क्या भारत की तरह अमेरिका में भी होता है ट्यूशन कल्चर? 12वीं के छात्र ने खोला राज

Published on 1 सित॰ 2026

भारत में स्कूल के बाद बच्चों के ट्यूशन जाना बेहद आम है. स्कूल में जो चीजें उन्हें समझ नहीं उसके लिए छात्र अलग से कोचिंग या ट्यूटर की मदद लेते हैं. लेकिन क्या अमेरिका में भी बच्चों के लिए ऐसा ही ट्यूशन कल्चर है? इस सवाल पर इंस्टाग्राम पर ‘Sarika in America’ नाम के अकाउंट से शेयर किए गए एक वीडियो में 12वीं कक्षा की एक छात्रा ने अपने अनुभव के बारे में बताया. 

X

अमेरिका में भी होता है ट्यूशन कल्चर?

अमेरिका में भी होता है ट्यूशन कल्चर?

भारत में स्कूल खत्म होते ही बच्चों का अगला पड़ाव अक्सर ट्यूशन या कोचिंग सेंटर होता है लेकिन अमेरिका में पढ़ने वाली 12वीं की एक छात्रा ने वहां की पढ़ाई का ऐसा अनुभव बताया, जो भारतीय छात्रों के लिए काफी अलग है.  इंस्टाग्राम पर ‘Sarika in America’ अकाउंट से शेयर किए गए वीडियो में छात्रा ने बताया कि अमेरिका में भारत जैसा ट्यूशन कल्चर नहीं है और बच्चों को पढ़ाई में कोई दिक्कत होने पर वे सीधे अपने स्कूल टीचर से मदद लेते हैं. 

वीडियो में इन बातों का मिला जवाब 

वीडियो की शुरुआत में 12वीं क्लास की एक छात्रा से पूछा जाता है कि अमेरिका में ट्यूशन नहीं होता है, तो बच्चे पढ़ते कैसे हैं, अपने डाउट को कैसे क्लियर करते हैं? तो जवाब में अनुष्का ने बताया कि अमेरिका में ट्यूशन का कोई कल्चर नहीं है, बल्कि यहां पर स्टूडेंट आवर्स होते हैं. मतलब स्कूल खत्म होने के बाद अंगर किसी बच्चों को कोई डाउट होता है, तो वह टीचर के रूम में जाते हैं और अपने डाउट क्लियर करते हैं टीचर इस दौरान उनकी मदद करते हैं न कि अलग से कोई कोचिंग करते हैं. 

सेल्फ स्टडी का क्या है रोल?

लेकिन जब अनुष्का से पूछा गया कि केवल स्टूडेंट आवर्स  से मदद मिल जाती है या अमेरिका के बच्चे सेल्फ स्टडी पर ज्यादा फोकस करते हैं? तो उन्होंने जवाब दिया कि सेल्फ स्टडी होती है लेकिन की बारी टीचर पूरे हफ्ते उस मटेरियल को रिव्यू करते हैं ताकि बच्चों को सारी चीजें समझ में आ जाए.   

नहीं लेना होता है कोई कोचिंग

वीडियो में छात्रा ने बताया कि किसी सवाल या विषय को समझने में परेशानी होने पर छात्रों के पास अपने टीचर से मदद लेने का विकल्प होता है यानी इसके लिए अलग से ट्यूशन या कोचिंग जाने की जरूरत आम तौर पर नहीं पड़ती, जैसा भारत में कई छात्रों के साथ देखने को मिलता है. उसके अनुसार, छात्र स्कूल में ही अपने सवालों को क्लियर करने की कोशिश करते हैं. हालांकि, भारत में कई छात्र स्कूल की पढ़ाई के अलावा नियमित ट्यूशन या कोचिंग लेते हैं. खासकर बोर्ड परीक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अलग से क्लास लेने का चलन काफी आम है. 

---- समाप्त ----

Live TV

aaj tak epaper in hindi