बर्लिन में 20 सितंबर के चुनाव में इस बार सबसे बड़ा मुद्दा है, रहने के लिए घरों की कमी और लगातार बढ़ता किराया. एक तरफ लोग खाली पड़े मशहूर एयरपोर्ट को पार्क बनाए रखना चाहते हैं, वहीं बिल्डरों की नजर वहां घर बनाने पर है.
बर्लिनवासी अक्सर शहर के बीचो बीच मौजूद विशाल मैदान 'टेम्पेलहोफर' एयरफील्ड में साइकिल चलाते हैं, पिकनिक मनाते हैं और पतंग उड़ाते हैं. यह जगह 2010 में एक पार्क के रूप में खुली थी. लेकिन अब बिल्डरों की नजर इस ऐतिहासिक जगह पर है. रविवार, 20 सितंबर को होने वाले चुनाव से पहले इस जगह पर घर बनाने का मुद्दा भी चर्चा के केंद्र में है.
जर्मनी के बाकी राज्यों के चुनावों में प्रवासन सबसे बड़ा मुद्दा रहा है, जिसने धुर दक्षिणपंथी पार्टी 'ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) को काफी समर्थन भी दिलाया. लेकिन बर्लिन की कहानी अलग है. यहां 85 प्रतिशत परिवार किराये के घरों में रहते हैं, इसलिए वोटरों की सबसे बड़ी चिंता घर और उनका किराया है.
आंकड़े दिखाते हैं कि शहर को 2040 तक 2.11 लाख और नए घरों की जरूरत होगी. 2014 के बाद से यहां किराया लगभग दोगुना हो चुका है. इसकी वजह से शहर की सरकार के खिलाफ लोगों में भारी गुस्सा है. बर्लिन में मौजूद सरकार 'क्रिश्चियन डेमोक्रेट्स' (सीडीयू) और 'सोशल डेमोक्रेट्स' (एसपीडी) के गठबंधन से चल रही है.
चांसलर मैर्त्स के लिए एक और बड़ा टेस्ट
20 सितंबर को होने वाला चुनाव चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की संघर्षरत सरकार के लिए समर्थन का एक और टेस्ट है. यह चुनाव पूर्वी राज्य सैक्सनी-अनहाल्ट में एएफडी की जीत के ठीक दो हफ्ते बाद हो रहा है. इसके अलावा, पड़ोसी राज्य मेक्लनबुर्ग-वेस्टर्न पोमेरेनिया में भी 20 सितंबर को ही वोट डाले जाने हैं.
11 सितंबर को 'फोरशुंग्सग्रुप्पे वालेन' के ताजा सर्वे के अनुसार, वामपंथी लेफ्ट पार्टी (डी लिंके) 23 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है. चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की पार्टी सीडीयू 21 प्रतिशत पर है और एएफडी करीब 17 प्रतिशत के साथ एसपीडी और पर्यावरणवादी 'ग्रीन्स' पार्टी से आगे चल रही है.
डीडब्ल्यू हिंदी से बात करते हुए लेफ्ट पार्टी के जनरल सेक्रेटरी यानिस एलिंग ने कहा, "जीवनयापन की लागत लगातार बढ़ रही है और हम कह रहे हैं कि इसे कम होना चाहिए. और दूसरी बात यह है कि घरों का किराया लगातार बढ़ रहा है और उसे भी कम होना चाहिए. शहर तेजी से मैला होता जा रहा है और हम एक साफ-सुथरा शहर चाहते हैं. मुझे लगता है कि हम बर्लिनवासियों को इस बात पर आकर्षित कर रहे हैं."
एएफडी ने बर्लिन के 'हाउसिंग संकट' को इमिग्रेशन रोकने के तर्क से जोड़ दिया है. वहीं, लेफ्ट पार्टी कई बड़े वादे कर रही है - जैसे सस्ते नए घर बनाना, एक साल तक किराये पर रोक लगाना और फिर बढ़ोतरी को एक फीसदी तक सीमित करना. इसके अलावा, पार्टी स्थानीय औसत से 20 फीसदी ज्यादा किराये को जबरन कम करने, हाउसिंग ब्लॉक में हॉलिडे रेंटल पर रोक लगाने और शहर के बीच में खाली होने वाले फ्लैट्स उन लोगों को देने का वादा कर रही है जिन्हें 'सोशल हाउसिंग' का अधिकार है.
दिलचस्प बात यह है कि 2023 में हुए बर्लिन के पिछले चुनाव के बाद से लेफ्ट पार्टी और एएफडी, दोनों का समर्थन लगभग दोगुना हो गया है.
