
पूर्व शिक्षा रमेश पोखरियाल निशंक
देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष के सत्ता सम्मेलन- उत्तराखंड के मंच पर देश के पूर्व शिक्षा रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लेकर कोई कमी नहीं थी. तमिलनाडु में जो विरोध हुआ वो महज राजनीतिक थी. वहीं Gen Z को लेकर निशंक ने कहा कि आप लोग Gen Z की बात न करके युवा हिंदुस्तान की बात करो. अगले 30-35 सालों तक देश यंगिस्तान बना रहेगा.
विचारों के महामंच पर पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ने सिलेबस बदले जाने, अकबर को आक्रांता कहे जाने पर कहा कि अगर कोई कहे कि आपके पिता बहुत बुरे हैं तो क्या आप मान लेंगे. अरे उस समय की परिस्थितियां अलग थी, लेकिन हमें अपने संस्कृति और पुराने दौर के गाथा के बारे में जानना बहुत जरूरी है. हमें अपनी ताकत को पहचानना होगा. हमें अपने गौरव की बात करनी होगी.
भारत में हुई थी गुरुत्वाकर्षण की खोजः निशंक
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गुरुत्वाकर्षण को खोज देश में हुआ. देश में 11वीं सदी में गुरुत्वाकर्षण को खोज कर लिया गया. इस बात के कई साक्ष्य मौजूद हैं और इसे देख सकते हैं, लेकिन 16वीं सदी में पैदा होने वाले न्यूटन ने महज एक लेख के जरिए गुरुत्वाकर्षण के बारे में बताया और उसे खोज मान लिया गया. इसीलिए कहता हूं कि हमें अपनी खासियत की बात करनी चाहिए. अपने गौरव की पढ़ाई करनी चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा, “जो लोग आक्रांता थे उनको हम महान क्यों बना रहे हैं? हिंदुस्तान ने कम थपेड़े नहीं सहे हैं, अब हिंदुस्तान नहीं सहेगा.”
निशंक नाम कैसे पड़ा, इस सवाल पर रमेश पोखरियाल ने कहा कि मेरी रचनाओं ने मुझे निशंक नाम दिया. बचपन से ही लिखता रहा हूं. कविता भी लिखता रहा हूं. देशभक्ति की रचनाओं की वजह से यह नाम आया. मेरी देशभक्ति गीत लंबे समय से हर आकाशवाणी केंद्रों पर गाया जाता रहा तो मेरी लेखनी की वजह से ही मेरे नाम में निशंक जुड़ा.
शिक्षा नीति 2020 में कोई कमी नहींः निशंक
नीट पेपर लीक से जुड़े मसले पर निशंक ने कहा, “जब मैं शिक्षा मंत्री बना तब बहुत सारी चुनौतियां थीं. मुझे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को पूरा करना था. हमें ब्रिटिश शिक्षा नीति को बदलने की चुनौती थी. हमें लॉर्ड मैकाले की शिक्षा व्यवस्था लाने की चुनौती थी. हम इससे पहले की शिक्षा व्यवस्था को लाना था, जिसने भारत को विश्व गुरु का दर्जा दिलाया था.”
AI का जिक्र करते हुए पूर्व शिक्षा मंत्री निशंक ने कहा, हमारी शिक्षा नीति AI से बहुत आगे की है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में कोई खराबी नहीं है, अगर कोई खराबी या कमी है तो मुझे बताइए. मैं जवाब देने को तैयार हूं.
तमिलनाडु की ओर से राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में त्रिभाषा का विरोध करने पर रमेश पोखरियाल ने कहा कि नई शिक्षा नीति को लेकर देश में कहीं भी विरोध नहीं हुआ. तमिलनाडु ने जो विरोध किया वो सिर्फ राजनीतिक है. शिक्षा नीति में कोई न कोई लोकल भाषा पढ़ने की बात करती है. तमिलनाडु में हर साल कम से कम 3 लाख लोग हिंदी भाषा की पढ़ाई करते हैं. वहां सिर्फ राजनीति हो रही है. चुनाव को देखते हुए वहां पर विरोध किया गया.
भाषायी विवाद पर बोलते हुए निशंक ने कहा कि “ये देश हिंदी का है… हिंदी राष्ट्र की भाषा है. इजराइल और जापान जैसे देशों में उनकी मातृभाषा में ही शिक्षा कराई जाती है.” उन्होंने यह भी कहा कि जब भारत के प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) देश से बाहर कहीं जाते हैं और हिंदी में बात करते हैं, तो लगता है कि वो हिंदुस्तानी हैं.

सुरेन्द्र कुमार वर्मा
पत्रकारिता जगत में पिछले डेढ़ दशक से भी लंबे समय से सक्रिय हूं. अखबारों की दुनिया से होते हुए मैं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आया. अभी टीवी9 भारतवर्ष के साथ जुड़ा हुआ हूं. शुरुआत हरिभूमि के साथ की. फिर दैनिक जागरण गया और इसके बाद जागरण.कॉम के जरिए डिजिटल की दुनिया में आया. यहां से मैं अमर उजाला की डिजिटल टीम के साथ जुड़ा रहा. फिर इंडिया टुडे ग्रुप से नाता जुड़ा. न्यूजफ्लिक्स में रहने के बाद आजतक डॉट इन में आया. इंडिया टुडे ग्रुप में 5 साल तक रहने के बाद इसे अलविदा कहा. फिर अपना कारवां टीवी9 के साथ जुड़ गया. अभी टीवी9 के साथ पत्रकारिता के लिए अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मैं राजनीति, खेल और मनोरंजन समेत लगभग हर विधा में लिखता हूं. सोशल मीडिया पर 50-50 का नाता है. फेसबुक पर ज्यादा जाना नहीं हो पाता है, लेकिन पहले ट्विटर और अब X पर सक्रिय रहता हूं. परवरिश गोरखपुर में हुई, लेकिन कर्मस्थली अभी नोएडा बना हुआ है.
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