कौन है कानपुर की बहू शालू? करोड़पति ससुर की हत्या में पहुंची जेल, मिर्जापुर से भी खतरनाक है मर्डर मिस्ट्री
Updated: Tuesday, September 8, 2026, 17:55 [IST]
कानपुर के दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड ने परिवार के भीतर चल रही कथित साजिश का ऐसा एंगल सामने ला दिया है, जिसने पूरी कहानी पलट दी। जिस घर में ससुर की हत्या हुई, उसी परिवार की 30 साल की बहू शालू अब हत्या की साजिश में आरोपी बनकर जेल पहुंच चुकी है। शुरुआत में मामला घर में घुसकर हत्या का लग रहा था। लेकिन पुलिस ने जैसे-जैसे सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल संपर्क, डुप्लीकेट चाबी और पुराने कर्मचारी की भूमिका को जोड़ना शुरू किया, जांच परिवार के अंदर तक पहुंच गई।
ससुर की मौत के बाद जो बहू रो-रोकर बदहवास दिख रही थी, वही इस पूरे कांड की मास्टरमाइंड निकली। घर में लूटपाट के इरादे से घुसे नकाबपोशों की थ्योरी से शुरू हुई यह कहानी अब 6 लाख रुपये की सुपारी, डुप्लीकेट चाबी और गहरी पारिवारिक रंजिश तक पहुंच चुकी है। पुलिस का दावा है कि हत्या अचानक नहीं हुई थी। इसकी तैयारी पहले से की गई थी। हत्या के लिए तारीख तय करने और घर में आने के लिए डुप्लीकेट चाबी तैयार कराने जैसी बातें जांच में सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि इन सभी आरोपों की पुष्टि अदालत में पेश होने वाले सबूतों से ही होगी।
पार्टी के लिए निकला परिवार, घर में छिप गए दो लोग
पुलिस की जांच के मुताबिक 5 सितंबर रात करीब 9 बजकर 36 मिनट पर विनीत मिनोचा का बेटा सुब्रत, बहू शालू और उनका छह साल का बेटा घर से पार्टी के लिए निकले। परिवार के निकलने के कुछ ही देर बाद दो संदिग्ध लोग सीसीटीवी में फ्लैट की तरफ जाते दिखाई दिए।
पुलिस का कहना है कि दोनों कथित तौर पर घर के भीतर दाखिल हुए और विनीत के वापस आने का इंतजार करने लगे। दावा है कि वे करीब सवा घंटे तक फ्लैट के अंदर रहे। रात करीब 10 बजकर 58 मिनट पर विनीत घर लौटे। इसके बाद कुछ ही समय में उन पर हमला कर दिया गया। यहीं से केस में एक बड़ा सवाल उठा। अगर बाहर से कोई हमलावर आया था तो उसे घर के अंदर पहुंचने और इतने लंबे समय तक इंतजार करने की जानकारी कैसे थी?
सोते वक्त हत्या का था प्लान, लेकिन अचानक बदला घटनाक्रम
पुलिस के मुताबिक शुरुआती योजना विनीत को सोते समय तकिए से दबाकर मारने की थी। कथित तौर पर मकसद यह था कि मौत सामान्य या हार्ट अटैक जैसी लगे और हत्या का शक न हो। लेकिन घर लौटने के बाद घटनाक्रम बदल गया। पुलिस की जांच में सामने आया कि विनीत बच्चों के कमरे की तरफ चले गए।
दरवाजा खुला था और कथित तौर पर दोनों आरोपी वहीं मौजूद थे। इसके बाद दोनों ने उन पर चाकू से हमला कर दिया। विनीत के गले, सीने और शरीर के दूसरे हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं। हमले के बाद दोनों आरोपी वहां से निकल गए।
CCTV से खुली पहली कड़ी, पुराने नौकर तक पहुंची पुलिस
हत्या के बाद पुलिस ने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। इसी दौरान दो संदिग्धों की गतिविधियां सामने आईं। जांच आगे बढ़ी तो एक संदिग्ध की पहचान विशाल के तौर पर होने का दावा किया गया।
विशाल कभी विनीत के घर पर काम करता था। पुलिस के मुताबिक करीब छह साल पहले चोरी के आरोप में उसे नौकरी से निकाल दिया गया था। लेकिन परिवार से उसका पुराना परिचय पूरी तरह खत्म नहीं हुआ था।
यही कड़ी जांच में अहम बन गई। पुलिस का दावा है कि विशाल को घर की बनावट, परिवार की दिनचर्या और आने-जाने के तरीके की जानकारी थी। यानी अगर आरोप सही साबित होते हैं तो वह किसी बाहरी हमलावर के मुकाबले घर के बारे में काफी ज्यादा जानता था।
