गठन के बाद हुए तीन विधानसभा चुनावों में सपा ने हर बार यादव प्रत्याशी पर भरोसा किया और दो चुनाव जीतने में सफल रही।
2012 में सपा के आशीष यादव को 68,533 वोट मिले और उन्होंने कांग्रेस के भगवान सिंह शाक्य को 8,252 वोट से हराया।
2017 में आशीष यादव को 70,316 वोट मिले, लेकिन भाजपा के धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य 93,702 वोट लेकर चुनाव जीत गए।
2022 में सपा ने हिमांशु यादव को प्रत्याशी बनाया और पार्टी का वोट बढ़कर 1,05,531 पहुंच गया। उन्होंने भाजपा को 6,100 मत से हराया।
शेखूपुर में SP का विधानसभा प्रदर्शन
| चुनाव | SP प्रत्याशी | वोट | नतीजा |
| 2012 | आशीष यादव | 68,533 | जीत |
| 2017 | आशीष यादव | 70,316 | हार |
| 2022 | हिमांशु यादव | 1,05,531 | जीत |
2017 से 2022 के बीच सपा ने करीब 35 हजार अतिरिक्त वोट जोड़े। यही बढ़ोतरी उसे भाजपा से सीट वापस दिलाने में निर्णायक साबित हुई।
लेकिन 2017 का परिणाम यह भी बताता है कि यादव मतदाता बड़ी संख्या में होने के बावजूद सपा की जीत निश्चित नहीं होती। गैर-यादव OBC और अन्य सामाजिक समूह यदि भाजपा के साथ मजबूत रूप से लामबंद होते हैं तो मुकाबला पलट सकता है।
मुस्लिम वोट करीब 27.90 प्रतिशत, लेकिन BSP भी रही बड़ी दावेदार
शेखूपुर में मुस्लिम आबादी करीब 27.90 प्रतिशत बताई जाती है। लगभग तीन में से एक के करीब इस सामाजिक हिस्सेदारी के कारण मुस्लिम वोट किसी भी प्रत्याशी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
हालांकि मुस्लिम वोट को सीधे समाजवादी पार्टी के खाते में जोड़ देना सही नहीं होगा। पिछले तीन चुनावों में बसपा के प्रदर्शन से यह स्पष्ट होता है।
2012 में बसपा के काजी मोहम्मद रिजवान को 51,979 वोट मिले।
2017 में मोहम्मद रिजवान का वोट बढ़कर 64,327 हो गया।
2022 में बसपा के मुस्लिम खान को 34,932 वोट मिले।
शेखूपुर में BSP का प्रदर्शन
| वर्ष | प्रत्याशी | वोट | स्थिति |
| 2012 | काजी मोहम्मद रिजवान | 51,979 | तीसरा |
| 2017 | मोहम्मद रिजवान | 64,327 | तीसरा |
| 2022 | मुस्लिम खान | 34,932 | तीसरा |
2017 में सपा को 70,316 और बसपा को 64,327 वोट मिले थे। दोनों विपक्षी दलों के बीच केवल करीब छह हजार वोट का अंतर था, जबकि भाजपा 93,702 वोट लेकर सीट जीत गई।
2027 में भी मुस्लिम वोट का सपा और बसपा या किसी दूसरे मुस्लिम प्रत्याशी के बीच बंटवारा भाजपा के लिए सबसे बड़ा अवसर बन सकता है।
इसके विपरीत मुस्लिम मतदाताओं का बड़ा हिस्सा एक ही मजबूत विपक्षी प्रत्याशी के पीछे केंद्रित होता है तो भाजपा के लिए यादव-मुस्लिम सामाजिक आधार का मुकाबला कठिन हो सकता है।
शाक्य वोट BJP की सबसे मजबूत काट
शेखूपुर में शाक्य समाज गैर-यादव OBC की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकतों में है। सीट के शुरुआती तीनों विधानसभा चुनावों में शाक्य नेतृत्व लगातार मुख्य मुकाबले में रहा है।
2012 में कांग्रेस ने भगवान सिंह शाक्य को उम्मीदवार बनाया था। उन्हें 60,281 वोट मिले और वह सपा से सिर्फ 8,252 वोट पीछे रहे।
2017 में भाजपा ने धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य को टिकट दिया। उन्हें 93,702 वोट मिले और उन्होंने सपा को 23,386 वोट से हराया।
2022 में धर्मेंद्र शाक्य ने फिर भाजपा से चुनाव लड़ा और वोट बढ़कर 99,431 हो गए, लेकिन इस बार सपा 6,100 वोट आगे निकल गई।
प्रमुख शाक्य प्रत्याशियों का प्रदर्शन
| वर्ष | प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
| 2012 | भगवान सिंह शाक्य | कांग्रेस | 60,281 |
| 2017 | धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य | BJP | 93,702 |
| 2022 | धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य | BJP | 99,431 |
इन आंकड़ों से शाक्य समाज के राजनीतिक महत्व का संकेत मिलता है, हालांकि किसी उम्मीदवार को मिले पूरे वोट को उसकी जाति का वोट नहीं माना जा सकता।
2027 में भाजपा की रणनीति के लिए शाक्य समर्थन बनाए रखना बहुत जरूरी होगा। सपा यदि इस समुदाय में सेंध लगाने में सफल होती है तो उसका यादव-मुस्लिम आधार और मजबूत हो सकता है।
मौर्य वोट 2027 में क्यों बन सकता है बड़ा फैक्टर?
