भारत और चीन दोनों की मदद स्वीकार, विदेशी सहायता लेने पर नेपाल सरकार का यूटर्न
Aug 28, 2026 11:33 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

नेपाल सरकार ने विदेशी सहायता टीमों को स्वीकार कर लिया है। बाढ़ में जूझ रहे पहाड़ी देश ने भारत और चीन दोनों देशों से एक्सपर्ट और बचाव दलों को आने की मंजूरी दे दी है। अभी तक मौत का आंकड़ा 579 तक पहुंच चुका है।

भारत और चीन दोनों की मदद स्वीकार, विदेशी सहायता पर नेपाल का यूटर्न
Nepal floods: तिब्बत से आई बाढ़ का कहर झेल रहे नेपाल ने भारत और चीन से मानवीय सहायता लेना स्वीकार कर लिया है। शुक्रवार को सेना द्वारा जारी राहत एवं बचाव कार्य के बीच नेपाल की बालेन शाह सरकार ने मानवीय सहायता की पेशकश को स्वीकार कर लिया है। इससे पहले काठमांडू की तरफ से कहा गया था कि उसकी सेना और बचाव दल इस तरह की आपदा से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हालांकि, लगातार बढ़ती परेशानी के बीच नेपालके नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट सेंटर ने विदेशी सहायता को हरी झंडी दे दी। इसके बाद सरकार ने भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया से आने वाली राहत-बचाव एक्सपर्ट और टेक्निकल टीमों को मंजूरी दे दी है।
नेपाली अखबार काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि कई देश लगातार राहत एवं बचाव दल भेजने की पेशकश कर रहे थे। अधिकारी ने कहा, "हमें लगातार अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की तरफ से दबाव का सामना करना पड़ रहा था। मित्र देश लगातार इस बात पर जोर दे रहे थे कि कम से कम खोज और बचाव की टीमों और कुछ एक्सपर्ट्स को आने की अनुमति दी जाए। क्योंकि बाढ़ में उनके नागरिक भी लापता हैं। इसलिए सरकार ने कुछ खास इलाकों तक इन विदेशी टीमों को आने की अनुमति दी है।"
रिपोर्ट की मानें, तो भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया से आने वाली यह टीमें सुरंगों में फंसे लोगों को खोजने में मदद करेंगी। इसके साथ ही वह डीएनए टेस्टिंग और फॉरेंसिक के जरिए शवों की पहचान में भी सहायता करेंगी।
नेपाल में आई बाढ़ से अभी तक 579 लोगों की मौत
नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ से अभी तक आधिकारिक रूप से 579 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग अभी भी गायब हैं। नेपाल केनेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी की मानें तो लापता लोगों में 517 विदेशी नागरिक हैं। इसके अलावा 933 कर्मचारी पनबिजली परियोजना में काम करने वाले कर्मचारी शामिल हैं।
भारत शुरुआत से ही कर रहा है मदद की पेशकश
नेपाल में बाढ़ की खबर आने के तुरंत बाद से ही भारत लगातार हर संभव मदद का भरोसा दिला रहा है। नेपाल सरकार ने अभी तक मानवीय सहायता लेने से इनकार कर दिया था। इसके बाद भारत सरकार ने अलग-अलग तरीकों से अभी तक 3 प्लेन भरकर सहायता भेजी है। इसके अलावा भारतीय नागरिकों ने भी आर्थिक रूप से नेपाल की मदद करना जारी रखा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को अपने नेपाली समकक्ष शिशिर खनाल से बात की और विनाशकारी बाढ़ के बाद बचाव और राहत कार्यों केलिए भारत की ओर से हर संभव मदद की पेशकश की।
नेपाल को सभी तरह की मदद की पेशकश की- जयशंकर
जयशंकर ने कहा कि भारत बचाव कार्यों में मदद के लिए एक्सपर्ट की एक टीम भेज रहा है और बेली ब्रिज भी उपलब्ध कराएगा, जिनकी नेपाल को प्रभावित इलाकों में संपर्क बहाल करने के लिए जरूरत है। उन्होंने कहा,"अभी हमारा ध्यान लोगों के राहत और बचाव कार्यों में नेपाल की मदद करने पर है। आज सुबह भी मैंने नेपाल के विदेश मंत्री से बात की। हमने उन्हें कई तरह की मदद की पेशकश की है और वे उन पर विचार कर रहे हैं। उन्हें जो भी सही लगेगा, वे अपनी जरूरतों के हिसाब से चुन लेंगे।"
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “अभी सबसे जरूरी बात यह है कि एक जगह पर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट है। ऐसे में हो सकता है कि कुछ लोग वहाँ टनल में फँसे हों। इसलिए, हम एक्सपर्ट्स के साथ एक टीम भेज रहे हैं। साथ ही,उन्हें कुछ बेली ब्रिजों की जरूरत है, इसलिए हम पुल भी भेज रहे हैं। कुछ मेडिकल टीमें भी वहाँ जा सकती हैं। अगर उन्हें NDRF की जरूरत पड़ी, तो हम उन्हें भेजेंगे।"