दिल्ली में साइकिल खरीद पर विवाद, आप ने उठाए कीमत और गुणवत्ता को लेकर सवाल

Published on 12 अग॰ 2026

दिल्ली में स्कूली छात्राओं को बांटी गई साइकिलों की खरीद को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है. आम आदमी पार्टी ने सरकार की ओर से खरीदी गई साइकिलों की कीमत, गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर गंभीर सवाल उठाते हुए मामले की जांच की मांग की है. पार्टी नेताओं ने दावा किया कि सरकारी स्तर पर खरीदी गई साइकिल और बाजार में कम कीमत पर उपलब्ध साइकिल में कई समानताएं हैं.

4,200 रुपये की साइकिल से तुलना

बुधवार को आप दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने पार्टी मुख्यालय में दो साइकिलें दिखाईं. उनके मुताबिक, एक साइकिल सरकार की ओर से छात्राओं को वितरित की गई थी, जबकि दूसरी साइकिल उन्होंने खुद रिटेल बाजार से खरीदी है.

भारद्वाज का दावा है कि रिटेल में खरीदी गई साइकिल की कीमत 4,000 रुपये थी और 200 रुपये टैक्स के साथ इसकी कुल कीमत 4,200 रुपये पड़ी. इसके विपरीत, उनके अनुसार सरकार ने लगभग 1.30 लाख साइकिलें करीब 6,957 रुपये प्रति साइकिल की दर से खरीदी हैं. उन्होंने दोनों साइकिलों की गुणवत्ता और कीमत की तुलना करते हुए खरीद प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए.

टायर, ब्रेक और उपकरणों पर भी सवाल

सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि रिटेल से खरीदी गई साइकिल में बेहतर गुणवत्ता वाले टायर, रिम और ब्रेक हैं, जबकि सरकारी साइकिल में अपेक्षाकृत सस्ते उपकरण इस्तेमाल किए गए हैं.

उन्होंने दावा किया कि दोनों साइकिलों की कीमत में बड़ा अंतर होने के बावजूद सरकारी साइकिल की गुणवत्ता बेहतर नहीं दिखाई देती. आप नेता ने सरकार से इस अंतर का कारण सार्वजनिक करने की मांग की है.

‘स्काइलर’ नाम को लेकर भी विवाद

सौरभ भारद्वाज ने सरकारी साइकिल पर लगे ‘स्काइलर’ नाम के स्टिकर की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाया. उनका दावा है कि संबंधित मॉडल का निर्माण पहले ही बंद हो चुका है और उसका ट्रेडमार्क भी समाप्त हो चुका है.

उन्होंने कहा कि जिस साइकिल की खरीद टेंडर में बताई गई थी, उसमें गियर, सस्पेंशन और डिस्क ब्रेक जैसी सुविधाएं होनी थीं, जबकि वितरित साइकिल में ये सुविधाएं मौजूद नहीं हैं. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं हुई है.

3,200 से 4,100 रुपये में उपलब्ध होने का दावा

बुराड़ी से विधायक संजीव झा ने भी साइकिल खरीद को लेकर सवाल उठाए. उन्होंने दावा किया कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान लुधियाना के एक कारोबारी ने करीब 4,100 रुपये में साइकिल उपलब्ध कराने की पेशकश की थी.

झा ने यह भी दावा किया कि बाद में उन्हें एक कंपनी से जुड़े व्यक्ति की ओर से ऐसी ही साइकिल करीब 3,200 रुपये में उपलब्ध कराने की बात कही गई. इन दावों के आधार पर उन्होंने खरीद प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग की.

मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से जवाब की मांग

आप नेताओं ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है. सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दोनों साइकिलों को मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के सामने रखकर उनकी गुणवत्ता और अंतर की सार्वजनिक रूप से जांच कराई जानी चाहिए.

वहीं संजीव झा ने आरोप लगाया कि मामले में करोड़ों रुपये की अनियमितता की आशंका है और सरकार को सदन में इस मुद्दे पर चर्चा कर जवाब देना चाहिए. फिलहाल ये आरोप राजनीतिक दल की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र जांच से ही खरीद प्रक्रिया में किसी अनियमितता की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी. 

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