इसके बाद जांच फ्लैट की चाबी तक पहुंची। पुलिस के मुताबिक विशाल के पास घर की डुप्लीकेट चाबी थी और इसी के जरिए वह अपने साथी राजकिशोर के साथ अंदर दाखिल हुआ। पुलिस ने यह भी दावा किया है कि हत्या के लिए इस्तेमाल हथियार और आरोपियों के कपड़ों से जुड़े कुछ सुराग जुटाए गए हैं। इन साक्ष्यों को दूसरे इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक सबूतों के साथ मिलाकर देखा जा रहा है।
अगर डुप्लीकेट चाबी से जुड़ा पुलिस का दावा अदालत में साबित होता है तो यह केस की सबसे अहम कड़ियों में से एक होगा। क्योंकि तब यह सिर्फ घर में घुसकर की गई वारदात नहीं रहेगी। इससे पहले से तैयारी किए जाने का आरोप और मजबूत हो सकता है।

6 लाख की कथित सुपारी ने बदला केस का एंगल
हत्या के बाद पुलिस के सामने एक और सवाल था। आखिर विनीत को मारने की जरूरत क्यों पड़ी? घर से बड़ी मात्रा में नकदी या कीमती सामान गायब नहीं हुआ था। ऐसे में पुलिस ने सिर्फ लूट की दिशा में जांच आगे नहीं बढ़ाई। जांच में कथित तौर पर छह लाख रुपये में हत्या की सुपारी तय होने की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक दो लाख रुपये हत्या के दिन देने और बाकी चार लाख रुपये करीब 15 दिन बाद देने की बात थी। यह दावा आरोपियों से पूछताछ के आधार पर सामने आया है। इसे अदालत में स्वतंत्र साक्ष्यों से साबित करना होगा।
विनीत मिनोचा दवा कारोबार से जुड़े थे और परिवार आर्थिक रूप से संपन्न बताया जाता है। पुलिस की जांच में पैसों और खर्च को लेकर परिवार के भीतर तनाव का एंगल भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक विनीत बेटे और बहू के खर्च को लेकर सख्त थे। बेटे को सीमित पैसे दिए जाने की बात भी जांच में सामने आने का दावा किया गया है। इतना ही नहीं, पुलिस का कहना है कि विनीत घर में लगे सीसीटीवी के जरिए बहू की गतिविधियों पर नजर रखते थे।
जांच एजेंसी का दावा है कि इसी कथित नाराजगी ने आगे चलकर हत्या की साजिश का रूप लिया। लेकिन यहां भी एक बात साफ है। परिवार में तनाव होना अपने आप में हत्या की साजिश साबित नहीं करता। इसके लिए पुलिस को दूसरे साक्ष्यों की कड़ी भी अदालत के सामने रखनी होगी।
गार्ड को फोन, बिना एंट्री अंदर आने का आरोप
जांच में अपार्टमेंट के सुरक्षा गार्ड मदन सिंह से पूछताछ भी की गई। पुलिस के मुताबिक वारदात से पहले गार्ड को फोन किया गया था और एक व्यक्ति के दोस्त के साथ आने की जानकारी दी गई थी।
आरोप है कि उसे अंदर जाने देने और रजिस्टर में एंट्री नहीं करने को कहा गया। पुलिस अब इस दावे को सीसीटीवी और कॉल डिटेल रिकॉर्ड से मिलाकर देख रही है। अगर कॉल रिकॉर्ड, सीसीटीवी और गार्ड का बयान एक-दूसरे से मेल खाते हैं तो यह साजिश की टाइमलाइन को समझने में बड़ी कड़ी बन सकती है।

ससुर की मौत पर रोती दिखी बहू, फिर जांच की दिशा उसी तक पहुंची
विनीत की हत्या के बाद जब सुब्रत और शालू घर लौटे तो अंदर का मंजर देखकर परिवार में चीख-पुकार मच गई। शालू भी ससुर की मौत पर रोती-बिलखती नजर आईं। उस वक्त जांच का रुख परिवार की बहू की तरफ नहीं था। लेकिन पुलिस ने सीसीटीवी, मोबाइल संपर्क, आरोपियों की आवाजाही और घटनाक्रम की टाइमलाइन को जोड़ना शुरू किया।
इसके बाद गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में शालू का नाम सामने आने का दावा किया गया। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने कथित तौर पर कहा कि उन्हें हत्या के लिए परिवार की तरफ से निर्देश मिले थे। लेकिन पुलिस के सामने आरोपी का बयान अकेले किसी व्यक्ति को दोषी साबित नहीं करता।
पुलिस के 15 सवालों में क्या हुआ?