चर्चा के केंद्र में एयरपोर्ट से पब्लिक पार्क बना 'टेम्पेलहोफर फेल्ड'
टेम्पेलहोफर फेल्ड, लंदन के हाइड पार्क से लगभग दोगुना बड़ा है और दुनिया के सबसे बड़े शहरी खुले मैदानों में से एक है. इसका भविष्य इस बात का प्रतीक बन गया है कि लोगों को ज्यादा घर चाहिए या शहर को अपनी सार्वजनिक हरियाली बचानी चाहिए.
1920 के दशक के इस मूल एयरपोर्ट का विस्तार नाजियों ने किया था. दूसरे विश्व युद्ध के बाद, 1948-49 के 'बर्लिन एयरलिफ्ट' के दौरान यह शहर के लिए जीवनरेखा बन गया था, जब पश्चिमी देशों ने नाकेबंदी वाले इस शहर को हवाई रास्ते से रसद पहुंचाई थी.
यह एयरपोर्ट 2008 में बंद हो गया. इसके पार्क के रूप में खुलने के चार साल बाद, एक जनमत संग्रह हुआ था, जिसमें लगभग दो तिहाई बर्लिनवासियों ने इस जगह को किसी भी तरह के निर्माण से मुक्त रखने के लिए वोट दिया था.
सीडीयू, एएफडीपी और एएफडी टेम्पेलहोफ फील्ड के कुछ हिस्सों में सीमित घर बनाने का समर्थन करती हैं. जबकि एसपीडी, ग्रीन्स और लेफ्ट पार्टी वहां किसी भी तरह के निर्माण का विरोध करती हैं और इसके बजाय दूसरी जगहों को विकसित करने के पक्ष में हैं.
बर्लिन सीडीयू के प्रमुख उम्मीदवार स्टेफान एवर्स ने डीडब्ल्यू हिंदी को दिए इंटरव्यू में कहा, "आने वाले सालों के लिए किफायती आवास हमारी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक है. हमने इसी कारण से कई कानूनों में बदलाव किए हैं. हमने चीजों को गति दी है, उन्हें आसान बनाया है और सस्ता किया है. हमने उन्हें अधिक किफायती बनाया है. और अभी आने वाले वर्षों में हम शहर में 24 नए क्वार्टर बनाने के सपने को साकार करना चाहते हैं और हमें इसमें तेजी लानी होगी. हम बर्लिन के लिए 2 लाख अतिरिक्त फ्लैटों, अतिरिक्त घरों के लिए काम कर रहे हैं"
घर ढूंढने में होते हैं कई तरह के स्कैम
5 सितंबर को, ऊंचे किराये के विरोध में हजारों प्रदर्शनकारी बर्लिन की सड़कों पर जमा हुए थे. बर्लिन के एलेक्जेंडर प्लात्ज में पाकिस्तान के छात्र कामरान ने डीडब्ल्यू हिंदी से बात करते हुए बताया कि वो चार लोगों के साथ एक किराए के घर में रहते हैं, जिसका किराया काफी ज्यादा है.
कामरान ने कहा, "बर्लिन में किराए के घर ढूंढना काफी मुश्किल है और कई बार स्कैम भी हो जाते हैं. ब्रोकर कई बार हमें जिन घरों की फोटो और वीडियो दिखाते हैं, वो कई बार फेक होते हैं. स्टूडेंट ऐसे घरों के लिए पहले ही पेमेंट कर देते हैं और स्कैम का शिकार हो जाते हैं."
सत्ताधारी गठबंधन सीडीयू और एसपीडी के लिए चुनाव से पहले ही मुसीबतें शुरू हो गई हैं. जुलाई में, सीडीयू मेयर काय वेगनर को प्रमुख उम्मीदवार के पद से पीछे हटना पड़ा. इसकी वजह जनवरी में बिजली गुल होने के मामले में उनकी तीखी आलोचना थी, जब राजधानी के बड़े हिस्से में चार दिनों तक बिजली गुल थी.
एसपीडी को भी तब मुश्किलों का सामना करना पड़ा जब पुलिस ने स्वास्थ्य क्षेत्र में एक टेंडर प्रक्रिया की जांच के सिलसिले में इसके प्रमुख उम्मीदवार स्टेफान क्रॉख के घर और दफ्तरों पर छापा मारा. हालांकि, क्रॉख ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है.
इस बढ़ते किराये की मार बर्लिन की मशहूर नाइटक्लब संस्कृति पर भी पड़ी है. सामूहिक रूप से चलाए जाने वाले क्लब जॉनी क्नुप्पेल के प्रबंध निदेशक जैकब का कहना है कि हमें अपनी जगह छोड़नी पड़ी क्योंकि हम अब और महंगा किराया बर्दाश्त नहीं कर सकते थे.