शेखूपुर में मौर्य मतदाता भी महत्वपूर्ण गैर-यादव OBC समूहों में शामिल हैं। 2026 में सपा की राजनीतिक रणनीति से जुड़ी चर्चाओं में यादव, मुस्लिम और मौर्य सामाजिक समीकरण का खास तौर पर उल्लेख हुआ है।
मौर्य राजनीति का महत्व 2024 लोकसभा चुनाव के बाद और बढ़ गया। आंवला लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी ने नीरज मौर्य को उम्मीदवार बनाया। शेखूपुर विधानसभा खंड में उन्हें 1,04,751 वोट मिले, जबकि भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप को 89,640 वोट मिले। सपा इस विधानसभा खंड से 15,111 वोट आगे रही।
इस परिणाम को सीधे मौर्य मतदाताओं का पार्टीवार मतदान नहीं माना जा सकता, लेकिन यह जरूर संकेत देता है कि सपा यादव-मुस्लिम आधार से बाहर गैर-यादव OBC मतदाताओं तक पहुंच बनाने की स्थिति में शेखूपुर में अपना समीकरण मजबूत कर सकती है।
भाजपा के लिए शाक्य के साथ मौर्य और दूसरे गैर-यादव OBC मतदाताओं को अपने सामाजिक गठजोड़ में बनाए रखना जरूरी होगा।
अनुसूचित जाति के 17.37 प्रतिशत वोट पर तीनों दलों की नजर
शेखूपुर में अनुसूचित जाति की हिस्सेदारी करीब 17.37 प्रतिशत है। करीब छठे हिस्से के बराबर यह सामाजिक आधार भाजपा, सपा और बसपा तीनों की रणनीति में महत्वपूर्ण है।
बसपा के पास परंपरागत दलित आधार होने के कारण यह सीट उसके लिए सामाजिक रूप से संभावनाओं वाली है। लेकिन पार्टी ने पिछले तीन चुनावों में मुस्लिम प्रत्याशियों पर भी भरोसा किया और दलित-मुस्लिम गठजोड़ बनाने की कोशिश की।
2022 में बसपा को 34,932 वोट मिले, जबकि सपा की जीत का अंतर सिर्फ 6,100 था। यानी बसपा का वोट जीत के अंतर से लगभग छह गुना था।
यदि 2027 में बसपा अपने दलित वोट के साथ मुस्लिम या किसी प्रभावशाली OBC समूह का समर्थन जोड़ती है तो वह मुख्य मुकाबले का गणित बदल सकती है।
अगर बसपा का वोट और कमजोर होता है तो सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह रहेगा कि उसके पुराने दलित और मुस्लिम समर्थकों का बड़ा हिस्सा सपा या भाजपा में किस तरफ जाता है।
ब्राह्मण और ठाकुर वोट भी करीबी चुनाव में महत्वपूर्ण
शेखूपुर के सामाजिक प्रोफाइल में ब्राह्मण और ठाकुर समुदाय भी उल्लेखनीय संख्या वाले समूहों में शामिल हैं। इनकी कोई आधिकारिक जाति-वार विधानसभा संख्या उपलब्ध नहीं है।
2017 में भाजपा को मिली 23,386 वोट की जीत और 2022 में सिर्फ 6,100 वोट की हार बताती है कि पार्टी का चुनावी आधार केवल शाक्य मतदाताओं तक सीमित नहीं हो सकता।
भाजपा के लिए शाक्य और दूसरे गैर-यादव OBC के साथ ब्राह्मण-ठाकुर तथा दलित मतों का हिस्सा जोड़ना जरूरी है।
सपा के लिए चुनौती होगी कि यादव-मुस्लिम गठजोड़ के साथ सवर्ण और गैर-यादव OBC समूहों में इतना समर्थन हासिल करे कि भाजपा के व्यापक गठजोड़ को कमजोर किया जा सके।
शेखूपुर वोटर लिस्ट 2026: कुल 3,50,557 मतदाता
2026 की अंतिम मतदाता सूची के अनुसार शेखूपुर विधानसभा में 3,50,557 मतदाता दर्ज हैं। इनमें 1,94,203 पुरुष, 1,56,348 महिला और 6 थर्ड जेंडर मतदाता हैं। बदायूं जिले की सभी छह विधानसभा सीटों को मिलाकर कुल 20,28,328 मतदाता दर्ज हैं।
बदायूं जिले की विधानसभा-वार वोटर लिस्ट 2026
| विधानसभा | पुरुष | महिला | थर्ड जेंडर | कुल |
