Mathura News: संत प्रेमानंद महाराज का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है. इस प्रवचन में उन्होंने भक्तों और साधकों के जीवन को लेकर 20 महत्वपूर्ण बातें बताई हैं. महाराज ने कहा कि भक्ति का मार्ग आसान नहीं है. इसे निभाने के लिए व्यक्ति को अपने व्यवहार, वाणी, समय, कमाई और इच्छाओं पर नियंत्रण रखना जरूरी है. उन्होंने भक्तों को विपत्ति में भगवान का स्मरण करने, किसी की चुगली नहीं करने, समय व्यर्थ नहीं गंवाने और अपनी भक्ति का अभिमान नहीं करने की सीख दी.
प्रेमानंद महाराज के इस वीडियो को उनके शिष्य रसिक दुलारी की मौत से जोड़कर भी देखा जा रहा है. रसिक शरण दुलारी की मौत के बाद ऐसी बातें सामने आई थीं कि वह भक्ति के मार्ग से भटक गया था और ब्रह्मचर्य का पालन नहीं कर पाया था. हालांकि, इन बातों की अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
ये भी पढे़ं- रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद प्रेमानंद महाराज पहुंचे आश्रम, भक्तों की उमड़ी भीड़ Video वायरल
भक्ति का रास्ता आसान नहीं, इसे निभाना भी कठिन
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि भगवान की भक्ति करना और उस मार्ग पर लगातार बने रहना दोनों अलग बातें हैं. साधक को कई तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में उसे अपने मन को नियंत्रित रखना चाहिए और हर स्थिति में भगवान का स्मरण करना चाहिए. उन्होंने भक्तों को समझाया कि जीवन में आने वाली परेशानियां उन्हें भक्ति से दूर करने के बजाय भगवान के और करीब ले जाएं. इसके लिए धैर्य और संयम जरूरी है.
विपत्ति में भगवान को याद करें
महाराज ने कहा कि संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, भगवान का स्मरण नहीं छोड़ना चाहिए. सुख हो या दुख, सम्मान मिले या अपमान, व्यक्ति को भगवान का नाम लेते रहना चाहिए. उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में घबराने के बजाय भगवान से प्रार्थना करनी चाहिए कि वह उन्हें सहने की शक्ति दें. जीवन में ऐसी परिस्थितियों की कामना करनी चाहिए, जिनसे भगवान का चिंतन और भक्ति बढ़े.
हर किसी से अपने दुख की चर्चा न करें
प्रेमानंद महाराज ने भक्तों को अपने निजी दुख को हर किसी के सामने बताने से भी बचने की सलाह दी. उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति आपकी परेशानी को समझे, यह जरूरी नहीं है. कोई आपके दुख का मजाक भी बना सकता है. इसलिए अपने दुख को भगवान के सामने रखने और उनसे प्रार्थना करने की बात कही गई. साथ ही उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गलती करने के बाद सच्चे मन से शरण में आए और सुधारना चाहे, उसे क्षमा करने का भाव रखना चाहिए.
ये भी पढे़ं- वृंदावन से जुड़े लापता युवाओं के मामलों में पुलिस ने तेज की जांच, सागर के युवक के बाद अब नोएडा की युवती भी मिसिंग
किसी के प्रति मन में द्वेष न रखें
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि किसी व्यक्ति के अपराध या गलत व्यवहार को लेकर हमेशा मन में दुश्मनी रखना ठीक नहीं है. कर्म का फल हर व्यक्ति को अपने कर्मों के अनुसार मिलता है. इसलिए दूसरे के कर्मों को लेकर खुद को परेशान करने के बजाय सहनशीलता और क्षमा का भाव रखना चाहिए. उन्होंने भक्तों को सभी प्राणियों के प्रति परोपकार और सेवा की भावना रखने की सीख भी दी.
वाणी पर रखें नियंत्रण, चुगली से बचें
प्रेमानंद महाराज ने वाणी को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही. उन्होंने कहा कि व्यक्ति की बात ऐसी होनी चाहिए कि उससे सामने वाले के मन को शांति मिले. गुस्सा आने पर भी गाली-गलौज और अश्लील भाषा का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. उन्होंने किसी की कमी दूसरों को बताने से भी मना किया. अगर किसी व्यक्ति में कोई कमी है तो उसे अकेले में उसी व्यक्ति को समझाना चाहिए. उसकी कमी को दूसरों के सामने बताना चुगली बन जाता है.
समय को व्यर्थ न गंवाएं
प्रेमानंदर महाराज ने कहा कि जीवन का हर पल महत्वपूर्ण है. इसलिए खाली बैठकर इधर-उधर की बातें, प्रपंच और बेकार के काम करने में समय नहीं गंवाना चाहिए. समय को भगवान के स्मरण और ऐसे कार्यों में लगाना चाहिए जिनसे जीवन सार्थक बने. उन्होंने व्यर्थ के कामों से भी बचने की सलाह दी. जिस काम का कोई वास्तविक लाभ नहीं है, उसमें जीवन और समय खर्च नहीं करना चाहिए.
