सैटेलाइट से होगी धान के रकबे की निगरानी : छत्तीसगढ़ में अब एक क्लिक से पता चलेगा कितना है असली रकबा
छत्तीसगढ़ में धान के वास्तविक रकबे का सैटेलाइट, GIS और रिमोट सेंसिंग से आकलन होगा। FRA और डुबान क्षेत्रों की भी डिजिटल मैपिंग कर फसल का सत्यापन किया जाएगा।
MOU हुआ संपन्न
- Published: 23 Sep 2026, 06:38 PM IST
- Last Updated: 23 Sep 2026, 06:38 PM IST
रायपुर। छत्तीसगढ़ में धान की खेती के वास्तविक रकबे का आकलन अब आधुनिक तकनीक के जरिए करने की तैयारी शुरू हो गई है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय और छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (CGCOST) के बीच बुधवार को एक समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ है। इसके तहत सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और GIS तकनीक की मदद से धान की खेती वाले क्षेत्रों की पहचान, मैपिंग और सत्यापन किया जाएगा।
खेत की वास्तविक स्थिति से डिजिटल रिकॉर्ड का होगा मिलान
इस तकनीकी व्यवस्था का मकसद धान की खेती के रकबे से जुड़े आंकड़ों को ज्यादा सटीक और भरोसेमंद बनाना है। इसके लिए भू-अभिलेख, डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी को आपस में जोड़ा जाएगा। जियो-रेफरेंस्ड कृषि भूमि में उपलब्ध Latitude-Longitude को सैटेलाइट इमेजरी से मिलाकर यह देखा जाएगा कि संबंधित खेत में वास्तव में धान की फसल मौजूद है या नहीं। इससे डिजिटल रिकॉर्ड और खेत की वास्तविक स्थिति के बीच बेहतर मिलान किया जा सकेगा।
FRA और डुबान क्षेत्रों की भी होगी डिजिटल मैपिंग
इस परियोजना का एक अहम हिस्सा वन अधिकार अधिनियम (FRA) और डुबान क्षेत्रों में आने वाली कृषि भूमि की पहचान करना है। ऐसे कई कृषि क्षेत्रों का जियो-रेफरेंस्ड रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने के कारण डिजिटल सत्यापन में दिक्कत आती है। अब इन इलाकों के कृषि भू-भागों की GIS आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी। इसके बाद सैटेलाइट इमेजरी और रिमोट सेंसिंग के माध्यम से वहां धान की खेती का क्षेत्रफल निर्धारित करने का प्रयास किया जाएगा।
बड़े क्षेत्र में कम होगी मानवीय निर्भरता
सैटेलाइट और GIS तकनीक से एक बड़े इलाके में फसल की स्थिति का व्यवस्थित विश्लेषण किया जा सकेगा। इससे धान के रकबे के आकलन में केवल मैनुअल प्रक्रिया पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी। तकनीकी डेटा के आधार पर खेतों की स्थिति का सत्यापन होने से फसल क्षेत्रफल से संबंधित आंकड़ों की विश्वसनीयता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
डिजिटल क्रॉप सर्वे को मिलेगा तकनीकी आधार
खाद्य संचालनालय और CGCOST के बीच हुआ यह सहयोग प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेष रूप से FRA और डुबान क्षेत्रों की डिजिटल मैपिंग से इन इलाकों के कृषि डेटा को डिजिटल सिस्टम से जोड़ना आसान होगा। भू-अभिलेख, GIS मैपिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और सैटेलाइट आधारित सत्यापन को एक साथ इस्तेमाल कर भविष्य में कृषि क्षेत्रफल से जुड़े आंकड़ों का अधिक व्यवस्थित विश्लेषण किया जा सकेगा।
धान उपार्जन व्यवस्था में बढ़ेगी डेटा की भूमिका
छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर धान उपार्जन किया जाता है। ऐसे में वास्तविक धान रकबे की जानकारी उपार्जन से जुड़ी प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण है। नई तकनीकी व्यवस्था के जरिए सैटेलाइट और भू-स्थानिक डेटा का इस्तेमाल बढ़ाकर अधिक प्रमाणिक जानकारी तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा।
ये ब्वारिस्थ अधिकारी रहे उपस्थित
MoU के दौरान प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सोनमणि बोरा, खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले, खाद्य संचालनालय की संचालक डॉ. फरिहा आलम और CGCOST के संचालक कवीश्वर सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
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