अफ़ग़ानिस्तान: ‘जहाँ महिला होना ही मानो अपराध है’

Published on 17 सित॰ 2026

अफ़ग़ानिस्तान: ‘जहाँ महिला होना ही मानो अपराध है’

अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) की कार्यवाहक प्रमुख जॉर्जेट गैगनॉन ने कहा कि तालेबान की नीतियों के कारण देश की पुनर्बहाली के लिए ज़रूरी प्रतिभा और उत्पादक क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है.

पिछले एक वर्ष में अफ़ग़ान महिलाओं के नेतृत्व वाले तीन-चौथाई संगठनों की वित्तीय सहायता घटी है,  जबकि 80 प्रतिशत से अधिक संगठनों ने महिलाओं और लड़कियों की ज़रूरतों में वृद्धि की जानकारी दी है.

उन्होंने कहा, “महिलाओं और लड़कियों को बाहर रखकर समृद्ध और आत्मनिर्भर अफ़ग़ानिस्तान का निर्माण सम्भव नहीं है.”

‘महिला होना अपराध है’

2021 में तालेबान के सत्ता में लौटने के बाद से 20 लाख से अधिक अफ़ग़ान लड़कियों और महिलाओं को माध्यमिक और उच्च शिक्षा से वंचित कर दिया गया है.

FARAGEER की संस्थापक और कार्यकारी निदेशक नरगिस नेहान ने सुरक्षा परिषद को बताया, “महिला होना ही अपराध है, और अफ़ग़ानिस्तान में महिला के रूप में जन्म लेना उससे भी बड़ा अपराध है.”

महिलाओं और पुरुषों को पहनावे के सख़्त नियमों, दाढ़ी की लम्बाई और संगीत बजाने या सुनने पर लगी पाबन्दियों के कथित उल्लंघनों के आरोप में भी गिरफ़्तार किया जा रहा है.

मीडिया पर सेंसरशिप, समाचार संस्थानों को अस्थाई रूप से बन्द किया जाना और पत्रकारों की गिरफ़्तारियाँ भी जारी हैं. संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस वर्ष की पहली छमाही में कम से कम 449 महिलाओं और पुरुषों को शारीरिक दंड दिया गया.

नरगिस नेहान ने जवाबदेही बढ़ाने, अधिक समावेशी राजनैतिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने और 1.7 अरब डॉलर की मानवतावादी कार्रवाई योजना के लिए पूर्ण वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की अपील की.

स्थिरता का अर्थ पुनर्बहाली नहीं

जॉर्जेट गैगनॉन ने सुरक्षा परिषद में कहा कि बड़े पैमाने पर हिंसक टकराव का अन्त हो जाना, टिकाऊ शान्ति स्थापित होने का संकेत नहीं है.

उन्होंने कहा, “शान्ति केवल सशस्त्र हिंसा का अभाव नहीं है. टिकाऊ शान्ति के लिए गरिमा, समावेशन, अवसर और उम्मीद ज़रूरी हैं.”

उन्होंने यह भी कहा कि “व्यापक आर्थिक स्थिरता का अर्थ आर्थिक पुनर्बहाली नहीं है.”

देश में खाद्य असुरक्षा, कुपोषण और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिन्ताएँ गम्भीर बनी हुई हैं. वहीं, 2026 की मानवतावादी कार्रवाई योजना के लिए आवश्यक 1.7 अरब डॉलर में से अब तक केवल 51.3 करोड़ डॉलर ही मिले हैं, यानी कुल ज़रूरत का 29.9 प्रतिशत.

सुरक्षा परिषद में चिन्ता

अमेरिका के प्रतिनिधि ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान दुनिया का एकमात्र देश है, जहाँ लड़कियों और महिलाओं को उच्च शिक्षा से वंचित रखा गया है.

उन्होंने कहा कि 20 वर्षों की प्रगति के बाद, “अब वह दरवाज़ा उनके लिए बन्द कर दिया गया है.”

“इस परिषद को तालेबान शासन से ठोस नतीजों की मांग करनी चाहिए.”

पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने तालेबान की पाबन्दियों को इस्लामी सिद्धान्तों के विपरीत बताते हुए कहा कि पिछले तीन वर्षों में अफ़ग़ानिस्तान से संचालित आतंकवाद में 4,700 पाकिस्तानी मारे गए हैं.

चीन के प्रतिनिधि ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों पर पाबन्दियाँ सामाजिक स्थिरता और विकास की सम्भावनाओं को कमज़ोर कर रही हैं. वहीं, रूस ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के साथ व्यावहारिक सम्पर्क और संवाद का “कोई विकल्प नहीं” है.

जॉर्जेट गैगनॉन ने ज़ोर देकर कहा कि संवाद का अर्थ तालेबान की नीतियों को स्वीकार करना नहीं है.

उन्होंने कहा, “सम्पर्क बनाए रखने का मतलब स्वीकृति नहीं है. संवाद के ज़रिए ही अन्तरराष्ट्रीय समुदाय अपना प्रभाव बनाए रख सकता है, जोखिम कम कर सकता है और प्रगति के अवसर पैदा कर सकता है.”

© UN Photo/Eskinder Debebe अफ़ग़ानिस्तान के लिए संयुक्त राष्ट्र की उप विशेष प्रतिनिधि और UNAMA की कार्यवाहक प्रमुख, जॉर्जेट गैगनॉन, अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पर सुरक्षा परिषद की बैठक को सम्बोधित करते हुए.

बैठक में तालेबान से महिलाओं के अधिकार बहाल करने, संयुक्त राष्ट्र की महिला कर्मचारियों को काम करने की अनुमति देने, अधिक समावेशी शासन व्यवस्था विकसित करने और आतंकवाद-रोधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने की अपील की गई.

दानदाताओं से मानवीय सहायता के लिए वित्तीय समर्थन बनाए रखने का आग्रह किया गया, जबकि संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद से सिद्धान्तों पर आधारित सम्पर्क, जवाबदेही के प्रयास और राजनैतिक संवाद को समर्थन जारी रखने की मांग की गई.

संयुक्त राष्ट्र की कार्रवाई

  • आजीविका: कंधार में संयुक्त राष्ट्र एजेंसियाँ किसानों को कृषि सामग्री और तकनीकी सहायता देकर टिकाऊ आजीविका विकसित करने में मदद कर रही हैं, विशेषकर उन परिवारों को जो पहले अफ़ीम की खेती पर निर्भर थे.
  • महिलाओं का स्वास्थ्य: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), प्रसूति फ़िस्टुला के विशेष उपचार तक महिलाओं की पहुँच बढ़ाने में मदद कर रहा है. इसमें सर्जरी, परामर्श और उपचार के बाद की देखभाल शामिल है.
  • स्वास्थ्य सेवाएँ: यूनीसेफ़ ने महिलाओं और बच्चों सहित 60 लाख से अधिक लोगों तक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाने में मदद की है.
अफ़ग़ानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र के प्रयासों के बारे में अधिक जानकारी यहाँ उपलब्ध है.