सुप्रीम कोर्ट ने बनाया नया रोडमैप... न्याय में तेजी लाने की तैयारी, हजारों मामलों का होगा निपटारा

Published on 16 जुल॰ 2026

सुप्रीम कोर्ट ने बनाया नया रोडमैप... न्याय में तेजी लाने की तैयारी, हजारों मामलों का होगा निपटारा

9177 मामलों के निपटारे की तैयारी (getty Image)

सुप्रीम कोर्ट ने लंबित मामलों का बोझ कम करने और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज व व्यवस्थित बनाने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं. 15 जुलाई 2026 को हुई फुल कोर्ट की बैठक में तय किया गया कि 21, 22 और 23 अगस्त को ‘समाधान समारोह’ के तहत विशेष लोक अदालत (Special Lok Adalat) आयोजित की जाएगी, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सभी न्यायाधीश हिस्सा लेंगे. इसके साथ ही अदालत ने करीब 100 ऐसे मामलों के समूह (बंच मैटर्स) को प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का फैसला किया है, जिनके निपटारे से लगभग 9,177 मामलों का एक साथ समाधान हो सकता है. इन मामलों को सामान्य क्रम से हटकर संबंधित बेंचों के सामने रखा जाएगा, ताकि वर्षों से लंबित मामलों को जल्द निपटाया जा सके और न्याय मिलने की प्रक्रिया तेज हो.

फुल कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन बंच मामलों के निपटारे के बाद सबसे पुराने लंबित मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाएगी. नोटिस जारी होने के बाद से लंबित सबसे पुराने मामलों की सुनवाई हर सप्ताह मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को होगी. इसके अलावा अदालत ने मामलों की सूची यानी कॉज लिस्ट को और सरल और व्यवस्थित बनाने का भी फैसला किया है. इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की एक समिति बनाई जाएगी, जो व्यवस्था में सुधार के सुझाव देगी. अदालत का मानना है कि इससे मामलों की सुनवाई अधिक पारदर्शी और सुचारु तरीके से हो सकेगी.

बहस के लिए तय होगी समय-सीमा

फुल कोर्ट ने अंतिम सुनवाई वाले मामलों को लेकर भी नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है. अब ऐसे मामलों में बहस करने वाले वकीलों को पहले से यह बताना होगा कि उन्हें मौखिक दलीलें रखने के लिए कितना समय चाहिए. इससे सुनवाई अनावश्यक रूप से लंबी नहीं चलेगी और अदालत अपने समय का बेहतर मौनेज कर सकेगी. सुप्रीम कोर्ट पहले भी समयबद्ध सुनवाई पर जोर देता रहा है और यह फैसला उसी दिशा में एक और अहम कदम माना जा रहा है.

पार्टी-इन-पर्सन को मिली नई सुविधा

बैठक में आम लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए भी एक अहम निर्णय लिया गया. सुप्रीम कोर्ट नियम, 2013 के तहत अब जो पक्षकार स्वयं अपना मामला लड़ते हैं (पार्टी-इन-पर्सन), उन्हें रजिस्ट्रार के समक्ष वर्चुअल माध्यम से पेश होने का विकल्प मिलेगा. हालांकि, यदि कोई पक्षकार व्यक्तिगत रूप से पेश होना चाहता है तो उसे इसकी अनुमति होगी, लेकिन ऐसी कार्यवाही की न तो लाइव-स्ट्रीमिंग होगी और न ही वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी. सुप्रीम कोर्ट के इन फैसलों को लंबित मामलों की संख्या कम करने, न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने और तकनीक के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. इससे हजारों मामलों के जल्द निपटारे की उम्मीद बढ़ गई है.

पीयूष पांडे

पीयूष पांडे

प्रमुखत: सुप्रीम कोर्ट, वित्त मंत्रालय और भारतीय निर्वाचन आयोग की खबरों की जिम्मेदारी. पत्रकारिता में 22 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. हिंदुस्तान, अमर उजाला, दैनिक भास्कर और आज में सेवाएं दीं. खबरिया चैनल और अखबार के अलावा दैनिक भास्कर के डिजिटल प्लेटफॉर्म में जिम्मेदारी निभाई, जबकि ऑल इंडिया रेडियो के आमंत्रण पर कई विशिष्ट जनों के साक्षात्कार किए.

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