.
शहर को जाम से राहत दिलाने और भारी वाहनों को आबादी से बाहर निकालने के लिए बन रहा बक्सर-चौसा फोरलेन बाइपास तय समय सीमा बीतने के बाद भी अधूरा पड़ा है। करीब 20.92 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन पर 1060.16 करोड़ रुपये खर्च होने हैं। मार्च 2024 में कार्य एजेंसी को लेटर ऑफ अवार्ड जारी किया गया था। 24 महीने में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य तय हुआ था। इस हिसाब से मार्च 2026 तक सड़क तैयार हो जानी चाहिए थी। अगस्त समाप्त होने को है।
परियोजना अब भी पूरी नहीं हो सकी है। परियोजना की सुस्त रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि फोरलेन के लिए जिन जमीनों का अधिग्रहण किया गया है, उनमें कई जगह अब धान की रोपनी हो चुकी है। जिस जमीन पर सड़क की काली पट्टी बिछनी थी, वहां खेतों में धान की हरियाली दिखाई दे रही है। इससे स्थानीय लोगों के बीच सवाल उठ रहा है कि आखिर अधिगृहीत जमीन पर सड़क बनेगी या खेती होती रहेगी। लोगों ने कहा कि जिस बाइपास को शहर के यातायात का दबाव कम करने के लिए बनाया जा रहा है, उसकी धीमी रफ्तार अब खुद चिंता का कारण बन गई है। लोगों का सवाल है कि इतनी बड़ी परियोजना के निर्माण में देरी की वजह क्या है। इसे पूरा करने की नई समय सीमा क्या तय की गई है। रेलवे ओवरब्रिज बंद, बाइपास की जरूरत और बढ़ी बक्सर के रेलवे ओवरब्रिज के क्षतिग्रस्त होने के बाद शहर की यातायात व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है। भारी वाहनों के आवागमन में बदलाव हुआ है। वैकल्पिक मार्गों पर भीड़ बढ़ी है। ऐसे में बक्सर-चौसा फोरलेन की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस होने लगी है। फोरलेन के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद कई हिस्सों में निर्माण कार्य आगे नहीं बढ़ सका है। कई भूखंडों पर किसानों ने धान की रोपनी कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब जमीन सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित हो चुकी है, तो वहां निर्माण शुरू नहीं होने का कारण स्पष्ट किया जाना चाहिए। लोगों के अनुसार परियोजना के कई हिस्सों में काम की गति एक समान नहीं है। कहीं निर्माण कार्य चल रहा है। कहीं जमीन खाली पड़ी है। कहीं खेतों में फसल खड़ी है। ऐसे में परियोजना की वास्तविक प्रगति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
शहर की यातायात व्यवस्था के लिए अहम परियोजना बक्सर-चौसा फोरलेन को शहर की यातायात व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। इसका उद्देश्य भारी वाहनों को शहर के भीतर से बाहर निकालना है। बक्सर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करना है। यह सड़क उत्तर प्रदेश के भरौली-उंचाडीह फोरलेन लिंक रोड और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे से जुड़ने वाली है। इसके पूरा होने से बक्सर से वाराणसी, लखनऊ और दिल्ली की ओर आने-जाने वाले वाहनों को बेहतर संपर्क मिलने की उम्मीद है। ऐसे में परियोजना में देरी का असर स्थानीय यातायात के साथ क्षेत्रीय संपर्क पर भी पड़ सकता है।