ईरान के पास परमाणु बम होता तो सुप्रीम लीडर को सर कहते ट्रंप, पूछते- मेरे लायक कोई काम है
Sep 10, 2026 06:54 pm ISTलाइव हिन्दुस्तान

डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि अगर उन्होंने ईरान के ऊपर B2 बॉम्बर से हमला न किया होता, तो आज ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार होता। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता, तो वह आज बमबारी करने की बजाय सुप्रीम लीडर को सर कह रहे होते।
डोनाल्ड ट्रंप बोले ईरान पर हमला करके रोका परमाणु कार्यक्रम
Donald Trump: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच लगातार जंग जारी है। लगातार होते छोटे-बड़े हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान सामने आया है। इसमें वह दावा करते हैं कि अमेरिकी वायु सेना ने B-2 बॉम्बर प्लेन के जरिए ईरान पर बम नहीं गिराए होते, तो आज तेहरान के पास परमाणु बम होता। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होता, तो उन्हें ईरानी सुप्रीम लीडर को 'सर' कहना पड़ता।
अमेरिका के डलास में मिड टर्म इलेक्शन के लिए कैंपेन करते हुए ट्रंप ने ईरान युद्ध का जिक्र किया। ईरान जंग से नाराज अमेरिकी लोगों का भरोसा बढ़ाते हुए ट्रंप ने तेहरान के आसपास की गई बमबारी के महत्व को बताया। ट्रंप ने कहा, "अगर हमने न्यूक्लियर संधि रद्द करके उनके (ईरान के) ऊपर अपने खूबसूरत B-2 बॉम्बर्स से हमला न किया होता, तो आज उनके पास न्यूक्लियर हथियार होता और मैं उन्हें सुप्रीम लीडर सर कह रहा होता।"
मैं कहता सुप्रीम लीडर सर मेरे लायक कोई काम है क्या?- ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमने उस जगह को तबाह कर दिया। ट्रंप ने कहा, "न्यूक्लियर बम होने पर उन बर बमबारी करने की बजाय मैं कहता मिस्टर सुप्रीम लीडर सर आप कैसे हैं? लेकिन अब मुझे ऐसा करने की जरूरत नहीं है।" गौरतलब है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में दुनिया के सबसे बड़े विध्वंसक बॉम्बर प्लेन बी-2 ने ईरान की तथाकथित परमाणु बम फैसेलिटी पर बमबारी की थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक पहाड़ों के बीच बसी इस जगह पर अमेरिकी सेना ने कई टन वजनी बॉम्ब से हमला किया था। इससे ईरान को काफी नुकसान उठाना पड़ा था।
यूरोप पर परमाणु बम गिरा सकता था ईरान- डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार आ जाता, तो यह यूरोप के लिए एक बड़े खतरे की घंटी होता। उन्होंने कहा कि वह सबसे पहले यूरोप को ही निशाना बनाता। ट्रंप ने कहा, "ईरान चीन या रूस जैसी सिर्फ एक बुरी तानाशाही शक्ति नहीं है। वह एक चरमपंथी मजहबी तानाशाही हैं। वह यूरोप के ऊपर भी बम गिरा सकते हैं। हम ईरान में जो कुछ भी कर रहे हैं। उससे बहुत सी जानें बच जाएंगी। अब वह ऐसा कुछ नहीं कर पाएंगे।" गौरतलब है कि अमेरिका की तरफ से हर बार यह तर्क दिया जाता रहा है कि ईरान से उसे सीधे तौर पर कोई खतरा नहीं है। लेकिन मध्य एशिया में इजरायल और यूरोप ईरान की मिसाइलों की पहुंच में आते हैं। ऐसे में अगर ईरान परमाणु हथियार तक पहुंच बनाता है, तो यह यूरोप और इजरायल के लिए खतरा होगा।
ट्रंप बोले- लोग कहते हैं काश आपने ईरान में युद्ध न किया होता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरुआत से ही लंबे युद्धों के खिलाफ रहे हैं। ईरान युद्ध को लेकर भी उनकी मंशा इसे खींचने की नहीं बल्कि जल्दी खत्म करने की थी। ट्रंप के समर्थक भी युद्ध विरोधी ही माने जाते हैं। लेकिन अब जबकि ईरान में अमेरिका फंसता हुआ नजर आ रहा है, तो मिड टर्म इलेक्शन के पहले ट्रंप ने समर्थकों का भरोसा दोबारा जीतने की कोशिश की। उन्होंने कहा, "मेरे साथ अकसर ऐसा होता है। लोग मेरे पास आते हैं और कहते हैं कि 'काश आपने ईरान में युद्ध न किया होता। पेट्रोल महंगा हो गया है।' ऐसे में मैं उनसे एक ही बात कहता हूं कि क्या आप चाहते हैं कि परमाणु हथियार हो? बिल्कुल नहीं।" ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान अमेरिकी राजनीति पर असर डालने के लिए इस युद्ध को लंबा खींच रहा है। लेकिन वह ऐसा नहीं होने देंगे। इलेक्शन खत्म होने के कुछ दिन बाद ही यह युद्ध भी खत्म हो जाएगा।
परमाणु हथियार ही सुरक्षा का रास्ता?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब दुनिया में दो ऐसे युद्ध जारी हैं जहां परमाणु संपन्न देश गैर परमाणु देशों पर हमला कर रहे हैं। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध जारी है। दूसरी तरफ अमेरिका भी पहले वेनेजुएला और अब ईरान पर अपनी मनमर्जी चलाता दिख रहा है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या परमाणु हथियार ही सुरक्षा का उपाय है? इसका जवाब हाल ही में कजाखिस्तान के राष्ट्रपति और पुतिन के बीच हुई एक मजाकिया बातचीत में भी सामने आया था। उस समय पर कजाख राष्ट्रपति तोकायेव ने कहा कि अब परमाणु हथियार सुरक्षा की गारंटी नहीं हैं। इस पर साथ बैठे रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने चुटकी ली कि सद्दाम हुसैन भी यही मानते थे। बता दें, इराक के नेता सद्दाम हुसैन भी अमेरिका के साथ युद्ध के दौरान मारे गए थे। दूसरी तरफ सोवियत संघ से अलग होने वाले यूक्रेन ने भी पश्चिमी देशों और रूस द्वारा सैन्य मदद का भरोसा मिलने पर अपने परमाणु हथियारों का त्याग कर दिया था।