| बिसौली | 1,97,298 | 1,61,090 | 24 | 3,58,412 |
| सहसवान | 2,01,027 | 1,62,838 | 13 | 3,63,878 |
| बिल्सी | 1,65,629 | 1,34,459 | 6 | 3,00,094 |
| बदायूं | 1,70,568 | 1,42,130 | 4 | 3,12,702 |
| शेखूपुर | 1,94,203 | 1,56,348 | 6 | 3,50,557 |
| दातागंज | 1,95,244 | 1,47,428 | 13 | 3,42,685 |
| जिला कुल | 11,23,969 | 9,04,293 | 66 | 20,28,328 |
2026 की नई सूची के कारण 2022 और 2024 के पुराने बूथवार चुनावी आंकड़ों को सीधे 2027 पर लागू करना उचित नहीं होगा। दलों को नई मतदाता सूची के अनुसार मजबूत और कमजोर बूथों का दोबारा आकलन करना होगा।
SIR के बाद शेखूपुर में करीब 58.64 हजार मतदाताओं की नेट कमी
2026 के विधानसभा-वार SIR सारांश में शेखूपुर के मतदाता आधार में करीब 58.64 हजार की नेट कमी दर्ज की गई, जो संबंधित पूर्व सूची के मुकाबले लगभग 14.33 प्रतिशत है।
वहीं 2024 लोकसभा चुनाव के समय शेखूपुर में 4,04,905 मतदाता थे और 2026 अंतिम सूची में 3,50,557 मतदाता हैं। इस तुलना में 54,348 की नेट कमी, लगभग 13.4 प्रतिशत, दिखाई देती है। दोनों तुलना अलग-अलग आधार तिथियों की हैं, इसलिए आंकड़ों में अंतर स्वाभाविक है।
शेखूपुर विधानसभा में मतदाताओं का ट्रेंड
| वर्ष | कुल मतदाता |
| 2012 | 3,33,673 |
| 2017 | 3,77,662 |
| 2019 लोकसभा | 3,89,555 |
| 2022 विधानसभा | 4,03,347 |
| 2024 लोकसभा | 4,04,905 |
| 2026 SIR | 3,50,557 |
2012 से 2024 तक शेखूपुर का मतदाता आधार लगातार बढ़ा था। 2026 में यह रुझान पहली बार बड़े स्तर पर उलटा दिखाई देता है।
मतदाता सूची में हुई कमी को किसी विशेष जाति, धर्म या राजनीतिक दल से जोड़ना उचित नहीं होगा। इसका चुनावी महत्व केवल इतना है कि 2027 के लिए पुराने यादव, मुस्लिम, शाक्य, दलित और मौर्य प्रभाव वाले बूथों की वास्तविक मतदाता संख्या दोबारा जांचनी होगी।
2022 में SP सिर्फ 6,100 वोट से जीती शेखूपुर
2022 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के हिमांशु यादव ने 1,05,531 वोट हासिल किए। भाजपा के धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य को 99,431 और बसपा के मुस्लिम खान को 34,932 वोट मिले। सपा की जीत सिर्फ 6,100 मतों की रही।
शेखूपुर विधानसभा चुनाव 2022
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट शेयर |
| हिमांशु यादव | SP | 1,05,531 | 42.84% |
| धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य | BJP | 99,431 | 40.36% |
| मुस्लिम खान | BSP | 34,932 | 14.18% |
| NOTA | — | 1,773 | 0.72% |
| ममता देवी | कांग्रेस | 1,454 | 0.59% |
| अवनेश कुमार | ASP(KR) | 857 | 0.35% |
| SP की जीत | — | 6,100 वोट | — |
सपा और भाजपा के वोट शेयर में केवल 2.48 प्रतिशत अंक का अंतर रहा। यह शेखूपुर को 2027 में भी प्रतिस्पर्धी सीटों में रखता है।
बसपा के करीब 35 हजार वोट इस मुकाबले का बड़ा तीसरा कोण थे। यदि इनमें थोड़ा भी बड़ा बदलाव होता है तो भाजपा और सपा दोनों की स्थिति प्रभावित हो सकती है।
2017 में BJP ने 23,386 वोट से जीती थी सीट