कमाई में ईमानदारी जरूरी
प्रेमानंद महाराज ने कमाई को लेकर भी भक्तों को सावधान किया. उन्होंने कहा कि बेईमानी, रिश्वत, चोरी, छल-कपट या किसी गलत तरीके से कमाया गया पैसा व्यक्ति की आध्यात्मिक यात्रा में बाधा बन सकता है. इसलिए व्यक्ति को धर्मसम्मत और ईमानदार तरीके से कमाई करनी चाहिए. कमाई का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना उसका इस्तेमाल.
भोजन भी जीवन और साधना को प्रभावित करता है
प्रेमानंदर महाराज ने बहुत गरिष्ठ और ऐसे भोजन से बचने की बात कही, जो शरीर और मन पर नकारात्मक असर डाले. उन्होंने उचित, हल्का और पथ्य भोजन करने की सलाह दी. उनका कहना है कि साधक को अपने खान-पान पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि शरीर और मन दोनों का असर साधना पर पड़ता है.
भक्ति का अनुभव किसी को दिखाने की जरूरत नहीं
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि साधना के दौरान अगर किसी व्यक्ति को आध्यात्मिक अनुभव होते हैं तो उन्हें हर किसी के सामने बताने या दिखाने की जरूरत नहीं है. भक्ति में मिले अनुभवों को अपने तक रखना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि व्यक्ति को अपनी भक्ति और साधना का अभिमान नहीं करना चाहिए. चाहे कोई कितना भी जप, तप, तीर्थ या साधना करे, उसे अपनी उपलब्धि नहीं समझना चाहिए. सब कुछ भगवान की कृपा से हो रहा है.
सभी का सम्मान करें, खुद सम्मान की इच्छा न रखें
प्रेमानंद महाराज ने कहा कि भक्त को अपने पास आने वाले हर व्यक्ति का सम्मान करना चाहिए, लेकिन खुद सम्मान पाने की इच्छा नहीं रखनी चाहिए. उन्होंने विनम्रता को भक्त के जीवन का जरूरी गुण बताया. इसके साथ ही अपने अंदर मौजूद अच्छे गुणों का भी प्रदर्शन नहीं करना चाहिए. गुणों को दिखाने से अहंकार पैदा हो सकता है और भक्ति कमजोर पड़ सकती है.
बाहरी श्रृंगार में आसक्ति से बचें
प्रेमानंद महाराज ने शरीर के अत्यधिक श्रृंगार और बाहरी दिखावे में आसक्ति से बचने की बात कही. उन्होंने कहा कि व्यक्ति को बाहरी सुंदरता और दिखावे के पीछे ज्यादा नहीं भागना चाहिए. वहीं, इष्ट का तिलक, गुरु की दी हुई कंठी और भजन की माला को उन्होंने सौभाग्य और भक्ति से जुड़े चिह्न के रूप में बताया.
इन 20 बातों को अपनाने से आएंगे दिव्य गुण
प्रेमानंद महाराज के अनुसार, अगर कोई साधक इन बातों को अपने जीवन में उतारता है तो उसके अंदर निरपेक्षता, निष्पक्षता और शांति जैसे गुण विकसित होने लगते हैं. उसकी दूसरों से अपेक्षाएं कम होती जाती हैं और उसका मन भगवान के नाम और गुरु मंत्र के स्मरण में लगने लगता है. ऐसा व्यक्ति सुख-दुख में जल्दी विचलित नहीं होता और उसके मन में किसी के प्रति शत्रुता नहीं रहती. प्रेमानंद महाराज ने महापुरुषों के वचनों को सुनने, उनका मनन करने और धैर्य के साथ भक्ति के मार्ग पर आगे बढ़ने की सलाह दी.
रसिक दुलारी की मौत से जोड़कर क्यों देखा जा रहा वीडियो?
प्रेमानंद महाराज के इस वीडियो को उनके शिष्य रसिक दुलारी की मौत के बाद सामने आई चर्चाओं से जोड़कर देखा जा रहा है. रसिक दुलारी की मौत के बाद उसके भक्ति मार्ग से भटकने और ब्रह्मचर्य का पालन नहीं कर पाने जैसी बातें कही गई थीं. हालांकि, इन दावों की अभी पुष्टि नहीं हुई है. इसी वजह से वीडियो में भक्ति, संयम, समय, वाणी और साधना के अभिमान को लेकर दी गई सीख चर्चा में आ गई है. हालांकि, यह कहना अभी संभव नहीं है कि महाराज का यह प्रवचन रसिक दुलारी की घटना को ध्यान में रखकर ही दिया गया था.

कान्हा अग्रवाल, मथुरा
पिछले 4 वर्षों से पत्रकारिता कर रहा हूं, इस दौरान कई संस्थानों के साथ मिलकर कार्य किया है. फिलहाल TV9 भारतवर्ष के साथ जुड़ा हुआ हूं.
Read More