एशिया से आखिरी अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर भी रवाना, ईरान युद्ध से बढ़ी चीन की ताकत?

Published on 16 अग॰ 2026

एशिया से आखिरी अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर भी रवाना, ईरान युद्ध से बढ़ी चीन की ताकत?

फोटो क्रेडिट- Getty Images.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे लंबे युद्ध का असर अब अमेरिकी नौसेना पर भी दिख रहा है. एशिया-प्रशांत क्षेत्र में मौजूद अमेरिका का आखिरी एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज वॉशिंगटन अब इस क्षेत्र से रवाना हो रहा है. इसे मध्य पूर्व भेजा जाएगा, जहां यह लंबे समय से तैनात USS अब्राहम लिंकन की जगह लेगा. इसके बाद कुछ समय के लिए पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका का कोई एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं रहेगा.

USS लिंकन को पहले मई में वापस लौटना था, लेकिन ईरान के खिलाफ अमेरिकी अभियान के कारण उसकी तैनाती बढ़ा दी गई. यह जहाज अब 240 दिनों से ज्यादा समय से लगातार समुद्र में है. इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर सैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य और जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है. अमेरिकी डेमोक्रेट सांसदों ने जहाज की स्थिति की जांच और ज्यादा जानकारी देने की मांग भी की है.

चीन के लिए क्यों फायदे की बात?

एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे अमेरिकी सैनिकों पर पड़ रहा दबाव साफ दिखता है. CSIS के ग्रेग पोलिंग के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन कहता रहा है कि पश्चिमी गोलार्ध के बाद प्रशांत क्षेत्र उसकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है. लेकिन ईरान युद्ध के कारण अमेरिका फिर से मिडिल ईस्ट में ज्यादा ताकत लगा रहा है. इससे जापान, फिलीपींस और दूसरे अमेरिकी सहयोगी चिंतित हैं. वहीं चीन के लिए यह स्थिति फायदेमंद है.

चीन अमेरिका की सैन्य मौजूदगी को अपनी ताकत बढ़ाने में बड़ी रुकावट मानता है. वह ताइवान पर अपना दावा करता है. हालांकि, सिर्फ अमेरिकी कैरियर के एशिया से जाने के कारण चीन के ताइवान पर हमला करने की उम्मीद नहीं है. फिर भी चीन इस मौके का इस्तेमाल अपनी सैन्य ताकत दिखाने के लिए कर सकता है.

चीन ने हाल में इंडोनेशिया के साथ नौसैनिक अभ्यास किया. उसने दक्षिण चीन सागर में स्कारबोरो शोल के पास सैन्य अभ्यास भी किया. इस क्षेत्र पर चीन और फिलीपींस दोनों का दावा है. पिछले महीने चीन के एक मिसाइल विध्वंसक ने जापान के दक्षिणी द्वीप ओकिनोटोरि के पास लाइव-फायर अभ्यास किया.

अमेरिका के पास 11 एयरक्राफ्ट कैरियर

अमेरिका के पास कुल 11 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं और आमतौर पर इनमें से 2-3 एक समय पर तैनात रहते हैं. USS थियोडोर रुजवेल्ट को सैन डिएगो से मध्य पूर्व भेजा गया तो चार कैरियर तैनात हो सकते हैं. लेकिन लंबे इस्तेमाल के बाद इन जहाजों को मरम्मत की जरूरत होगी. अमेरिका में ऐसे जहाजों की मरम्मत के लिए सिर्फ दो शिपयार्ड हैं, इसलिए आगे दबाव बढ़ सकता है.

11 महीने बाद लौटा था USS गेराल्ड

USS गेराल्ड आर. फोर्ड भी मई में 11 महीने की तैनाती के बाद लौटा था, जो वियतनाम युद्ध के बाद सबसे लंबी तैनाती थी. इस दौरान उसने ईरान के खिलाफ अभियान और वेनेजुएला के तत्कालीन नेता निकोलस मादुरो को पकड़ने की कार्रवाई में मदद की. जहाज में लॉन्ड्री वाले हिस्से में आग भी लगी थी, जिसके कारण सैकड़ों सैनिकों के सोने की जगह प्रभावित हुई.

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लगातार समुद्र में रहने से सैनिकों को पर्याप्त आराम नहीं मिल रहा और मानसिक थकान बढ़ रही है. साथ ही, ड्रोन और मिसाइलों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण चीन जैसे देश के खिलाफ बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर ज्यादा आसानी से निशाना बन सकते हैं. छोटे जहाज और पनडुब्बियां भी हमलों में प्रभावी साबित हो सकती हैं. अमेरिकी नेवी एडमिरल डैरिल काउडल भी बड़े कैरियर पर निर्भरता कम कर छोटे और नए जहाजों के इस्तेमाल पर जोर दे चुके हैं.

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