बदलती लाइफस्टाइल से बढ़ रहा मेंटल स्ट्रेस? आयुर्वेद के ये नुस्खे देंगे आयुर्वेद के ये नुस्खे देंगे - Doon Horizon

Published on 1 अक्टू॰ 2026

लगातार काम और स्क्रीन टाइम के चलते होने वाली मानसिक थकान को कम करने में आयुर्वेद के सरल उपाय काफी मददगार साबित होते हैं। सिर की मालिश, सही सांस लेने के तरीके और संतुलित दिनचर्या अपनाकर आप बिना किसी दवा के मन को शांत रख सकते हैं।

Ayurvedic Tips : सुबह की जल्दबाजी, दफ्तर का तनाव, घंटों स्क्रीन पर टिकी आंखें और अधूरी नींद—आजकल ज्यादातर लोगों की दिनचर्या कुछ ऐसी ही हो गई है। इसका सीधा असर हमारे दिमाग पर पड़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन, भारीपन और बेचैनी महसूस होने लगती है।

आयुर्वेद में मानसिक शांति को शरीर और जीवनशैली के संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। जब तक दिनचर्या में ठहराव नहीं आएगा, तब तक मन का शांत होना मुश्किल है।

यदि आप भी लगातार मानसिक थकान महसूस कर रहे हैं, तो कुछ सरल और पारंपरिक आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाकर अपने मन और शरीर को तरोताजा कर सकते हैं।

1. शिरो अभ्यंग: गुनगुने तेल से सिर की मालिश

आयुर्वेद में सिर की मालिश को ‘शिरो अभ्यंग’ कहा जाता है। हफ्ते में दो से तीन बार सोने से पहले भृंगराज, तिल या नारियल के हल्के गुनगुने तेल से सिर और माथे की हल्के हाथों से मालिश करें।

यह अभ्यास सिर की नसों को आराम पहुंचाता है, रक्त संचार बेहतर करता है और दिनभर की मानसिक थकान को तुरंत हल्का कर देता है। जिन लोगों को देर रात तक नींद नहीं आती, उनके लिए यह तरीका बेहद असरदार साबित होता है।

2. प्राणायाम: सांसों की गति से मन पर नियंत्रण

जब भी मन ज्यादा अशांत हो, तो 10 मिनट के लिए धीमी और गहरी सांस लेने का अभ्यास करें। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम मानसिक बेचैनी को घटाने में सबसे ज्यादा मदद करते हैं।

गहरी और नियंत्रित सांसें लेने से दिमाग को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है, जिससे लगातार चल रहे अनचाहे विचारों की गति धीमी होने लगती है। इसे सुबह खाली पेट या शाम को काम खत्म करने के बाद करना सबसे अच्छा रहता है।

3. ध्यान: केवल 10 मिनट का मानसिक ठहराव

लगातार नोटिफिकेशन और बातचीत के बीच मन को शांत रखने के लिए ध्यान एक सीधा उपाय है। इसके लिए किसी कठिन नियम की जरूरत नहीं है।

रोजाना एक शांत जगह पर आंखें बंद करके बैठें और आती-जाती सांसों पर ध्यान लगाएं। शुरुआती दिनों में मन इधर-उधर भटकेगा, लेकिन नियमित अभ्यास से दिमाग व्यवस्थित होने लगता है और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है।

4. शिरोधारा: गहरे तनाव से राहत की पारंपरिक थैरेपी

अगर तनाव बहुत लंबे समय से बना हुआ है और सिर हमेशा भारी रहता है, तो किसी अच्छे आयुर्वेदिक केंद्र में ‘शिरोधारा’ ली जा सकती है। इस प्रक्रिया में माथे के बीचों-बीच एक तय गति से गुनगुने औषधीय तेल या काढ़े की धार गिराई जाती है।

यह नर्वस सिस्टम को गहरा आराम देती है और अनिद्रा जैसी समस्याओं में विशेष रूप से राहत पहुंचाती है। ध्यान रहे कि यह थैरेपी हमेशा प्रशिक्षित पंचकर्म विशेषज्ञ की देखरेख में ही करानी चाहिए।

5. दिनचर्या और खान-पान में संतुलन

कोई भी उपाय तब तक पूरा असर नहीं दिखाता जब तक बुनियादी आदतें ठीक न हों। रात को समय पर सोने की आदत डालें और बिस्तर पर जाने से कम से कम आधा घंटा पहले मोबाइल फोन से दूरी बना लें।

भोजन में ताजा, हल्का और सुपाच्य खाना शामिल करें। बहुत अधिक तला-भुना, कैफीन और जंक फूड शरीर में वात और पित्त को बढ़ाकर बेचैनी पैदा कर सकते हैं, इसलिए सादा और पौष्टिक आहार अपनाएं।

एक जरूरी सलाह

सिर की मालिश या सामान्य प्राणायाम तो कोई भी अपनी दिनचर्या में शामिल कर सकता है। लेकिन यदि आप किसी गंभीर तनाव, चिंता या अनिद्रा से जूझ रहे हैं, या शिरोधारा जैसी विशेष थैरेपी लेना चाहते हैं, तो पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श जरूर लें।