2017 में भाजपा के धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य ने 93,702 वोट हासिल कर सपा के आशीष यादव को 23,386 वोट से हराया था। सपा को 70,316 और बसपा के मोहम्मद रिजवान को 64,327 मत मिले।
शेखूपुर विधानसभा चुनाव 2017
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट | वोट शेयर |
| धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य | BJP | 93,702 | 39.72% |
| आशीष यादव | SP | 70,316 | 29.81% |
| मोहम्मद रिजवान | BSP | 64,327 | 27.27% |
| NOTA | — | 1,896 | 0.80% |
| BJP की जीत | — | 23,386 वोट | — |
इस चुनाव का सबसे बड़ा राजनीतिक संकेत सपा और बसपा के बीच लगभग बराबर मजबूत विपक्षी वोट था। दोनों को मिलाकर करीब 1.35 लाख वोट मिले, लेकिन चुनाव अलग-अलग दल लड़ रहे थे और भाजपा 39.72 प्रतिशत वोट के साथ सीट जीत गई।
यही कारण है कि शेखूपुर में विपक्षी मतों का बंटवारा आज भी भाजपा की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
2012 में पहले चुनाव में SP ने सिर्फ 8,252 वोट से दर्ज की जीत
2008 के परिसीमन के बाद शेखूपुर सीट बनी और यहां पहला विधानसभा चुनाव 2012 में हुआ। समाजवादी पार्टी के आशीष यादव को 68,533 वोट, कांग्रेस के भगवान सिंह शाक्य को 60,281 और बसपा के काजी मोहम्मद रिजवान को 51,979 वोट मिले।
शेखूपुर विधानसभा चुनाव 2012
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
| आशीष यादव | SP | 68,533 |
| भगवान सिंह शाक्य | कांग्रेस | 60,281 |
| काजी मोहम्मद रिजवान | BSP | 51,979 |
| मुस्लिम खान | पीस पार्टी | 11,150 |
| पूजा कश्यप | जनक्रांति पार्टी | 4,344 |
| जितेंद्र कुमार कश्यप | BJP | 3,000 |
| SP की जीत | — | 8,252 वोट |
2012 में भाजपा को केवल 3,000 वोट मिले थे। पांच साल बाद यही पार्टी 93,702 वोट लेकर चुनाव जीत गई। यह शेखूपुर के इतिहास का सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव रहा।
2007 का शेखूपुर परिणाम क्यों नहीं है?
वर्तमान शेखूपुर विधानसभा 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी। इससे पहले क्षेत्र का बड़ा हिस्सा उसहैत और आसपास की पुरानी विधानसभा सीमाओं में शामिल था। वर्तमान शेखूपुर सीट पर पहला विधानसभा चुनाव 2012 में हुआ। इसलिए मौजूदा सीमा के लिए कोई सीधे तुलनीय 2007 शेखूपुर विधानसभा परिणाम नहीं है।
इस सीट के चुनावी इतिहास का तुलनात्मक विश्लेषण 2012 से करना अधिक तथ्यात्मक है।
शेखूपुर विधानसभा चुनाव 2012-2022 का तुलनात्मक इतिहास
| वर्ष | विजेता | पार्टी | वोट | उपविजेता | अंतर |
| 2012 | आशीष यादव | SP | 68,533 | भगवान सिंह शाक्य, INC | 8,252 |
| 2017 | धर्मेंद्र कुमार सिंह शाक्य | BJP | 93,702 | आशीष यादव, SP | 23,386 |
| 2022 | हिमांशु यादव | SP | 1,05,531 | धर्मेंद्र सिंह शाक्य, BJP | 6,100 |
तीन चुनावों में सपा ने दो और भाजपा ने एक बार जीत हासिल की है। लेकिन इससे भी महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि हर चुनाव में विजेता पार्टी बदली है—2012 SP, 2017 BJP और 2022 फिर SP।
यह बदलता पैटर्न 2027 में भाजपा के लिए वापसी और सपा के लिए पहली बार लगातार दूसरी जीत हासिल करने की चुनौती पैदा करता है।
2024 लोकसभा चुनाव में SP को 15,111 वोट की बढ़त
