जंतर-मंतर पर छात्र पिट रहे थे, विजेता बर्गर खा रहे थे; दहिया के कांड पर क्या बोले सोनम वांगचुक?

Published on 30 अग॰ 2026

जंतर-मंतर पर छात्र पिट रहे थे, विजेता बर्गर खा रहे थे; दहिया के कांड पर क्या बोले सोनम वांगचुक?

Aug 30, 2026 08:36 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

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Sonam Wangchuk on Vijeta Dahiya burger controversy: जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान CJP प्रवक्ता विजेता दहिया के बर्गर खाने के विवाद पर सोनम वांगचुक ने अपना पक्ष बताया है। उन्होंने कहा कि CJP के कोर ग्रुप के सदस्यों से वह अनशन की उम्मीद नहीं करते थे। जानिए उन्होंने इसके पीछे की क्या वजह बताई।   

जंतर-मंतर पर छात्र पिट रहे थे, विजेता बर्गर खा रहे थे; दहिया के कांड पर क्या बोले सोनम वांगचुक?

विजेता दहिया के 'बर्गर कांड' पर क्या बोले सोनम वांगचुक? CJP के अनशन न करने की वजह भी बताई

Sonam Wangchuk on Vijeta Dahiya burger controversy: जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान CJP के प्रवक्ता रहे विजेता दहिया को बर्गर खाते हुए कुछ लोगों ने पकड़ लिया था। इसके बाद टीम ने उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। इस 'बर्गर कांड' को लेकर उस वक्त काफी चर्चा हुई थी। अब प्रदर्शन के दौरान अनशन पर बैठे पर्यावरण एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने इस पूरे मामले पर अपना बयान दिया है। उन्होंने बताया कि कोर ग्रुप के लोगों से वह कभी यह उम्मीद नहीं करते थे कि वे भी अनशन करें। इसके पीछे उन्होंने आंदोलन के दौरान उनकी अलग जिम्मेदारियों का हवाला दिया।

CJP के अनशन न करने की वजह भी समझाई

सोनम वांगचुक ने ये बातचीत प्रखर गुप्ता एक्सपीरियंस नामक पॉडकास्ट में कीं। सीजेपी के विजेता दहिया या अभिजीत के खाना खाने के सवाल पर सोनम वांगचुक ने कहा कि इसे इस नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए कि एक व्यक्ति भूख हड़ताल पर बैठा है और दूसरा खाना खा रहा है। उन्होंने कहा कि कोर ग्रुप के लोगों की भूमिका अलग थी और वे आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी काम कर रहे थे।

अभिजीत स्टेज पर खाना खा रहा था, या फिर विजेता दहिया बर्गर खाते हुए पकड़ा गया। तब क्या ऐसा लगता होगा कि मैं यहां भूख से मर रहा हूं और ये आदमी बर्गर खा रहा है। इस सवाल पर वांगचुक ने साफ शब्दों में कहा- ‘नहीं नहीं। मेरा इस मामले में अलग विश्लेषण है।

इसके बाद वांगचुक ने बताया, आखिर वो क्यों कहते थे कि आप लोग अनशन न करो। “इनको मैं खुद कहता था कि आपको वन डे अनशन नहीं करना है। आप लोगों को बहुत प्लानिंग करनी है। कॉर्डिनेशन करना है। दौड़ो आप। अपना धर्म निभाओ। आप यहां काम न करके घर सो जाओ, ये तो स्वीकार नहीं है। इसलिए आप खाना खाइए और प्लानिंग कीजिए, ताकि ये सफल हो। इसलिए कोर ग्रुप के लोगों से मैं कभी ऐसी उम्मीद नहीं करता था कि वो खाना न खाएं।”

बाकी लोगों से क्यों कहते थे अनशन करने को?

सोनम वांगचुक ने बताया कि आंदोलन में आने वाले अन्य सभी लोगों को अनशन करने के लिए कहता था। उन्होंने इसके पीछे की वजह भी समझाई, जो कि लद्दाख आंदोलन से जुड़ी थी। उन्होंने कहा, “बाकी सहभागी जो आंदोलन में आते थे, उनसे मैं कहता था कि आप लोग अगर यहां आए हैं, तो अनशन कर लें। क्योंकि आप यहां बैठे हैं, कोई कॉर्डिनेशन वगैरह, प्लानिंग, मीडिया, दौड़-धूप ये काम नहीं करना है। बैठे ही रहना है, तो बिना खाए बैठें और नैतिक समर्थन दें।”

'लद्दाख में आंदोलन में आने वाले लोग करते थे अनशन

उन्होंने आगे बताया, 'लद्दाख में जब भी अनशन होता है, दिन में जितने भी लोग आते हैं, कोई खाना नहीं खाता है। यही मैं वहां आने वाले लोगों को समझाना चाह रहा था। नहीं तो कुछ लोग कहते हैं कि लोग यहां खाना खाने आते हैं।' इस तरह सोनम वांगचुक ने विजेता दहिया के बर्गर खाने को अपनी भूख हड़ताल से जोड़कर देखने से इनकार किया।

लेखक के बारे में

Ratan Gupta

रतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।

रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।

लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।

रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।

इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।

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