- पुलिस के मुताबिक शालू से पूछताछ के दौरान उन्होंने शुरुआत में किसी भी साजिश में शामिल होने से इनकार किया। बाद में परिवार के सदस्यों, आरोपियों और सुरक्षा गार्ड के सामने आमना-सामना कराया गया।
- पुलिस सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक पूछताछ के दौरान शालू से लगातार सवाल किए गए। कथित तौर पर सीसीटीवी, कॉल डिटेल और चाबी से जुड़े सवालों के बाद वह जवाब देने में असहज हुईं।
- पूछताछ में पुलिस ने कथित तौर पर कहा, "विशाल ने बताया है कि हत्या आपके कहने पर हुई।" शालू ने इसे गलत बताते हुए कहा कि विशाल झूठ बोल रहा है।
- डुप्लीकेट चाबी को लेकर सवाल हुआ तो पुलिस ने कथित तौर पर पूछा, "क्या घर की असली चाबी आपने विशाल को दी थी, ताकि उसकी दूसरी चाबी बन सके?" शालू ने इससे इनकार किया।
- छह लाख रुपये की कथित सुपारी पर भी सवाल किया गया। जवाब में उन्होंने कथित तौर पर कहा, "अगर मैंने पैसे दिए होते तो उनकी बरामदगी भी होनी चाहिए। सिर्फ किसी के कहने से यह साबित नहीं होता कि मैंने सुपारी दी।"
- इसके बाद गार्ड को फोन करने, विशाल से मुलाकात और लगातार मोबाइल संपर्क को लेकर सवाल किए गए। पुलिस के मुताबिक इन सवालों पर शालू की तरफ से स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
- पुलिस ने सीसीटीवी और दूसरे सुरागों के आधार पर विशाल और राजकिशोर की तलाश शुरू की। पुलिस के मुताबिक जवाहरपुरम इलाके के आसपास दोनों से मुठभेड़ हुई। दोनों के पैरों में गोली लगने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
- पूछताछ में पुलिस को हत्या की कथित योजना से जुड़े सुराग मिलने का दावा किया गया। इसके बाद जांच तेजी से आगे बढ़ी और शालू को भी आरोपी बना दिया गया।
विशाल ने क्यों लिया सुब्रत का नाम?
जांच में विशाल के बयान का एक और हिस्सा सामने आया है। उसके मुताबिक हत्या की कथित साजिश शालू ने तैयार की थी और छह लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। दावा है कि दो लाख रुपये हत्या के दिन और चार लाख रुपये 15 दिन बाद देने की बात हुई थी।
विशाल ने कथित तौर पर यह भी कहा कि अगर वह पकड़ा जाए तो शालू का नाम न लेकर उसके पति सुब्रत को जिम्मेदार बताया जाए। हालांकि विशाल ने पुलिस के सामने कथित तौर पर कहा कि उसने सुब्रत का नाम लेने से इनकार कर दिया क्योंकि वह उसे अच्छा इंसान मानता था। यह बयान भी फिलहाल जांच का हिस्सा है।
अब तीन नामों के इर्द-गिर्द घूम रही पूरी मर्डर मिस्ट्री
इस समय पुलिस की जांच में तीन नाम सबसे ज्यादा सामने आ रहे हैं। पहला शालू, जिन पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है। दूसरा विशाल, जो विनीत के घर में पहले काम कर चुका था और जिस पर हत्या को अंजाम देने का आरोप है। तीसरा राजकिशोर, जिसे पुलिस कथित तौर पर वारदात में विशाल का साथी मान रही है।
इस केस की सबसे चौंकाने वाली कड़ी यही है कि जांच बाहर से शुरू हुई और परिवार के भीतर पहुंच गई। सीसीटीवी से संदिग्धों की पहचान हुई। पुराने नौकर का कनेक्शन सामने आया। डुप्लीकेट चाबी की बात सामने आई। फिर छह लाख रुपये की कथित सुपारी और परिवार के भीतर पैसों को लेकर तनाव का एंगल जुड़ गया।
अब असली सवाल यह है कि क्या इन सभी कड़ियों को जोड़कर पुलिस अदालत में हत्या की पूरी साजिश साबित कर पाएगी? फिलहाल शालू और दूसरे आरोपियों पर लगे आरोप जांच का हिस्सा हैं। अंतिम फैसला अदालत को करना है।