2024 लोकसभा चुनाव शेखूपुर में समाजवादी पार्टी के लिए सकारात्मक संकेत लेकर आया। आंवला से सपा प्रत्याशी नीरज मौर्य को शेखूपुर विधानसभा खंड में 1,04,751 वोट, जबकि भाजपा के धर्मेंद्र कश्यप को 89,640 वोट मिले। सपा की बढ़त 15,111 वोट रही।
शेखूपुर विधानसभा खंड: लोकसभा चुनाव 2024
| प्रत्याशी/पार्टी | वोट |
| नीरज मौर्य – SP | 1,04,751 |
| धर्मेंद्र कश्यप – BJP | 89,640 |
| SP की बढ़त | 15,111 |
पूरे आंवला लोकसभा क्षेत्र में भी सपा ने भाजपा को हराया। सपा को 4,92,515 और भाजपा को 4,76,546 वोट मिले तथा जीत का अंतर 15,969 रहा।
दिलचस्प बात यह है कि पूरे संसदीय क्षेत्र में सपा की कुल जीत का अंतर लगभग उतना ही था जितना उसे अकेले शेखूपुर विधानसभा खंड में बढ़त मिली। इससे लोकसभा चुनाव में शेखूपुर की भूमिका का महत्व समझा जा सकता है।
लोकसभा चुनावों में भी बार-बार बदला रुझान
शेखूपुर का लोकसभा मतदान विधानसभा की तरह ही बदलता रहा है।
2009 में सपा ने बसपा पर 4,498 वोट की बढ़त बनाई।
2014 में भाजपा ने सपा को 8,473 वोट से पीछे छोड़ा।
2019 में सपा-बसपा गठबंधन के दौरान बसपा प्रत्याशी इस विधानसभा खंड में भाजपा से 9,965 वोट आगे रही।
2024 में सपा ने भाजपा पर 15,111 वोट की बढ़त बनाई।
शेखूपुर में लोकसभा चुनाव का ट्रेंड
| लोकसभा चुनाव | विधानसभा खंड का रुझान |
| 2009 | SP +4,498 |
| 2014 | BJP +8,473 |
| 2019 | BSP +9,965 |
| 2024 | SP +15,111 |
इन चार चुनावों में किसी एक पार्टी की स्थायी बढ़त नहीं रही। यही कारण है कि शेखूपुर को किसी एक दल की सुरक्षित सीट कहना कठिन है।
90 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण सीट, किसान भी चुनाव तय कर सकते हैं
शेखूपुर विधानसभा की करीब 90.23 प्रतिशत आबादी ग्रामीण और केवल 9.77 प्रतिशत शहरी है। विधानसभा क्षेत्र में ककराला के साथ जगत, कादरचौक, शेखूपुर, सखानू, गुलड़िया और बड़ा ग्रामीण इलाका शामिल है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है। गेहूं, धान, गन्ना, आलू और सरसों प्रमुख फसलें हैं। मेंथा भी महत्वपूर्ण व्यावसायिक फसल के रूप में उभरा है। डेयरी और पशुपालन बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आय से जुड़े हैं।
इस कारण जातीय समीकरण के साथ किसान की आय, सिंचाई, बिजली, खाद-बीज, गन्ना भुगतान, आलू और मेंथा का भाव, ग्रामीण सड़क तथा पशुपालन 2027 में बड़े मुद्दे बन सकते हैं।
यादव, शाक्य, मौर्य, ठाकुर और दलित—अलग-अलग सामाजिक पहचान वाले कई समुदाय खेती से जुड़े हैं। इसलिए किसान से संबंधित सवाल कभी-कभी जातीय सीमाओं को भी पार कर सकते हैं।
बदायूं शहर से नजदीकी बदलती है स्थानीय अर्थव्यवस्था
शेखूपुर विधानसभा का बड़ा हिस्सा ग्रामीण है, लेकिन इसका बदायूं शहर से सीधा आर्थिक रिश्ता है। बदायूं शहर शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी सेवाओं, व्यापार और परिवहन का प्रमुख केंद्र है। विधानसभा क्षेत्र के कई परिवार रोजगार और कारोबार के लिए शहर पर निर्भर हैं।
इस कारण ग्रामीण विकास के साथ शहर तक बेहतर कनेक्टिविटी, सड़क, सार्वजनिक परिवहन और रोजगार भी मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं।
