वृद्धावस्था पेंशन पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- पात्र लाभार्थी का अधिकार नहीं छीन सकती सरकार| Navbharat Live

Published on 16 जुल॰ 2026

वृद्धावस्था पेंशन पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- पात्र लाभार्थी का अधिकार नहीं छीन सकती सरकार

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सार

Allahabad High Court: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वृद्धावस्था पेंशन योजना पर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि पात्र लाभार्थियों को बजट की कमी या लक्ष्य पूरा होने का हवाला देकर पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता।

Allahabad High Court: Eligible Citizens Cannot Be Denied Old Age Pension Due to Budget or Target Limits

इलाहाबाद हाईकोर्ट (सोर्स- फोटो नवभारत)

विस्तार

Allahabad High Court Order: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वृद्धावस्था पेंशन योजना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि राज्य सरकार ने कोई पेंशन योजना लागू की है तो पात्र लाभार्थियों को केवल इस आधार पर पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता कि योजना का लक्ष्य पूरा हो चुका है या पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं है। अदालत ने कहा कि पात्र व्यक्ति को उसके वैधानिक अधिकार से वंचित करना उचित नहीं होगा।

वृद्धावस्था पेंशन योजना का नहीं मिल रहा लाभ

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने मथुरा जिले के चुना कंकड़ गली निवासी एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश चंद्र अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याची ने स्वयं अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि 60 वर्ष से अधिक आयु होने के बावजूद उन्हें वृद्धावस्था पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल रहा है, जबकि वे योजना की पात्रता पूरी करते हैं।

बजट की कमी का हवाला देकर योजना के लाभ से वंचित नहीं कर सकते

याचिका में मुख्य सचिव सहित तीन अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। याची ने अदालत से न केवल पेंशन का लाभ दिलाने, बल्कि पेंशन की राशि बढ़ाने और नियमित रूप से प्रतिमाह भुगतान सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया है।

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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अपने पूर्व में पारित 11 मई और 21 मई 2026 के आदेशों का भी उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि सरकार किसी पात्र नागरिक को केवल प्रशासनिक कारणों, निर्धारित लक्ष्य पूरे होने या बजट की कमी का हवाला देकर योजना के लाभ से वंचित नहीं कर सकती। यदि कोई व्यक्ति योजना की सभी शर्तों को पूरा करता है तो उसे उसका अधिकार मिलना चाहिए।

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मामले में राज्य सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता शरद चंद्र उपाध्याय ने अदालत को बताया कि याची के दावे पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, कोर्ट ने अपने अवलोकन में यह स्पष्ट संकेत दिया कि सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र नागरिकों को राहत देना है तथा प्रशासनिक बाधाएं उनके अधिकारों में अवरोध नहीं बन सकतीं।

हाईकोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में वृद्धावस्था पेंशन सहित अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के मामलों में भी महत्वपूर्ण मिसाल मानी जा रही है। इससे उन हजारों पात्र लाभार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है, जो विभिन्न प्रशासनिक कारणों से योजनाओं का लाभ पाने से वंचित हैं।

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