लाहौल-स्पीति की ‘सुपर बेरी’ बनी पर्यटकों की पसंद, सीबकथोर्न जूस की बढ़ी मांग
September 14, 2026

हिमाचल प्रदेश: लाहौल-स्पीति में इन दिनों ‘सुपर बेरी’ के नाम से मशहूर सीबकथोर्न की तुड़ान का काम जोरों पर है। पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली इस छोटी नारंगी रंग की बेरी को अब ग्रामीण व्यावसायिक रूप से भी उगाने लगे हैं। सीबकथोर्न से तैयार जूस की मांग स्थानीय बाजार के साथ-साथ बाहर से आने वाले पर्यटकों के बीच भी बढ़ रही है।
जंगलों से बगीचों तक पहुंचा सीबकथोर्न
सीबकथोर्न लंबे समय से लाहौल-स्पीति के जंगली इलाकों में पाया जाता है। इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए अब स्थानीय लोग इसे अपने खेतों और बगीचों में भी लगाने लगे हैं। इससे जहां इस पारंपरिक पहाड़ी फल का उत्पादन बढ़ रहा है, वहीं ग्रामीणों के लिए कमाई का एक नया जरिया भी तैयार हुआ है।
जिस्पा और पट्टन वैली समेत लाहौल के कई क्षेत्रों में इन दिनों ग्रामीण सीबकथोर्न की बेरीज इकट्ठा कर उन्हें जूस और अन्य उत्पादों के लिए तैयार कर रहे हैं।
कांटों के बीच महिलाएं कर रहीं कड़ी मेहनत
सीबकथोर्न की तुड़ान आसान काम नहीं है। इसके पौधों में काफी कांटे होते हैं, जिसके कारण एक-एक बेरी को तोड़ने में महिलाओं को काफी मेहनत करनी पड़ती है। जिस्पा की रहने वाली कुसुम के मुताबिक, क्षेत्र की महिलाएं पिछले करीब 10 दिनों से सीबकथोर्न की तुड़ान में जुटी हुई हैं।
लगातार कांटों के बीच काम करने से कई बार महिलाओं के हाथों में चोट और सूजन भी हो जाती है। पूरे दिन मेहनत करने के बाद भी सीमित मात्रा में ही बेरी इकट्ठी हो पाती है और उससे करीब एक से दो लीटर तक जूस तैयार हो पाता है।
10 बीघा में लगाए 900 पौधे
खंगसर निवासी अमर ने सीबकथोर्न की खेती को बड़े स्तर पर शुरू किया है। उन्होंने करीब 10 बीघा जमीन में लगभग 900 पौधों का बगीचा तैयार किया है। उनके मुताबिक पिछले साल इस बगीचे से करीब 100 लीटर सीबकथोर्न जूस तैयार हुआ था।
इस वर्ष फसल अपेक्षाकृत कम होने की वजह से उन्हें करीब 60 से 70 लीटर जूस उत्पादन की उम्मीद है। उनका कहना है कि सीबकथोर्न को GI टैग मिलने के बाद बाजार में इसकी पहचान और मांग दोनों बढ़ी हैं।
पर्यटक भी खरीद रहे सीबकथोर्न जूस
लाहौल-स्पीति घूमने पहुंच रहे बाहरी राज्यों के पर्यटक भी सीबकथोर्न से बने जूस और अन्य उत्पादों में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले जंगलों से मिलने वाली इस बेरी का इस्तेमाल मुख्य रूप से ग्रामीण अपने घरों के लिए करते थे, लेकिन अब इसकी व्यावसायिक मांग तेजी से बढ़ रही है।
स्थानीय निवासी राजीव के मुताबिक, GI टैग मिलने के बाद सीबकथोर्न को लेकर लोगों की रुचि बढ़ी है। बाहर से आने वाले पर्यटक भी इसे खरीद रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को अपनी उपज का बेहतर बाजार मिल रहा है।
विटामिन-C से भरपूर माना जाता है सीबकथोर्न
सीबकथोर्न को पोषक तत्वों से भरपूर पहाड़ी फल माना जाता है। स्थानीय स्तर पर इसके जूस को खास तौर पर विटामिन-C का अच्छा स्रोत बताया जाता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के बीच भी इसकी मांग बढ़ रही है।
📍 Location: Lahaul (Lahaul)