बदायूं और आसपास से गुजरने वाली बड़ी सड़क परियोजनाओं तथा गंगा एक्सप्रेसवे के कारण क्षेत्र की कनेक्टिविटी में बदलाव आया है। इन परियोजनाओं से भविष्य में लॉजिस्टिक्स, व्यापार और रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद भी स्थानीय राजनीति का हिस्सा बन सकती है।
2027 से पहले SP के टिकट समीकरण पर भी नजर
शेखूपुर की राजनीति लंबे समय से मुख्य रूप से यादव और शाक्य राजनीतिक परिवारों के आसपास घूमती रही है। परिसीमन से पहले उसहैत और बाद में शेखूपुर के चुनावों में दोनों परिवारों की प्रभावशाली भूमिका रही है।
2026 में सपा के भीतर शेखूपुर के लिए नए सामाजिक समीकरण की चर्चा भी सामने आई। यादव, मुस्लिम और मौर्य मतदाताओं वाली इस सीट पर पार्टी के भीतर अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के चेहरे की सक्रियता को लेकर राजनीतिक चर्चाएं हुईं। हालांकि 2027 के लिए पार्टी ने अभी अंतिम प्रत्याशी घोषित नहीं किया है।
इसलिए सपा के लिए सबसे बड़ा सवाल केवल वर्तमान विधायक के प्रदर्शन का नहीं, बल्कि टिकट चयन का भी हो सकता है।
पार्टी को तय करना होगा कि वह मौजूदा यादव नेतृत्व के साथ जाती है या मुस्लिम-मौर्य समेत व्यापक PDA समीकरण को ध्यान में रखते हुए कोई अलग प्रयोग करती है।
BJP के लिए 2027 का संभावित सामाजिक फॉर्मूला
भाजपा शेखूपुर में 2017 में जीत चुकी है और 2022 में केवल 6,100 वोट से हारी थी। इससे पार्टी के पास वापसी का मजबूत चुनावी आधार मौजूद है।
भाजपा का संभावित सामाजिक फॉर्मूला इस तरह देखा जा सकता है—
शाक्य + मौर्य/अन्य गैर-यादव OBC + ब्राह्मण + ठाकुर + SC का हिस्सा + यादव-मुस्लिम वोट में सीमित सेंध
2017 में शाक्य प्रत्याशी के साथ भाजपा 93,702 वोट लेकर जीती थी।
2022 में हारने के बावजूद उसका वोट बढ़कर 99,431 हो गया। यानी भाजपा ने अपना वोट खोया नहीं, बल्कि सपा उससे अधिक तेजी से बढ़ी।
2027 में भाजपा की चुनौती शाक्य समाज को मजबूत रूप से अपने साथ रखते हुए मौर्य और दलित मतदाताओं में समर्थन बढ़ाने की होगी।
2024 लोकसभा चुनाव में शेखूपुर से 15,111 वोट पीछे रहना पार्टी के लिए चेतावनी है।
SP का रास्ता यादव-मुस्लिम के साथ मौर्य और दलित वोट से
सपा का संभावित सामाजिक फॉर्मूला है—
यादव + मुस्लिम + मौर्य/शाक्य में सेंध + SC का हिस्सा + दूसरे OBC
पार्टी के पास यादव समुदाय का मजबूत आधार है और मुस्लिम आबादी करीब 27.90 प्रतिशत है। 2024 लोकसभा चुनाव में मौर्य प्रत्याशी के साथ सपा की 15,111 वोट की बढ़त उसके लिए अतिरिक्त सकारात्मक संकेत है।
लेकिन 2017 का चुनाव बताता है कि यदि मुस्लिम वोट बसपा के साथ बड़े स्तर पर बंटता है और शाक्य-गैर यादव OBC मतदाता भाजपा की ओर एकजुट होते हैं तो सपा हार सकती है।
इसलिए 2027 में सपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम यादव-मुस्लिम आधार के साथ मौर्य, शाक्य और दलित समुदायों में अतिरिक्त समर्थन जोड़ना होगा।
BSP का 35 हजार वोट अभी भी बहुत बड़ा
2022 में बसपा के मुस्लिम खान को 34,932 वोट मिले थे। सपा की जीत सिर्फ 6,100 वोट की थी। यानी बसपा का वोट जीत के अंतर से लगभग छह गुना था।
2017 में बसपा ने इससे भी ज्यादा 64,327 वोट हासिल किए थे और 2012 में पार्टी 51,979 वोट पर थी।
| चुनाव | BSP वोट |
| 2012 | 51,979 |
