नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. बाढ़ और भूस्खलन से रसुवा और नुवाकोट की कई जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं. स्वतंत्र ऊर्जा उत्पादक संघ, नेपाल ( इप्पान) के अनुसार, 13 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स को नुकसान पहुंचा है.
इन परियोजनाओं में काम करने वाले करीब 933 कर्मचारी लापता हो गए थे. इनमें से 254 लोगों को अब तक बचाया जा चुका है. कुछ लोगों से संपर्क भी हो गया है. बड़ी संख्या में कर्मचारी अभी भी लापता हैं.
बाढ़ का पानी और भूस्खलन परियोजना क्षेत्रों तक पहुंच गया. कई जगहों पर सड़कें टूट गईं. कई जगहों से संपर्क भी टूट गया है. मोबाइल और टेलीफोन सेवाएं बंद हो गईं. ऐसे में परियोजनाओं में मौजूद लोगों से संपर्क करना मुश्किल हो गया. उनकी सही संख्या और स्थिति की जानकारी भी नहीं मिल पा रही है.
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इप्पान के वरिष्ठ उपाध्यक्ष उत्तम भ्लोन ने कहा कि नुकसान अनुमान से कहीं ज्यादा हुआ है. फिलहाल बचाव और राहत को प्राथमिकता दी जा रही है. कई जगहों पर राहत का काम शुरू हो चुका है. कुछ परियोजनाओं में हालात अब भी गंभीर हैं.
लांगटांग हाइड्रो, अपर त्रिशूली, त्रिशूली-3 बी और चिलिमे जैसी परियोजनाओं में तत्काल बचाव की जरूरत बताई गई है. आशंका है कि कुछ कर्मचारी सुरंगों के अंदर फंसे हो सकते हैं. ऐसे लोगों तक जल्द पहुंचना जरूरी है.
अपर त्रिशूली-1 में 576 कर्मचारियों का पता नहीं
बाढ़ से प्रभावित परियोजनाओं में अपर त्रिशूली-1 सबसे ज्यादा प्रभावित बताई जा रही है. यहां करीब 1,350 कर्मचारी काम करते थे. इनमें से 576 कर्मचारियों की स्थिति अभी साफ नहीं है. कुछ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. लेकिन बड़ी संख्या में कर्मचारी अब भी संपर्क से बाहर हैं.
इप्पान के अनुसार, सुरंगों और परियोजना परिसर में फंसे लोगों को बचाना सबसे जरूरी है. समय पर मदद मिलने से उनकी जान बचाई जा सकती है. इसी वजह से बचाव अभियान तेज करने की कोशिश हो रही है.
Attended the valedictory ceremony of the induction training program for the Indian Foreign Service officer-trainees of 2025 batch and Bhutanese diplomats.
This cohort of IFS officers will be part of 🇮🇳’s journey towards #ViksitBharat.
Encouraged them to grasp contemporary… pic.twitter.com/SF5oaFnZ40
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) August 28, 2026
बाढ़ के बाद कई इलाकों का सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है. ऐसे में बचाव दलों को पहुंचने में परेशानी हो रही है. निजी हेलीकॉप्टरों की मदद लेने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, परियोजना स्थलों पर हेलीकॉप्टर उतारना आसान नहीं है. कई जगह पर्याप्त जगह नहीं है. तकनीकी और सुरक्षा से जुड़ी दिक्कतें भी सामने आ रही हैं.
इप्पान के अधिकारियों का कहना है कि सुरंगों में फंसे लोगों की सही स्थिति का पता लगाना बेहद जरूरी है. इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. बचाव दल प्रभावित इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
नेपाल ने भारत से मांगी सुरंग बचाव में मदद
स्थिति गंभीर होने के बाद नेपाल सरकार ने भारत से सहायता मांगी है. नेपाल के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लोक बहादुर पौडेल ने कहा कि तीन दिन बीतने के बाद भी नेपाल के बचाव दल के लिए अकेले अभियान चलाना मुश्किल हो रहा है. इसके बाद भारत से मदद मांगी गई है.
भारत ने भी मदद भेजना शुरू कर दिया है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि राहत सामग्री लेकर तीसरी उड़ान काठमांडू के लिए रवाना हुई है. इसमें 10 टन मानवीय सहायता भेजी गई है. इसमें पोर्टेबल जनरेटर, डिग्निटी किट, भोजन के पैकेट और पानी साफ करने वाली गोलियां शामिल हैं.
Third flight with assistance from India reaches Kathmandu.
Relief supplies and an 11-member medical and tunnel rescue team are now on the ground.
🇮🇳🇳🇵 pic.twitter.com/7VAGVLKvdg
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) August 28, 2026
भारत की 11 सदस्यीय टीम भी पहुंच रही नेपाल
राहत सामग्री के साथ भारत ने विशेषज्ञ टीम भी भेजी है. 11 सदस्यीय टीम में डॉक्टर और पैरामेडिक्स शामिल हैं. इसके अलावा सुरंग बचाव अभियान के लिए रेकी टीम भी भेजी गई है. यह टीम प्रभावित इलाकों का जायजा लेगी. इसके बाद बचाव अभियान में मदद करेगी.
भारत लगातार नेपाल के राहत और बचाव अभियान में सहयोग कर रहा है. अब सुरंगों में फंसे लोगों को निकालने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. नेपाल में राहत कार्य जारी है. बचाव दल लापता कर्मचारियों की तलाश में जुटे हैं. सभी की नजर अब उन लोगों पर है जो अभी भी सुरंगों और प्रभावित परियोजना क्षेत्रों में फंसे हो सकते हैं.
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