एक्टर का बेटा एक्टर बन जाएगा... नेपोटिज्म पर यश ने कहा- 'हम लोगों के लिए मुश्किल होता है'

Published on 17 अग॰ 2026

South Superstar Yash: साउथ फिल्मों के दिग्गज सुपरस्टार यश की फिल्म टॉक्सिक सिनेमाघरों में रिलीज होने के लिए तैयार है. इस फिल्म पर फैंस के खूब रिएक्शन्स भी आ रहे हैं. फिल्म की रिलीज से पहले यश भी इसके प्रमोशन में लगे हैं. ऐसे ही एक इंटरव्यू के दौरान यश ने अपने जीवन के कई पहलुओं पर बातें कीं. उन्होंने अपने स्टारडम से लेकर स्ट्रगल्स तक की बातें शेयर कीं. इसके अलावा उन्होंने नेपोटिज्म पर भी अपनी राय रखी.

एक बातचीत के दौरान यश से पूछा गया कि इंडस्ट्री में चाहें अल्लू अर्जुन हों, चिरंजीवी हों या फिर थलपति विजय हों इन सभी का फिल्मी बैकग्राउंड था. तो उन्हें जरूर स्टार बनने में मदद मिली. नेपोटिज्म के इस सवाल पर यश ने कहा- जो भी मदद मिले ना मिले, इस इंडस्ट्री में सबकुछ ऑडियंस डिसाइड करती है. एक्टर का बेटा एक्टर बन जाएगा. कोई दिक्कत नहीं है. हम लोगों को थोड़ी-बहुत प्रॉब्लम होती है. लेकिन उन लोगों का भी स्ट्रगल कम नहीं होता है. वे अपने पिता का बोझ लेकर इंडस्ट्री में आते हैं.

लेकिन हम लोगों के साथ ऐसा होता है कि जो पहली सीढ़ी होती है ना सर, उसे ढूंढ़ने में थोड़ा समय लग जाता है. अगर एक बार सीढ़ी मिल गई तो उसके बाद चढ़ना आपके ऊपर होता है. लेकिन मेरे साथ ऐसा देखने को मिला है कि जितना मैं चढ़ा हूं ना उससे ज्यादा लोगों ने मुझे चढ़ाया है.

साउथ एक्टर्स संग तुलना पर यश ने क्या कहा

यश से पूछा गया कि राम चरण, अल्लू अर्जुन, जूनियर एनटीआर, महेश बाबू ये सभी फिल्मी बैकग्राउंड से आए थे. लेकिन इसके बाद भी वे पैन इंडिया स्टार नहीं बन सके जैसे की आप हैं. इसका जवाब देते हुए यश ने कहा- नहीं नहीं, ऐसा नहीं है. वे सभी भी अपनी जगह पर ठीक कर रहे हैं. मेरे लिहाज से ये स्टारडम और पैन इंडिया स्टार जैसी चीजें सिर्फ एक टर्मेनोलॉजी होती है. आपने जो काम किया है और उसका जो वेटेज है उसको बस नाम देते हैं.

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स्टारडम पर यश ने क्या कहा?

मेरे हिसाब से इसमें कुछ भी पर्मानेंट नहीं है सर. इस फ्राइडे आप स्टार हो, अगले फ्राइडे आप कुछ भी नहीं हो सकते. अगर पहले मैंने एक बार कुछ कर दिया तो उसे लेकर सेलिब्रेट कर के मैं नहीं बैठ सकता हूं. लेकिन सभी एक्टर बहुत मेहनत करते हैं. अभी इस हफ्ते किसी का नाम होगा तो अगले हफ्ते किसी और का नाम होगा. कौन आगे है या पीछे है इसकी बात नहीं है. बात इसकी है कि कौन आगे तक टिक पाएगा और लोगों के दिल में रह पाएगा.

पुनीत उपाध्याय

पुनीत उपाध्याय

पत्रकारिता जगत में पूरे कर चुका हूं 4 साल. सिनेमा, साहित्य पर लिखने का शौक, कभी खोजी पत्रकार, कभी मौजी पत्रकार.

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