आदिवासी महिला के उत्तराधिकार व म्यूटेशन विवाद - हाईकोर्ट ने एकल पीठ का आदेश किया रद्द

Published on 15 सित॰ 2026

Ranchi News: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के नामकुम अंचल स्थित 5.13 एकड़ जमीन के म्यूटेशन से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए एकल पीठ के आदेश को रद्द कर दिया है. हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने रॉबर्ट एंथनी बारला की ओर से दायर एलपीए को स्वीकार करते हुए 15 अक्टूबर 2025 को एकल पीठ द्वारा पारित आदेश को निरस्त कर दिया. खंडपीठ ने निजी प्रतिवादियों को संबंधित जमीन को लेकर लंबित टाइटल सूट में अपना दावा रखने की छूट दी है.


मामला रांची के मौजा-गुंडू, थाना-हटिया की खाता संख्या 16 की जमीन से संबंधित है. कुल 26.53 एकड़ जमीन वर्ष 1944 में विरोनिका तिर्की ने रजिस्टर्ड सेल डीड के माध्यम से खरीदी थी. इसमें से 8.80 एकड़ जमीन रोमन कैथोलिक मिशन को दान कर दी गयी. विरोनिका तिर्की की वर्ष 1983 में मृत्यु के बाद उनके चार पुत्रों ने शेष 17.73 एकड़ जमीन का पारिवारिक बंटवारा कर लिया. इसमें 5.13 एकड़ जमीन जॉन फ्रांसिस कुजूर के हिस्से में आयी.

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जॉन फ्रांसिस कुजूर की मृत्यु के बाद वर्ष 1992 में उक्त जमीन का सक्सेशन म्यूटेशन उनकी पत्नी डॉ लुइसा बारला कुजूर के नाम हुआ. उनके नाम म्यूटेशन को रद्द कराने के लिए जॉन के भाइयों ने जमाबंदी केस दायर किया था, जिसे वर्ष 2007 में खारिज कर दिया गया.


बाद में डॉ लुइसा बारला कुजूर की मृत्यु के बाद उनके कथित दत्तक पुत्र रॉबर्ट एंथनी बारला ने जमीन के लिए सक्सेशन म्यूटेशन का आवेदन दिया. नामकुम के अंचल अधिकारी ने 16 जनवरी 2017 को म्यूटेशन उनके नाम कर दिया. इसके खिलाफ अपील और रिवीजन भी खारिज हो गयी. हालांकि  निजी प्रतिवादियों की ओर से दायर रिट याचिका पर एकल पीठ ने राजस्व अधिकारियों के तीनों आदेशों को रद्द कर दिया था.


खंडपीठ ने माना - म्यूटेशन ट्रांसफर नहीं, सक्सेशन के आधार पर हुआ था

खंडपीठ ने रिकॉर्ड देखने के बाद पाया कि एकल पीठ ने इस तथ्य को गलत समझा कि रॉबर्ट बारला के पक्ष में म्यूटेशन ‘ट्रांसफर’ के आधार पर किया गया था. जबकि म्यूटेशन आवेदन और संबंधित दस्तावेजों से स्पष्ट था कि आवेदन सक्सेशन म्यूटेशन के लिए किया गया था.


अदालत ने कहा कि म्यूटेशन केस में 16 जनवरी 2017 के आदेश में जमीन को बेचने और सेल डीड का उल्लेख होना टाइपिंग या अनजाने में हुई त्रुटि प्रतीत होती है. बाद में जारी करेक्शन स्लिप में भी ‘टाइप ऑफ चेंज’ के कॉलम में स्पष्ट रूप से ‘By Succession’ दर्ज था.


राजस्व कर्मचारी की रिपोर्ट में भी रॉबर्ट बारला को लुइस बारला कुजूर का एकमात्र कानूनी उत्तराधिकारी और जमीन पर कब्जे में बताया गया था. इसी रिपोर्ट के आधार पर अंचल अधिकारी ने म्यूटेशन किया था.


अदालत ने कहा कि निजी प्रतिवादियों और अपीलकर्ता के बीच जमीन के अधिकार और स्वामित्व को लेकर विवाद है. इस विवाद का उचित मंच सिविल कोर्ट है. चूंकि संबंधित टाइटल सूट पहले से लंबित है, इसलिए निजी प्रतिवादी उसमें अपना दावा और अधिकार साबित कर सकते हैं.

अदालत ने स्पष्ट किया कि भूमि अभिलेखों में पारदर्शिता और उचित रखरखाव के लिए राजस्व अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन म्यूटेशन आवेदन पर जोर देना धारा 11 का उल्लंघन नहीं है और न ही यह उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है.

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