| 2017 | 64,327 |
| 2022 | 34,932 |
यह गिरावट बसपा के लिए चिंता जरूर है, लेकिन 35 हजार वोट भी शेखूपुर जैसे करीबी मुकाबले में बहुत बड़ी संख्या है।
यदि बसपा 2027 में मजबूत मुस्लिम प्रत्याशी उतारती है तो सपा के सामाजिक गठजोड़ पर प्रभाव पड़ सकता है।
यदि दलित चेहरा उतारकर पार्टी अपने 17 प्रतिशत से अधिक SC सामाजिक आधार को सक्रिय करती है तो मुकाबले का स्वरूप अलग हो सकता है।
यदि बसपा का वोट और घटता है तो उसका लाभ सपा और भाजपा में किसे कितना मिलता है, यह निर्णायक होगा।
1.56 लाख से ज्यादा महिला मतदाता भी बड़ी ताकत
2026 की मतदाता सूची में शेखूपुर विधानसभा में 1,56,348 महिला मतदाता हैं। संख्या के लिहाज से महिलाएं किसी भी अकेले जातीय समूह से बड़ी चुनावी श्रेणी हैं।
राशन, आवास, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पेयजल, सड़क, बिजली, शिक्षा और परिवार की आर्थिक स्थिति महिला मतदान व्यवहार को प्रभावित कर सकती है।
भाजपा लाभार्थी योजनाओं के जरिए महिला वोट में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश करेगी, जबकि सपा ग्रामीण मुद्दों, महंगाई और सामाजिक समीकरण के साथ इस वोट बैंक में सेंध लगाने का प्रयास कर सकती है।
2026 की नई वोटर लिस्ट सबसे बड़ा नया चुनावी फैक्टर
शेखूपुर की नई चुनावी तस्वीर में SIR 2026 को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
2024 मतदाता: 4,04,905
2026 मतदाता: 3,50,557
2024 से नेट कमी: 54,348
कमी: करीब 13.4 प्रतिशत।
वहीं SIR की तत्काल पूर्व सूची से तुलना वाले राज्यव्यापी आंकड़े में नेट कमी करीब 58.64 हजार यानी 14.33 प्रतिशत दर्ज है।
यह अंतर चुनावी जीत के अंतर से बेहद बड़ा है।
2022 SP जीत — 6,100 वोट
2024 SP लोकसभा बढ़त — 15,111 वोट
2024 से 2026 वोटर नेट कमी — 54,348।
इसका मतलब किसी पार्टी के 54 हजार वोट कम होना नहीं है। मतदाता सूची और मतदान व्यवहार अलग विषय हैं।
लेकिन बूथ प्रबंधन की दृष्टि से इसका प्रभाव बड़ा है। 2022 में जिस गांव को किसी दल ने 500 वोट की बढ़त वाला बूथ माना था, 2026 की सूची में उसका वास्तविक मतदाता आकार बदल चुका हो सकता है।
2027 में किन सामाजिक समूहों पर सबसे ज्यादा नजर?
पहला और सबसे बड़ा सवाल यादव मतदाता का रहेगा। यह सीट का सबसे बड़ा OBC समुदाय है और सपा की प्रमुख ताकत है।
दूसरा, मुस्लिम मतदाता। करीब 27.90 प्रतिशत की हिस्सेदारी उन्हें स्वतंत्र रूप से बहुत बड़ा सामाजिक ब्लॉक बनाती है।
तीसरा, शाक्य समाज। भाजपा की 2017 की जीत और 2022 के करीब मुकाबले में शाक्य नेतृत्व की बड़ी भूमिका रही है।
चौथा, अनुसूचित जाति। करीब 17.37 प्रतिशत सामाजिक हिस्सेदारी भाजपा, सपा और बसपा तीनों की रणनीति में महत्वपूर्ण रहेगी।
पांचवां, मौर्य मतदाता। 2024 लोकसभा नतीजे और 2027 से पहले की राजनीतिक रणनीति के कारण इस समुदाय पर दोनों प्रमुख दलों की नजर और बढ़ गई है।
छठा, ब्राह्मण और ठाकुर मतदाता। भाजपा के व्यापक गैर-SP सामाजिक गठजोड़ के लिए इनका समर्थन महत्वपूर्ण होगा।
सातवां, BSP का मुस्लिम-दलित आधार। इसका आकार ही तय कर सकता है कि चुनाव सीधा रहेगा या त्रिकोणीय।
शेखूपुर विधानसभा चुनाव 2027 का जातीय गणित क्या संकेत देता है?
