बैंकॉक, एक सितंबर (भाषा) डीईई डेवलपमेंट इंजीनियर्स लिमिटेड (डीडीईएल) भारत के तेजी से बढ़ते परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में उतरने की योजना बना रही है और पाइपिंग निर्माण समाधान उपलब्ध कराने के लिए एक संयुक्त उद्यम साझेदार की तलाश कर रही है।
कंपनी के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के एल बंसल ने पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि कंपनी का लक्ष्य आगामी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं के लिए पाइपिंग निर्माण समाधान उपलब्ध कराकर 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के सरकारी लक्ष्य में योगदान करना है।
उन्होंने कहा कि कंपनी एक वैश्विक इकाई के साथ शुरुआती बातचीत कर रही है और परमाणु पाइपिंग निर्माण परियोजना के लिए जरूरी प्रौद्योगिकी एवं अन्य नियामकीय पहलुओं को विकसित करने के लिए संयुक्त उद्यम के गठन की संभावना तलाश रही है। इसे इस साल के अंत तक अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।
बंसल ने कहा कि इस परियोजना में शुरुआती तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का पूंजीगत व्यय करना होगा। उन्होंने कहा, ‘‘यह परियोजना परमाणु पाइपिंग निर्माण के लिए भारत की 100 प्रतिशत आयात निर्भरता कम करने में मदद करेगी। यह परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के निर्माण और रखरखाव के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है।’’
डीडीईएल ने हाल में तेजी से उभरते डेटा सेंटर क्षेत्र में भी प्रवेश किया है और एक निजी कंपनी से कोर पाइपिंग का पहला ऑर्डर हासिल किया है।
‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत कंपनी ने गुजरात के अंजार में भारत की पहली मोटी दीवार वाले सीमलेस पाइप विनिर्माण इकाई भी शुरू की है, जिसकी सालाना उत्पादन क्षमता 7,000 टन है। करीब 100 करोड़ रुपये के निवेश से स्थापित यह इकाई बड़ी बिजली परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले उच्च-शक्ति वाले विशेष पाइप की भारत की पूरी जरूरत पूरी कर सकती है।
कंपनी का लक्ष्य नई कारोबारी पहल के दम पर 2030 तक कारोबार 2,500 करोड़ रुपये से अधिक करने का है, जो वित्त वर्ष 2025-26 में 1,200 करोड़ रुपये था।
डीडीईएल देश की प्रमुख औद्योगिक पाइप विनिर्माताओं में से एक है और वैश्विक स्तर पर शीर्ष पांच में शामिल है। यह इस्पात, स्टेनलेस स्टील और अन्य मिश्र धातु के पाइप को जोड़कर विभिन्न क्षेत्रों के लिए समाधान उपलब्ध कराती है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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