
इकरा समेत कई विपक्षी सांसद हिरासत में
दिल्ली में मंगलवार को जंतर-मंतर पर मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों के खिलाफ कथित कार्रवाई और ध्वस्तीकरण के विरोध में आयोजित प्रदर्शन में कई विपक्षी सांसदों ने भी हिस्सा लिया. इस दौरान दिल्ली पुलिस ने कई सामुदायिक नेताओं, विपक्षी सांसदों और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया. प्रदर्शन का आयोजन Monitoring Committee of Indian Muslims के बैनर तले किया गया था. इसमें मुस्लिम संगठनों के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, छात्र और विभिन्न समुदायों के लोग शामिल हुए.
आयोजकों के मुताबिक, हिरासत में लिए गए लोगों में लोकसभा सांसद इकरा हसन, मुहिबुल्लाह नदवी, जिया उर रहमान बर्क, जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान और SIO के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब्दुल हफीज समेत कई अन्य लोग शामिल हैं. आयोजकों ने दावा किया कि हिरासत में लिए गए लोगों को अलग-अलग पुलिस थानों में ले जाया गया.
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता सैय्यद कासिम रसूल इलियास ने कहा कि ये सरकार धरना प्रदर्शन से डरती हैं. इनसे अनुमति मांगों तो यह रिजेक्ट कर देते हैं. लॉ बोर्ड मस्जिद मदरसों, UCC वक्फ आदि को लेकर प्रदर्शन करने आए हैं. प्रदर्शनकारियों ने मस्जिदों, चर्च और अन्य धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में कार्रवाई को लेकर चिंता जताई.
उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े व्यापक मुद्दों से जोड़ते हुए सरकार और प्रशासन से जवाबदेही की मांग की.
लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल
जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी मस्जिदों और अन्य धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में कानूनी और संवैधानिक अधिकारों की बात उठा रहे थे. उनके मुताबिक, शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने वाले नागरिकों को हिरासत में लेना लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है.
प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए
पूर्व सांसद और IMCR के अध्यक्ष ने कहा कि कार्यक्रम की जानकारी अधिकारियों को पहले ही दी गई थी और प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखने का इरादा था. उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपनी चिंताएं लोकतांत्रिक तरीके से रखने का अधिकार मिलना चाहिए. लोकसभा सांसद इकरा हसन ने भी कहा कि शांतिपूर्ण सार्वजनिक प्रदर्शन को खतरे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उनके मुताबिक, प्रशासन को प्रदर्शनकारियों की बात सुननी चाहिए, न कि उन्हें अपनी बात रखने से रोकना चाहिए।
आयोजकों ने कहा कि प्रदर्शन केवल मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों तक सीमित नहीं था. उनके मुताबिक, विभिन्न समुदायों के लोग धार्मिक स्थलों से जुड़ी कार्रवाई और ध्वस्तीकरण के साथ-साथ विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), चुनाव आयोग के कामकाज और युवाओं व समाज से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी चिंताएं रखने के लिए जुटे थे.
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई गलत
आयोजकों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रशासन को कार्यक्रम की पहले से जानकारी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मंच आगे भी संवैधानिक अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता, लोकतांत्रिक जवाबदेही और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से उठाता रहेगा।

जीतेन्द्र भाटी
करीब डेढ़ दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पॉलिटिक्स, क्राइम, सामाजिक और मानवीय मुद्दों पर रिपोर्टिंग. BAG Films की नर्सरी से IBN7, आज़ाद न्यूज़, प्रज्ञा TV, 4 रियल न्यूज, Focus News और न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया होते हुए देश के सबसे बड़े न्यूज नेटवर्क TV9 भारतवर्ष में खबरों के बीच सफर जारी.
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