शेखूपुर की राजनीतिक तस्वीर को पिछले चुनावों और नई वोटर लिस्ट के साथ देखें तो मुकाबला बेहद रोचक दिखाई देता है।
| चुनावी संकेत | स्थिति |
| 2012 विधानसभा | SP +8,252 |
| 2017 विधानसभा | BJP +23,386 |
| 2022 विधानसभा | SP +6,100 |
| 2014 लोकसभा खंड | BJP +8,473 |
| 2019 लोकसभा खंड | BSP +9,965 |
| 2024 लोकसभा खंड | SP +15,111 |
| 2024 कुल मतदाता | 4,04,905 |
| 2026 कुल मतदाता | 3,50,557 |
| SIR नेट कमी | करीब 58.64 हजार |
इन परिणामों से एक बात सबसे साफ निकलती है—शेखूपुर किसी एक पार्टी की स्थायी सुरक्षित सीट नहीं है।
सीट के गठन के बाद 2012 में सपा जीती।
2017 में भाजपा ने सीट छीन ली।
2022 में सपा ने फिर कब्जा कर लिया।
लोकसभा चुनावों में भी 2014 में भाजपा, 2019 में सपा-बसपा गठबंधन का प्रत्याशी और 2024 में सपा इस खंड से आगे रही।
Shekhupur Assembly Caste Equations में यादव और मुस्लिम सामाजिक आधार सपा को मजबूत शुरुआती गणित देता है। लेकिन शाक्य और दूसरे गैर-यादव OBC मतदाता भाजपा को बड़ी ताकत देते हैं। करीब 17.37 प्रतिशत अनुसूचित जाति मतदाता तीसरी निर्णायक धुरी हैं। मौर्य वोट 2027 में सबसे महत्वपूर्ण स्विंग समूहों में उभर सकता है।
सपा के पक्ष में सबसे मजबूत हालिया संकेत 2024 लोकसभा चुनाव में मिली 15,111 वोट की बढ़त है। इसके साथ 2022 की विधानसभा सीट भी पार्टी के पास है।
भाजपा के पक्ष में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि 2022 में वह सिर्फ 6,100 वोट से हारी और उसका प्रत्याशी लगभग एक लाख वोट तक पहुंचा। इसके अलावा पार्टी 2017 में इसी सामाजिक समीकरण के सहारे सीट जीत चुकी है।
बसपा की भूमिका भी कम नहीं है। 2022 में उसके करीब 35 हजार वोट और 2017 में 64 हजार से अधिक वोट रहे। मुस्लिम और दलित सामाजिक आधार में बसपा कितना वोट बचाती है, इससे भाजपा-सपा मुकाबले का अंतर बदल सकता है।
इसके ऊपर 2026 की नई मतदाता सूची ने पुराना बूथ गणित बदल दिया है। अब सिर्फ 2022 के आंकड़ों के आधार पर किसी गांव या जातीय समूह की चुनावी ताकत तय करना पर्याप्त नहीं होगा।
जातीय समीकरण के समानांतर किसान, गन्ना, आलू, मेंथा, सिंचाई, खाद-बीज, ग्रामीण सड़क, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और बदायूं शहर से कनेक्टिविटी जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के फैसले को प्रभावित करेंगे।
यानी शेखूपुर विधानसभा चुनाव 2027 को केवल यादव-मुस्लिम बनाम शाक्य-सवर्ण या BJP बनाम SP की सीधी लड़ाई के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। असली फैसला यादव वोट की एकजुटता, मुस्लिम मतों का बंटवारा, शाक्य-मौर्य और दूसरे गैर-यादव OBC की दिशा, अनुसूचित जाति मतों में भाजपा-सपा-BSP की हिस्सेदारी, ब्राह्मण-ठाकुर समर्थन, प्रत्याशी की सामाजिक स्वीकार्यता और 2026 की नई मतदाता सूची के बूथवार बदलाव मिलकर करेंगे।
-
समाचार संपादन, ब्रेकिंग अलर्ट और फैक्ट-चेक पर फ़ोकस। ज़मीनी रिपोर्टों को डेटा के साथ जोड़ना पसंद। कॉफ़ी, डेडलाइन और सत्य , तीनों से समझौता नहीं।
UTTAR PRADESH NEWS की अन्य न्यूज पढऩे के लिए Facebook और Twitter पर फॉलो करें